मैन्यूफैक्चरिंग सैक्टर में मजबूती से देश की आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने में मिल रही मदद
punjabkesari.in Tuesday, Jul 07, 2026 - 06:13 PM (IST)
नई दिल्लीः मैन्यूफैक्चरिंग सैक्टर में लगातार मजबूती ने अप्रैल-मई के दौरान देश की आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को सुस्त पड़ने से बचाने में अहम भूमिका निभाई। एचएसबीसी ग्लोबल इन्वैस्टमैंट रिसर्च की जारी रिपोर्ट के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले इस क्षेत्र को मजबूत निर्यात और इन्वैंट्री बढ़ाने से उल्लेखनीय समर्थन मिला।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के कारण कंपनियों ने एहतियात के तौर पर इन्वैंट्री बढ़ाई, जिससे विशेष रूप से उपभोक्ता वस्तुओं के विनिर्माण को लाभ हुआ। वहीं, अमरीका में अपेक्षाकृत कम शुल्क का लाभ उठाते हुए भारतीय कंपनियों ने संभावित 'सैक्शन 301' टैरिफ लागू होने से पहले गैर-तेल निर्यात बढ़ाया, जिससे फैक्टरी गतिविधियों में तेजी आई।
विकास दर में सुस्ती के संकेत भी मौजूद
एचएसबीसी ने अपने 100 ग्रोथ इंडिकेटर्स के विश्लेषण में कहा कि अप्रैल-मई के दौरान आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। रिपोर्ट में मजबूत अल-नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को कृषि क्षेत्र और ग्रामीण मांग के लिए प्रमुख जोखिम बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार सेवा क्षेत्र, जिसकी जी.डी.पी. में करीब 55 प्रतिशत हिस्सेदारी है, आगे भी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है। इसके अलावा तेल कीमतों के युद्ध-पूर्व स्तर पर लौटने से व्यापार और परिवहन क्षेत्र को लाभ मिलने की संभावना है, जबकि आसान वित्तीय परिस्थितियां वित्तीय क्षेत्र के विस्तार में मददगार साबित हो सकती हैं।
कृषि और ग्रामीण मांग पर बढ़ी चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र सामान्य से अधिक तापमान, लगभग 30 प्रतिशत कम बारिश और जलाशयों में घटते जलस्तर जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके चलते ग्रामीण मांग पर दबाव बढ़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं की बेरोजगारी बढ़ने, दोपहिया वाहनों की बिक्री की रफ्तार धीमी होने, बैंक जमा में सुस्ती और जून में घरेलू जीएसटी संग्रह में कमी जैसे संकेत भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव को दर्शाते हैं।
