रुपया होगा और कमजोर, ₹99 प्रति डॉलर तक गिरने का अनुमान, BMI ने जताई आशंका

punjabkesari.in Monday, Aug 17, 2026 - 04:00 PM (IST)

नई दिल्लीः भारतीय रुपया आने वाले दो वित्त वर्षों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और कमजोर हो सकता है। फिच सॉल्यूशंस की कंपनी BMI के मुताबिक, ऊंची ऊर्जा कीमतों, वैश्विक स्तर पर बढ़ती जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और भारत-अमेरिका के ब्याज दर अंतर में बदलाव से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।

BMI ने अनुमान जताया है कि रुपया वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक 97 रुपए प्रति डॉलर और वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक 99 रुपए प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है। फिलहाल रुपया करीब 95.4 रुपए प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष से बढ़ा दबाव

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद रुपया करीब 4 प्रतिशत कमजोर हुआ है। संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने से भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में लगातार तेजी से देश का आयात बिल बढ़ सकता है और डॉलर की मांग पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि, BMI का मानना है कि सरकार की ओर से हाल में उठाए गए कदम विदेशी पूंजी के प्रवाह को समर्थन दे सकते हैं और रुपए की गिरावट को सीमित करने में मदद करेंगे। रिपोर्ट में यह भी उम्मीद जताई गई है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का स्थायी समाधान होने पर वित्त वर्ष के बाद के हिस्से में दबाव कुछ कम हो सकता है।

ब्याज दरों का अंतर भी चिंता

भारत और अमेरिका की नीतिगत ब्याज दरों के बीच अंतर रुपये के लिए पहले की तुलना में कम अनुकूल हो सकता है। BMI का अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2026 के बाकी हिस्से में अपनी नीतिगत दर 3.75 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है और 2027 में इसमें 0.50 प्रतिशत की कटौती कर सकता है। वहीं, BMI को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक फरवरी 2027 में नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है।

'सुपर अल नीनो' से भी जोखिम

रिपोर्ट में संभावित 'सुपर अल नीनो' को भी रुपए के लिए एक जोखिम बताया गया है। इसके कारण कृषि निर्यात प्रभावित होने और खाद्य आयात की मांग बढ़ने की आशंका है। हालांकि, भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार होने से इस जोखिम का कुछ असर कम हो सकता है।

इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कॉल सेंटर जैसी सेवा गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना भी निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती है। हालांकि, मजबूत सेवा अधिशेष से निकट अवधि में देश के बाहरी खाते को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

सरकारी कदमों से मिल सकता है सहारा

सरकार और RBI की ओर से विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें विदेशी निवेशकों के लिए करों में कटौती, भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश की पहुंच बढ़ाना और कम लागत वाली विदेशी मुद्रा हेजिंग सुविधाएं शामिल हैं।

BMI के अनुसार, इन उपायों के बाद करीब 40 अरब डॉलर का विदेशी पोर्टफोलियो निवेश आया है। भारत का मजबूत सेवा अधिशेष और विदेशों से आने वाला धनप्रेषण भी रुपए को सहारा दे सकता है।

संघर्ष लंबा खिंचा तो बढ़ेगा जोखिम

BMI ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के और बढ़ने या लंबे समय तक जारी रहने को रुपये के अनुमान के लिए सबसे बड़ा नकारात्मक जोखिम बताया है। ऐसा होने पर तेल की कीमतों में और तेजी तथा वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। इसके अलावा, रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से भारत पर ऊंचे शुल्क लगाए जाने का जोखिम भी है। इससे भारत के निर्यात और विदेशी निवेशकों के भरोसे पर असर पड़ सकता है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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