UPI MDR को लेकर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, बोले- मामूली शुल्क से लेनदेन नहीं घटेगा
punjabkesari.in Wednesday, Oct 07, 2026 - 02:53 PM (IST)
मुंबईः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि UPI लेनदेन पर मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने से इसके लेनदेन की मात्रा पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद उन्होंने कहा कि फिलहाल UPI लेनदेन की मात्रा में किसी तरह की गिरावट देखने को नहीं मिल रही है। उनका व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि मामूली शुल्क से डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने पिछले महीने 2,000 रुपए से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने की घोषणा की थी। यह शुल्क व्यापारियों से लिया जाना है। इससे UPI भुगतान की लागत और छोटे-बड़े कारोबारियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हुई है।
बैंकिंग कर्ज वृद्धि मजबूत रहने की उम्मीद
RBI गवर्नर ने कहा कि बैंकों की कर्ज वृद्धि आगे भी मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। इससे व्यापक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि हाल के कुछ सप्ताह में बैंकों के पास अतिरिक्त नकदी देखी गई है लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक कायम रहने की संभावना नहीं है।
मल्होत्रा ने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक को इस बात की जानकारी है कि अत्यधिक नकदी की स्थिति में कर्ज देने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की संपत्ति की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल RBI को ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका नहीं है।
FCNR जमा से अर्थव्यवस्था पर भरोसा
गवर्नर ने कहा कि रियायती अदला-बदली सुविधा के तहत प्रवासी भारतीयों से करीब 133 अरब डॉलर की जमा राशि जुटाई गई है। यह FCNR(B) योजना और भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद में भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने भरोसा जताया कि बैंक इस राशि का इस्तेमाल सावधानी और सूझ-बूझ के साथ करेंगे।
मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के कारण पूंजी प्रवाह में कमी आई है और चालू खाते पर दबाव फिलहाल अस्थायी है। उन्हें उम्मीद है कि देश का भुगतान संतुलन जल्द ही फिर अधिशेष की स्थिति में लौट आएगा।
वहीं, टाटा संस के NBFC लाइसेंस से जुड़े सवाल पर RBI गवर्नर ने कोई टिप्पणी नहीं की। टाटा संस द्वारा लाइसेंस वापस करने के अनुरोध और अपर-लेयर NBFC के नियमों के तहत सूचीबद्धता से जुड़े मामले पर भी उन्होंने जवाब देने से इनकार किया।
