वैश्विक मसाला व्यापार में टिके रहने के लिए स्थिरता और खाद्य सुरक्षा जरूरी: विशेषज्ञ

punjabkesari.in Thursday, May 07, 2026 - 01:56 PM (IST)

नई दिल्लीः वर्ल्ड स्पाइस ऑर्गनाइजेशन और दक्षिण भारत के लिए नीदरलैंड साम्राज्य का महावाणिज्य दूतावास के सहयोग से आयोजित ‘सस्टेनेबल स्पाइस वैल्यू चेन’ संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक मसाला व्यापार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए स्थिरता और कड़े खाद्य सुरक्षा मानक बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। यह कार्यक्रम बुधवार को ले मेरिडियन में आयोजित किया गया, जिसमें निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सरकारी प्रतिनिधियों, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और स्थिरता विशेषज्ञों ने भाग लिया।

दक्षिण भारत के लिए नीदरलैंड के महावाणिज्य दूत एवोट डी विट ने उद्घाटन भाषण में कहा कि बदलते वैश्विक मानकों को पूरा करने के लिए मजबूत प्रमाणन और गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मसाला क्षेत्र में स्थिरता का मतलब केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि उचित वेतन, महिलाओं की भागीदारी, छोटे किसानों का सशक्तिकरण और मजबूत किसान समूहों का निर्माण भी है।

उन्होंने सरकारों, शोध संस्थानों, निजी उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच सहयोग को स्थायी समाधान विकसित करने के लिए आवश्यक बताया। स्पाइसेस बोर्ड इंडिया के विपणन निदेशक बी. एन. झा ने कहा कि भारत 250 से अधिक प्रकार के मसाले और मूल्यवर्धित उत्पाद 180 से ज्यादा देशों को निर्यात करता है। उन्होंने बताया कि यूरोपीय बाजार में भारतीय मसालों की मांग बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं।

झा ने कहा कि स्पाइसेस बोर्ड अच्छी कृषि पद्धतियों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, समेकित कीट नियंत्रण, स्वच्छ प्रसंस्करण प्रणाली और किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहा है, ताकि मसाला मूल्य श्रृंखला में स्वच्छता और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

संगोष्ठी में यूरोप के बदलते नियमों और उनके भारतीय मसाला निर्यात पर प्रभाव पर भी चर्चा हुई। विकासशील देशों से आयात को बढ़ावा देने वाले केंद्र के विशेषज्ञ वॉर्नर यूटरविज्क ने कहा कि टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग बढ़ने से यूरोप भारतीय मसालों के लिए दीर्घकालिक अवसर प्रदान करता रहेगा।

रामकुमार मेनन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब केवल उत्पाद की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि पारदर्शिता, पर्यावरणीय प्रभाव, श्रम स्थितियों और आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीय ट्रेसबिलिटी को भी महत्व दे रहे हैं। संगोष्ठी में मसाला क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिमों और उन्हें कम करने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

jyoti choudhary

Related News