Rupee Down: रुपया धड़ाम, डॉलर के मुकाबले 2 महीने के निचले स्तर पर, जानिए क्यों कमजोर हुई भारतीय करेंसी?

punjabkesari.in Thursday, Sep 17, 2026 - 11:46 AM (IST)

मुंबईः वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों की कमजोर धारणा से रुपया बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में 19 पैसे टूटकर 96 प्रति डॉलर से नीचे पहुंच गया। यह दो महीने से अधिक समय में पहली बार है जब रुपया इस स्तर से नीचे आया है। घरेलू मुद्रा ने हालांकि, बाद में शुरुआती गिरावट की कुछ भरपाई की और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप के बाद 10 पैसे की बढ़त के साथ कारोबार करने लगा। शुरुआती कारोबार में टूटकर 96.10 प्रति डॉलर पर आ गया जो पिछले बंद भाव से 19 पैसे की गिरावट है। 

रुपए में गिरावट के कारण...

अमेरिकी फेडरल रिजर्व का फैसला

फेड ने ब्याज दर में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर इसे 3.75 फीसदी से 4 फीसदी के दायरे में कर दिया। जुलाई 2023 के बाद अमेरिका में यह पहली रेट हाइक है। फेड के संकेतों से बाजार में आगे भी एक और रेट हाइक की संभावना बनी हुई है। इससे अमेरिकी डॉलर और डॉलर आधारित निवेशों की मांग बढ़ी है। 

डॉलर सात हफ्ते की ऊंचाई पर

फेड के फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.33 पर पहुंच गया, जो करीब सात हफ्ते का सबसे ऊंचा स्तर है। डॉलर इंडेक्स से पता चलता है कि दुनिया की छह बड़ी करेंसी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर कितना मजबूत या कमजोर है।

डॉलर इंडेक्स ऊपर जाने का मतलब है कि डॉलर केवल रुपए के मुकाबले नहीं, बल्कि यूरो और जापानी येन जैसी दूसरी बड़ी करेंसी के मुकाबले भी मजबूत हो रहा है। ऐसे माहौल में अकेले भारतीय रुपए के लिए मजबूत बने रहना मुश्किल हो जाता है।

महंगा क्रूड बढ़ा रहा डॉलर की मांग

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत रुपये पर दबाव बढ़ा रही है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेश से खरीदता है और इसका पेमेंट डॉलर में होता है। इसलिए क्रूड महंगा होने पर भारतीय ऑयल कंपनियों को ज्यादा डॉलर खरीदने पड़ते हैं। जब तेल महंगा होता है, तो भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ जाता है। देश से ज्यादा डॉलर बाहर जाता है और रुपए पर दबाव आता है। 

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं। 16 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 2,032.61 रुपए करोड़ की नेट बिकवाली की। शेयर बेचने के बाद विदेशी निवेशक रुपए को डॉलर में बदलकर पैसा बाहर ले जाते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने शेयर बाजार को कुछ सहारा दिया है।

रुपए में गिरावट का आम आदमी पर क्या असर होगा?

आम आदमी के लिए कमजोर रुपया मतलब आयातित सामान महंगा होने का जोखिम। कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल और विदेश में पढ़ाई या यात्रा का खर्च बढ़ सकता है। दूसरी ओर IT और एक्सपोर्ट कंपनियों को डॉलर की कमाई को रुपये में बदलने पर फायदा मिल सकता है।

फिलहाल बाजार की नजर ₹96 के स्तर पर है। अगर रुपया इस स्तर के ऊपर लगातार बना रहता है, तो निकट अवधि में ₹96.30-₹96.50 का स्तर महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि आगे की दिशा फेड की नीति, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश और RBI के हस्तक्षेप पर निर्भर करेगी। 


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Content Writer

jyoti choudhary

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