PGI 500 करोड़ की लागत से बनाएगा रीजन का पहला ओर्गन ट्रांसप्लांट सैंटर, मिलेंगी यह खास सुविधाएं
punjabkesari.in Thursday, Apr 20, 2017 - 07:48 AM (IST)
चंडीगढ़(रवि) : ओर्गन ट्रांसप्लांट करने के मामले में पी.जी.आई. देश के चुनिंदा अस्पतालों में शामिल हो चुका है। पी.जी.आई. पिछले दो वर्षों से देश के दूसरे अस्पतालों से कहीं ज्यादा ट्रांसप्लांट कर रहा है। पी.जी.आई. प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार संस्थान जल्द ही ओर्गन ट्रांसप्लांट को और अधिक बढ़ावा देने के मकसद से अलग ट्रांसप्लांट सैंटर बनाने जा रहा है जिसके लिए केंद्र को प्रोपोजल भेज दिया गया है। सैंटर के लिए 500 करोड़ खर्च होगा। 54 वर्ष पहले देश में दूसरा किडनी ट्रांसप्लांट करने वाला पी.जी.आई. अब तक साढ़े तीन हजार से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है व साथ ही कई दूसरे अंगों में भी ट्रांसप्लांट करने में अस्पताल अब महारत हासिल कर चुका है।
पी.जी.आई. मैडीकल सुपरिंटैंडैंट प्रोफैसर ए.के. गुप्ता की मानें तो अस्पताल ओर्गन ट्रांसप्लांट को काफी गंभीरता से ले रहा है अस्पताल के पास काफी एक्सपर्ट डाक्टरों की टीम हैं जो ओर्गन ट्रांसप्लांट को सफल बनाने का काम कर रही है। इसी को देखते हुए अस्पताल नॉर्थ रीजन का पहला ओर्गन ट्रांसप्लांट सैंटर बनाने जा रहा है इस प्रोजैक्ट का प्रोपोजल पी.जी.आई. प्रशासन ने हैल्थ मिनिस्ट्री को भेज भी दिया है।
500 करोड़ की लागत से बनेगा ट्रांसप्लांट सैंटर :
ब्रेन डैड मरीजों से मिलने वाले ओर्गन को ट्रांसप्लांट करने के लिए अभी अस्पताल ज्यादातर एमरजैंसी के ऑपरेशन थिएटर्स इस्तेमाल करता है जिसकी वजह से दूसरी सर्जरीस कई बार इससे इफैक्ट होती है प्रोफैसर गुप्ता की माने तो हमारे पास ट्रांसप्लांट के रिर्सोसिज काफी कम है जिसके दायरे में रहकर ही हम काम कर रहे हैं। इसलिए हम बाकी कई ओर्गन्स के ट्रांसप्लांट के बारें में नहीं सोचते।
500 करोड़ की लागत से बनने वाले रीजन के इस पहले ओर्गन ट्रांसप्लांट सैंटर में अत्य आधुनिक सुविधाएं होंगी। वहीं सैंटर में 500 बैड की व्यवस्था होगी जिसमें किडनी, लिवर, पैनक्रियाज, लंग्स, हार्ट, बोन मैरो, स्किन, हाथ व फैस ट्रांसप्लांट की भी सुविधा होगी।
कई मुश्किलें होंगी दूर :
वर्ष 1996 से पी.जी.आई. में ओर्गन ट्रांसप्लांट शुरू हुआ था। 57 वर्ष पहले किडनी ट्रांसप्लांट से शुरू हुआ था अब अस्पताल लिवर, कोर्निया, पैनक्रियाज, हार्ट को ट्रांसप्लांट कर रहा है। वहीं अस्पताल अब लंग्स ट्रांसप्लांट की भी तैयारी कर चुका है लेकिन इन ट्रांसप्लांट के लिए अस्पताल की पास अलग से ओ.टी. नहीं है।
पी.जी.आई. में पिछले कुछ वर्षो से ट्रांसप्लांट के ग्राफ में काफी तेजी आई है जिसके लिए अब उन्हें अलग से ओ.टी. व आई.सी.यू. की जष्रत है। अभी तक एमरजैंसी व दूसरी ओ.टी. को इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसकी वजह से दूसरी सर्जरी कई बार इफैक्ट होती है लेकिन नया ट्रांसप्लांट सैंटर बन जाने के बाद उक्त मुशकिलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं ओर्गन ट्रांसप्लांट को भी काफी बढ़ावा मिलेगा।
