मीडिल ईस्ट तनाव का असर आम लोगों की थाली पर, यूरिया की कीमतों में भारी उछाल

punjabkesari.in Thursday, Apr 23, 2026 - 01:32 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः मीडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की थाली तक पहुंचने लगा है। युद्ध के कारण उर्वरक (फर्टिलाइजर) की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे दक्षिण एशिया में खाने-पीने की चीजें महंगी होने का खतरा बढ़ गया है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को अब यूरिया खाद के लिए 935 से 959 डॉलर प्रति टन तक कीमत चुकानी पड़ रही है, जबकि संघर्ष शुरू होने से पहले यही यूरिया करीब 490 डॉलर प्रति टन मिल रहा था यानी कीमतों में लगभग 90% तक की तेज बढ़ोतरी हुई है।

यह सिर्फ एक कीमत बढ़ने की खबर नहीं है, बल्कि इसका असर सीधे खाने की लागत पर पड़ने वाला है-चावल, दाल और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

करोड़ों लोगों की थाली पर दिख सकता है असर

भारत के लिए यह सौदा करना मजबूरी भी है, क्योंकि मानसून सीजन शुरू हो चुका है और इसी समय फसलों की बुवाई होती है। यूरिया के बिना चावल, मक्का और सोयाबीन जैसी मुख्य फसलें उगाना मुश्किल हो जाता है। अगर समय पर खाद नहीं मिलती, तो कुछ ही महीनों में इसका असर करोड़ों लोगों की थाली पर दिख सकता है।

हालांकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है, इसलिए वह इस बढ़ी हुई कीमत को किसी तरह संभाल सकता है लेकिन कई अन्य विकासशील देशों के लिए यह स्थिति गंभीर हो सकती है।

बांग्लादेश, पाकिस्तान और उप-सहारा अफ्रीका के कई देशों में उर्वरक की कीमतें सीधे यह तय करती हैं कि फसल बोई जाएगी या नहीं। ऐसे में ये देश पर्याप्त मात्रा में खाद खरीदने में असमर्थ हो सकते हैं, जिससे खाद्य संकट गहरा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर खाद्य महंगाई और खाद्य सुरक्षा दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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