13 साल की बच्ची की बदौलत 6 लोगों को मिली नई जिंदगी

2021-07-20T00:36:30.677

चंडीगढ़, (पाल): 13 साल की मासूस की बदौलत 6 लोगों को एक नई जिंदगी मिल पाई है। 18 जुलाई को ब्रेन डैड होने के बाद बच्ची के ऑर्गन जरूरतमंद मरीजों को पी.जी.आई. ने ट्रांसप्लांट किए हैं। एक्टिंग नॉडल ऑफिसर रोटो प्रो. अशोक कुमार ने बताया डोनर फैमिली खुद चाहती थी कि उनकी बेटी की जिंदगी यूं ही जाया न जाए। भले ही बेटी दुनिया में न रहे लेकिन किसी और के शरीर में वह इस दुनिया को देखे। इसी सोच के साथ उन्होंने यह फैसला लिया। सहमति के बाद बच्ची का हार्ट, लिवर, किडनी, कार्निया निकाला गया। हार्ट को छोड़ सभी ऑर्गन पी.जी.आई. में मरीजों को ट्रांसप्लांट हुए लेकिन हार्ट का कोई मैचिंग रिसीपियंट पी.जी.आई. में नहीं मिला।

 

हमने कई दूसरे ट्रांसप्लांट हॉस्पिटल से भी कॉन्टैक्ट किया। हमें मुंबई के सर एच.एन. रिलांयस हॉस्पिटल में हार्ट का मैचिंग रिसीपियंट मिला। ऑर्गन को भेजना ऐसे में हमेशा मुश्किल होता है। पी.जी.आई. से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर सुबह 6.35 बजे एयरपोर्ट पर हार्ट भेजा गया। ऑर्गन जितना बड़ा होता है, उसके खराब होने के चांस उतने बढ़ जाते हैं। ऐसे में यह वक्त के साथ रेस लगाने जैसा है। चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस, सी.आई.एस.एफ. और एयरपोर्ट स्टाफ का इसमें बहुत सहयोग रहा, जिसकी वजह से हम वक्त पर ऑर्गन भेज पाए।


8 जुलाई को घर में हो गई थी बेहोश
चंडीगढ़ की रहने वाली 13 साल की बच्ची 8 जुलाई को घर पर ही बेहोश हो गई। परिवार उसे सैक्टर-16 हॉस्पिटल में लेकर गया लेकिन हालत ज्यादा खराब होने की वजह से उसे अगले दिन पी.जी.आई. रैफर किया गया। 10 दिन जिंदगी और मौत से लडऩे के बाद डॉक्टर्स ने उसे सभी प्रोटोकॉल के बाद 18 जुलाई को ब्रेन डैड घोषित कर दिया था। पी.जी.आई. कोऑर्डिनेटर ने जब परिवार को ऑर्गन डोनेशन के लेकर बताया तो पिता ने इस मुश्किल वक्त में ही हिम्मत का फैसला लेते हुए ऑर्गन डोनेशन के लिए सहमति दी। बच्ची के पिता कहते हैं कि यह एक ऐसा कदम और काम है, जिसके बारे में लोगों को पता होना चाहिए। हालांकि यह आसान नहीं है। किसी अपने को खोना और उसके ऑर्गन डोनेट करना लेकिन हम नहीं चाहते थे कि जो दर्द हम झेल रहे हैं, वह कोई और भी महसूस करे। बस, यही सोच कर हमने ऑर्गन डोनेट करने का फैसला लिया।

बहुत ही कम वक्त में इस तरह का ट्रांसप्लांट करना आसान नहीं है। फिर चाहे आपके पास एक्सपटर््स ही क्यूं न हों। यह सब बेकार है अगर फैमिली साथ न दे। इस मुश्किल वक्त में इस तरह का बड़ा फैसला आसान नहीं है। परिवार को आभार व्यक्त करते हैं, जिनकी बदौलत किसी को एक नई जिंदगी मिल पाई है।
-डॉ. जगत राम, डायरैक्टर, पी.जी.आई.  
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

News Editor

ashwani

Recommended News