हॉलमार्क के नाम पर 35 रुपए से ज्यादा नहीं वसूल सकेंगे ज्वैलर

punjabkesari.in Thursday, Jun 08, 2017 - 08:27 AM (IST)

चंडीगढ़(नेहा) : अब हॉलमार्क के नाम ज्वैलर ग्राहकों को बेवकूफ बनाकर मनमर्जी नहीं कर सकेंगे न ही उनसे ठगी की जा सकेगी। भारतीय मानक ब्यूरो ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी ज्वैलर ग्राहक से हॉलमार्क के लिए 35 रुपए से अधिक चार्ज नहीं करेगा, अगर किसी ज्वैलर की शिकायत आती है कि उसने हॉलमार्क के 35 रुपए से ज्यादा वसूले हैं तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

 

‘पंजाब केसरी’ से विशेष बातचीत करते हुए भारतीय मानक ब्यूरो के डिप्टी डायरैक्टर जनरल अक्षय कुमार शर्मा ने कहा कि कोई भी ज्वैलर किसी एक आभूषण के लिए 35 रुपए से ज्यादा हॉलमार्किंग फीस चार्ज नहीं कर सकता अगर कोई भी ऐसा करता पाया गया तो हम उनके खिलाफ एक्शन लेंगे। इसके अलावा अगर किसी से पहले भी कभी इससे ज्यादा हॉलमार्किंग फीस ली गई है तो वह अपने बिल के साथ हमारे ऑफिस में आकर शिकायत लिखवा सकता है उन सभी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। 

 

अमृतसर के ज्ञानी सर्राफा मार्कीट में की रेड :
गलत तरीके से जेवरों पर हॉलमार्किंग किएजाने की सूचना के बाद बी.आई.एस. चंडीगढ़ की टीम ने अमृतसर के ज्ञानी सर्राफा मार्कीट में एक हॉलमार्क केंद्र पर छापा मारा, जहां पर पाया गया कि बी.आई.एस. की मान्यता के बिना ही सोने एवं अन्य उत्पादों की गैरकानूनी ढंग से हॉलमार्किंग की जा रही थी। दुकान में मौजूद सभी दस्तावेजों व जेवरों को जब्त कर लिया है। 

 

किसी भी गलत काम को रोकने के लिए हम पूरी तरह जिम्मेदार हैं, तुरंत कार्रवाई करते हैं

सवाल : वैबसाइट में मौजूद जानकारी को 2015 के बाद से अपडेट नहीं किया गया है। वैबसाइट के अनुसार  चंडीगढ़ में मौजूद तीनों हॉलमार्किंग सैंटर अपनी लाइसैंस की वैधता खो चुके हैं, लेकिन फिर भी उनका स्टेटस ऑपरेटिव कैसे?
जवाब : इस बारे में मैं सिर्फ इतना बता सकता हूं कि अगर किसी हॉलमार्किंग सैंटर पर किसी तरह की जांच भी चल रही होती है तो भी हम उन्हें कुछ वक्त के लिए काम करने से मन कर देते हैं, लेकिन उनका स्टेटस ऑपरेटिव ही रहता है। इन तीनो सैंटर्स में से एक का लाइसैंस मार्च, 2017 में पूरा हुआ है, लेकिन इसका रिनुअल का प्रोसैस चल रहा है, बाकि दोनों सैंटर्स जिनकी अवधि 2015 में खत्म हो चुकी है उनकी जानकारी फाइल्स चैक कर के ही पता चल सकती है। 

सवाल : सामने आया है कि हॉलमार्किंग सैंटर में रेंडम सैंपलिंग की जाती है, क्या यह सही है?
जवाब : जी बिलकुल! बी.आई.एस. रूल बुक्स में ये लिखा गया है कि हॉलमार्किंग सैंटर में स्टपिंग के लिए एक स्लॉट लेकर जाया जाता है जिसमें से रैंडम सैंपलिंग की जाती है। हर एक आभूषण का फेयर एस्से करना भी मुमकिन नहीं इससे उनकी बनावट पर भी फर्क पड़ सकता है। 

सवाल : रैंडम सैंपलिंग करना तो अपने आप में धोखा है, अगर उस लोट में कुछ आभूषण 22 और कुछ 20 कैरेट के हुए तो?
जवाब : ऐसा होना बहुत हद तक मुमकिन नहीं है और हमारे ऑफिसर्स इतने एक्सपट्र्स हैं कि उन्हें आभूषण में इतने बड़े फर्क का पता चल जाता है। 

सवाल : अगर आपके ऑफिसर्स इतने ही एक्सपर्ट हैं तो फिर हॉलमार्किंग ज्वैलरी में मिलावट का जिम्मेदार ज्वैलर को क्यों बनाया गया है?
जवाब : इसका जवाब बहुत सीधा सा है, क्योंकि उस आभूषण को बेचने के बाद उससे कमाई भी ज्वैलर ने ही की है, इसलिए उसे रिफंड करने के लिए कहा जाता है वो महज वह कीमत जो लिए गए पैसे और दिए गए जेवर में बनता है लेता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हॉलमार्किंग सैंटर की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती, ऐसे किसी भी केस के सामने आने के बाद हॉलमार्किंग सैंटर पर भी बी.आई.एस. द्वारा पैनल्टी लगाई जाती है। 

सवाल : एक जेवर को हॉलमार्किंग के नियम अनुसार चैक करने में कितना टाइम लगता है?
जवाब : बी.आई.एस. के मानकों के अनुसार किसी भी ज्वैलरी को हॉलमार्क करने से पहले फायर ऐशे और उसके बाद लेजर चैक से गुजरना होता है और इस पूरे प्रोसैस को खत्म होने में कम से कम 6 घंटे का समय लगता है। इससे पहले ऐसा हो जाना मुमकिन नहीं अगर ऐसा होता है तो फिर वो हॉलमार्किंग असली नहीं है।  

सवाल : आपके ऊपर विश्वास करके आज लोग आंखें बंद करके हॉलमार्क किया हुआ सोना लेने को तैयार हैं ऐसे में हो रही धोखाधड़ी के लिए आपकी जिम्मेदारी कहां तक है?
जवाब : किसी भी तरह के गलत काम को रोकने के लिए हम पूरी तरह जिम्मेदार हैं, जब भी हमें ऐसे किसी भी काम की जानकारी मिलती है या कोई शिकायत आती है हम उस पर तुरंत कार्रवाई करते हैं। 


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