चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में हुआ 10वें इंटरनेशनल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आगाज़, 40 देशों की 100 से ज़्यादा टॉप ग्लोबल यूनिवर्सटियों के 130 प्रतिष्ठित शिक्षाविद हुए शामिल
punjabkesari.in Monday, Jun 29, 2026 - 06:31 PM (IST)
नेशनल डेस्क : राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत अंतरराष्ट्रीयकरण के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित 10वें इंटरनेशनल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएफडीपी)-2026 का आज भव्य शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम में 40 देशों की 100 से अधिक यूनिवर्सिटियों से 130 से ज्यादा प्रसिद्ध शिक्षाविद, रिसर्चर, साइंटिस्ट और अकादमिक लीडर्स शामिल हुए।
यह प्रोग्राम एकेडमिक बातचीत, ज्ञान के आदान-प्रदान और देशों के बीच सहयोग के लिए एक ग्लोबल प्लैटफ़ॉर्म का काम करता है। यह छात्रों और शिक्षकों को वैश्विक शैक्षणिक विशेषज्ञता, रिसर्च के नए ट्रेंड्स तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़ने का मौका देता है। इस वर्ष आईएफडीपी में क्यूएस रैंकिंग प्राप्त 58 यूनिवर्सिटियों के एक्सपर्ट्स तथा दुनिया की टॉप 20 यूनिवर्सिटियों के 6 शिक्षाविद भी शामिल हैं। इसके अलावा विश्व के टॉप 2% वैज्ञानिकों में शामिल 37 रिसर्चर्स भी कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

इस अवसर पर नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के चेयरपर्सन प्रोफ़ेसर पंकज अरोड़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि अन्य विशिष्ट अतिथियों में नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर से स्क्रीनराइटिंग के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. इयान जॉन डिक्सन, नॉलेज इंफॉर्मेशन एंड डेटा साइंस ग्रुप के फाउंडिंग मेंबर एवं को-लीड और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, यूनाइटेड किंगडम के मशीन लर्निंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ल्यूक डिकेंस, इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्दी एजिंग डायरेक्टर और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, यूनाइटेड किंगडम में सिस्टम्स बायोलॉजी के प्रोफ़ेसर (डॉ.) जर्ग बहलर, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी चांसलर के सलाहकार प्रो. (डॉ.) आरएस बावा, वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) रविराजा एन. सीताराम और इंटरनेशनल अफेयर्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) राजन शर्मा भी मौजूद थे।
अपने संबोधन में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के चेयरपर्सन प्रो. पंकज अरोड़ा ने कहा, "हमारे देश में ज्ञान सृजन की एक समृद्ध विरासत रही है, जिसमें तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षण केंद्रों ने दुनिया भर के विद्वानों को आकर्षित किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय यूनिर्सिटियों के प्रदर्शन और प्रतिनिधित्व में वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं, जिससे रिसर्च,इनोवेशन और अकादमिक उत्कृष्टता को गति मिली है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के 'इंटरनेशनल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम' जैसे कार्यक्रम वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियों को मज़बूत करने, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने और शिक्षाविदों को 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में योगदान देने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।"

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में मशीन लर्निंग के एसोसिएट प्रोफेसर, प्रोफ़ेसर डॉ. ल्यूक डिकेंस ने कहा, "आज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने बहुत तेज़ी से तरक्की की है तथा हम धीरे-धीरे इस पर निर्भर होते जा रहे हैं। हालाँकि, हमें सावधानी से आगे बढ़ना होगा। जहाँ एआई से बहुत सारे मौके मिलते हैं, वहीं इससे बड़ी चुनौतियाँ और संभावित जोखिम भी जुड़े हैं। हमें सुनिश्चित करना होगा कि एआई इस तरह से विकसित और इस्तेमाल किया जाए जिससे हमारा दैनिक जीवन और समाज की भलाई हो। हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम विचारकों के तौर पर आगे आएँ और दुनिया को वैसा बनाने में मदद करें जैसा हम उसे बनाना चाहते हैं। दूरदर्शी नज़रिया और मार्गदर्शक सिद्धांतों के परिणामस्वरूप चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी आज ग्लोबल स्तर पर पहुँच पाई है। यह एक असाधारण उपलब्धि है।"
सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में स्क्रीनराइटिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. इयान जॉन डिक्सन ने कहा,"आज के दौर में जब हमारे पास एआई जैसी टेक्नोलॉजी है जो सब कुछ कर सकती है लेकिन फिर भी एआई कभी भी इंसानी अनुभव, रचनात्मकता और कहानी कहने की शक्ति का स्थान नहीं ले सकती। ऐसे में युवाओं को अपनी संस्कृति,ज्ञान और देश की कहानियों को तकनीक का प्रयोग कर दुनिया तक पहुँचाना चाहिए। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने वास्तव में छात्र-केंद्रित शिक्षा को अपनाया है। यहाँ खोजना, सीखना और सशक्त होना सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि शिक्षा का मूलमंत्र हैं।"

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) रविराजा एन सीताराम ने कहा:"चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का लक्ष्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में एक ग्लोबल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस बनना है ताकि ऐसे ग्लोबल लीडर्स तैयार हो सकें जो समाज की सेवा करें। इसी उद्देश्य से दुनिया भर के शिक्षाविदों, रिसर्चर और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के साथ ज्ञान, रिसर्च और सर्वोत्तम अकादमिक प्रथाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं। यह इंटरनेशनल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम ग्लोबल कोलैबोरेशन को नई दिशा देगा। हमें विश्वास है कि ऐसे प्रयास न केवल हमारी फैकल्टी और छात्रों को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करेंगे, बल्कि उच्च शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करेंगे।"
वाइस-चांसलर ने कहा, "चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027 में 526वीं रैंक हासिल करना हम उपलब्धि है। सीयू लगातार तीन सालों तक क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 में नंबर वन प्राइवेट यूनिवर्सिटी रही है और अब वर्ल्ड की टॉप 2 % और भारत की टॉप 1% यूनिवर्सिटियों में शामिल है। और जिसकी प्रमुख वर्ल्ड की टॉप यूनिवर्सिटियों के साथ 530 इंटरनेशनल कोलेबोरेशन हैं।"
इस ग्लोबल ग्रुप में इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटर साइंस, मैनेजमेंट, एलाइड हेल्थ साइंसेज, आर्किटेक्चर, लीगल स्टडीज़, लिबरल आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज़, टीचर एजुकेशन, बायोटेक्नोलॉजी, फ़ार्मेसी, डेटा साइंस, सस्टेनेबिलिटी स्टडीज़, सोशल साइंसेज और अन्य नए इंटरडिसिप्लिनरी विषय शामिल हैं।
इस 10 दिवसीय प्रोग्राम में एक्सपर्ट लेक्चर, पैनल डिस्कशन, खास विषयों पर सेशन, रिसर्च पर बातचीत और सहयोगात्मक गतिविधियां शामिल होंगी। जिनका उद्देश्य शिक्षकों को पढ़ाने के नए तरीकों, नई टेक्नोलॉजी और हायर एजुकेशन केग्लोबल नज़रिए से परिचित कराना है।
