NCLT ने जेपी इंफ्राटेक की परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की
punjabkesari.in Monday, Feb 16, 2026 - 03:05 PM (IST)
नई दिल्लीः राष्ट्रीय कंपनी विधि प्राधिकरण (एनसीएलटी) ने सुरक्षा समूह के नियंत्रण वाली जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड की परियोजनाओं के निर्माण कार्य की प्रगति का आकलन करने और विस्तृत स्थिति रिपोर्ट सौंपने के लिए दो सदस्यीय समिति नियुक्त की है। जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया नौ अगस्त 2017 को शुरू की गई थी। सात मार्च 2023 को सुरक्षा समूह की बोली को दिवाला प्राधिकरण ने मंजूरी दी थी। हालांकि, अब खरीदार परियोजनाओं के पूरा होने में अत्यधिक देरी की शिकायत कर रहे हैं। दिल्ली स्थित एनसीएलटी की प्रधान पीठ की दो सदस्यीय पीठ ने ''मकान खरीदारों की परेशानी'' का संज्ञान लेते हुए समिति को उनकी शिकायतों पर भी गौर करने का निर्देश दिया है। एनसीएलटी का यह निर्देश जेपी इंफ्राटेक के फ्लैट खरीदारों द्वारा दायर आवेदन एवं हलफनामों पर आया है।
प्राधिकरण ने कहा, ''इस आवेदन में उठाए गए तर्कों और विभिन्न खबरों व जवाबी हलफनामों पर बिना किसी पूर्वाग्रह तथा मकान खरीदारों की पेरशानी को देखते हुए, हम एनसीएलटी के पूर्व सदस्य पी. के. मोहंती और दीप्ति मुकेश को सात मार्च 2023 की स्वीकृत समाधान योजना के संदर्भ में परियोजनाओं के निर्माण की प्रगति का आकलन करने का दायित्व सौंपते हैं।'' एनसीएलटी ने उन्हें ''स्थिति और यदि कोई हो तो शिकायतों पर पूर्ण एवं व्यापक रिपोर्ट'' देने का भी निर्देश दिया है। एनसीएलटी ने सभी पक्षों को ''बिना किसी आपत्ति के दोनों सदस्यों के साथ सहयोग करने'' को कहा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए एक अप्रैल 2026 की तारीख मुकर्रर की। यह आदेश 12 फरवरी 2026 को न्यायमूर्ति रामलिंगम सुधाकर (अध्यक्ष) और न्यायमूर्ति रविंद्र चतुर्वेदी (तकनीकी सदस्य) की पीठ द्वारा पारित किया गया।
फ्लैट खरीदारों के संगठन ने रियल एस्टेट परियोजनाओं के निर्माण की प्रगति और एनसीएलटी द्वारा स्वीकृत समाधान योजना के तहत दायित्वों के पालन को लेकर शिकायतें उठाई हैं। मुंबई स्थित सुरक्षा समूह ने अपनी अंतिम समाधान योजना में विभिन्न अटकी आवासीय परियोजनाओं में करीब 20,000 मकानों को पूरा कर परेशान मकान खरीदारों को कब्जा सौंपने का वादा किया था। सुरक्षा समूह ने चार जून 2024 को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय प्राधिकरण (एनसीएलएटी) के फैसले के बाद जेपी इंफ्राटेक का नियंत्रण संभाला था।
