ई-रिक्शा कंपनी का PU के साथ करार हो सकता है खत्म

10/9/2019 3:28:00 PM

चंडीगढ़(रश्मि) : पंजाब यूनिवर्सिटी (पी.यू.) में पिछले पांच दिनों से ई-रिक्शा चालकों की चल रहीं हड़ताल सुलझने का नाम नहीं ले रही है। अगर यह मुद्दा जल्द ही नहीं सुलझा तो ई-रिक्शा कंपनी का पी.यू. के  साथ करार खत्म हो सकता है। इधर, ड्राइवर डी.सी. रेट पर वेतन लेने के जिद्द में अड़े हैं। 

वहीं कंपनी ड्राइवरों को वेतन देने के तैयार नहीं है। पहले इन ड्राइवरों को (8 हजार) रुपए का वेतन मिल रहा था लेकिन पिछले दो माह से यूनिवर्सिटी में ई-रिक्शा चालकों से वर्किंग दिनों में 700 व सरकारी छुट्टी वाले दिन के 400 रोज के वसूले जा रहे थे। चालकों का वेतन खत्म कर दिया गया था और कंपनी ने ड्राइवरों को कह दिया था कि कंपनी को पैसे देने के बाद जो बचता है वह आपका है। 

दिन के 700 से 1000 रुपए कमाता है ई-रिक्शा चालक :
एक ई-रिक्शा चालक दिन में 10 से 12 घंटे ई-रिक्शा चलाकर 700 से 1000 के बीच कमाता है। ऐसे में ई-रिक्शा चालकों को 100 से 300 हर रोज मुश्किल से बचते हैं। ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि लंबे समय तक ड्यूटी करने के बावजूद घर का खर्चा चल पाना मुश्किल है। इतना किराया तो ऑटो मालिकों का भी नहीं हैै। करीबन 300 रुपए में किराए पर आटो लेकर वह पूरे दिन ऑटो शहर में कहीं भी चल सकते हैं लेकिन यहां सिर्फ यूनिवर्सिटी में ई-रिक्शा चलाने के लिए इतना किराया वसूला जा रहा है। 

जानकारी के मुताबिक ई-रिक्शा चालकों की बैठक  कंपनी मालिकों से हो चुकी है। बैठक में ई-रिक्शा चालकों के वेतन व पी.एफ. का मुद्दा नहीं सुलझ सका है। इससे पहले भी वेतन कम होने के कारण ही ई-रिक्शा चालकों (ड्राइवर) की कमी आ गई थी। जिससे कैंपस में सिर्फ 15 के करीब ई-रिक्शा ही दिन में चल पा रहे थे। अभी कुछ ई-रिक्शा चालकों की संख्या बढ़ी थी। 

कैंपस में छुट्टियां चल रही हैं। अधिकतर स्टूडैंट्स घर चले गए हैं। लेकिन कैंपस में बाहर से आने वाले स्टूडैंट्स का विभिन्न हॉस्टलों में जाना या रैजीडैंशियल क्षेत्रों में जाना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। उन्हें काफी दूर पैदल चलना पड़ रहा है या फिर आटो पर काफी पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। 

सोमवार को हुई थी इस संबंध में बैठक :
उधर, पी.यू. प्रबंधन की सोमवार को हुई ई-रिक्शा चालकों की बैठक में ई-रिक्शा चालकों को निर्देश दिए कि उनका ई-रिक्शा कंपनी के साथ जो भी वेतन का मसला है वह अपनी कंपनी के साथ-साथ जल्द सुलझाए और कैंपस में सर्विस शुरू करे। क्योंकि रिक्शा चालकों को कंपनी के मालिकों से सीधा करार है। इस करार को लेकर पी.यू. प्रबंधन का कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है इसलिए इस मसले को ई-रिक्शा चालकों को खुद ही निपटाना होगा।

कैंपस में इस समय 25 से 28 ई-रिक्शा चल रहे :
पी.यू. कैंपस सैक्टर-25 में पहले से ही ई-रिक्शा की सर्विस काफी कमी है लेकिन फिर भी स्टूडैंट्स सैक्टर-14 से 25 तक सिर्फ 10 रुपए में पहुंच जाते हैं। कैंपस में इस समय 25 से 28 ई-रिक्शा चल रहे थे। ई-रिक्शा सर्विस कैंपस में एक करार के तहत मई 2016 में आऊटसोर्सिंग के तहत शुरू की थी। 

ई-रिक्शा प्रोजैक्ट पी.यू. के पूर्व रजिस्ट्रार कर्नल जी.एस. चड्ढा के कार्यकाल में शुरू हुआ था। इस दौरान उन पर आरोप लगे थे कि ई-रिक्शा जिस कंपनी ने शुरूकी थी वह चड्ढा के जानकार है। बहरहाल, पी.यू. का ई-रिक्शा कंपनी के साथ टाईअप (करार)अगले वर्ष मई 2020 में खत्म होनेे जा रहा है। अगले वर्ष रिन्यू होगा। तभी ई-रिक्शा कैंपस में चल पाएंगे।

ई-रिक्शा पर होने वाला खर्च :
कुछ रिक्शा चालकों ने बताया कि हर माह ई-रिक्शा को चार्ज करने का बिल 40 से 50 हजार के करीब आता है। वहीं ई-रिक्शा की बैटरी भी आठ माह में बदलती पड़ती है। रिक्शा में चार बैटरी डलती है। जो हर वर्ष ही ई-रिक्शा में बदलनी पड़ती है। 40 रिक्शा की बैटरी पर हर वर्ष करीबन डेढ़ लाख रुपए का खर्चा होता है। 

ई-रिक्शा चालकों के वेतन में हर माह डेढ़ से दो लाख रुपए खर्च आ जाता है। इसके अलावा मैंटीनैंस और बिजली बिल अलग से है। ऐसे में आंकड़ों पर नजर डाले तो ई-रिक्शा कंपनी के संचालक वर्ष भर में 5 से 6 लाख रुपए ही कमा पा रहे हैं। ई-रिक्शा के चलने से पहले स्टूडैंट्स को रिक्शा और ऑटो में काफी पैसे खर्च करने पड़ते थे या फिर बस शटल का इंतजार करना पड़ता था।  


Priyanka rana

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