मिडिल ईस्ट तनाव से संकट में पोल्ट्री उद्योग, 3.5 करोड़ अंडे रास्ते में फंसे, कीमतें धड़ाम
punjabkesari.in Wednesday, Mar 11, 2026 - 04:01 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः तमिलनाडु के नमक्कल, जिसे देश में ‘एग सिटी’ के नाम से जाना जाता है, के पोल्ट्री किसान इन दिनों भारी संकट का सामना कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंडों का निर्यात प्रभावित हुआ है, जिससे इसकी कीमतें धड़ाम हो गईं। किसानों को बेहद कम कीमत पर अंडे बेचने पड़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, खाड़ी देशों के लिए भेजे गए करीब 3.5 करोड़ अंडे बीच रास्ते में फंसे हुए हैं। ये अंडे 28 फरवरी को लगभग 70 कंटेनरों में लोड होकर रवाना किए गए थे लेकिन लाल सागर और मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते जहाज आगे नहीं बढ़ पाए।
प्रत्येक कंटेनर में करीब 5 लाख अंडे लोड थे। प्रति अंडा करीब 4.80 रुपए की कीमत के हिसाब से करीब 16-17 करोड़ रुपए का माल दांव पर लगा हुआ है। इसके अलावा कंटेनर किराया और ईंधन की लागत अलग से है।
घरेलू बाजार में बढ़ी आपूर्ति
नमक्कल भारत के कुल अंडा निर्यात का करीब 95 प्रतिशत संभालता है। यहां से बड़ी मात्रा में अंडे ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों को भेजे जाते हैं। इस क्षेत्र में रोजाना लगभग 6 से 7 करोड़ अंडों का उत्पादन होता है।
निर्यात प्रभावित होने के कारण जो अंडे विदेश भेजे जाने थे, वे अब घरेलू बाजार में ही आ रहे हैं। इससे बाजार में आपूर्ति अचानक बढ़ गई है और स्टॉक लगातार जमा हो रहा है। चूंकि अंडों की शैल्फ लाइफ सीमित होती है और तापमान बढ़ने पर वे जल्दी खराब हो सकते हैं, इसलिए किसान इन्हें कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हो गए हैं।
लागत से कम कीमत पर बिक्री
एक अंडे के उत्पादन की लागत करीब 4.5 से 5 रुपए पड़ती है लेकिन किसानों को इन्हें करीब 3.50 रुपए प्रति अंडा में बेचना पड़ रहा है। इससे हर अंडे पर करीब 1.50 रुपए का नुकसान हो रहा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो कई छोटे पोल्ट्री फार्म बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
रोजाना करोड़ों का नुकसान
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एग एंड पोल्ट्री प्रोडक्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव जहान आर. ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के कारण पिछले सप्ताह फार्मगेट कीमतों में करीब 50 पैसे की गिरावट आई है।
उन्होंने कहा कि इस इलाके में रोजाना लगभग 7 करोड़ अंडों का उत्पादन होता है। मौजूदा कीमतों पर पोल्ट्री उद्योग को हर दिन करीब 10.50 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। उद्योग से जुड़े निर्यातक खाड़ी देशों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्गों की तलाश में शिपिंग कंपनियों से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम के कारण कई शिपिंग लाइनें फिलहाल यह जोखिम लेने से बच रही हैं।
