जमीन और प्लॉट का बनेगा ‘आधार कार्ड’, भू-आधार से बदलेगी रजिस्ट्री व्यवस्था

punjabkesari.in Saturday, Sep 12, 2026 - 03:22 PM (IST)

नई दिल्लीः केंद्र सरकार जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और रजिस्ट्री सिस्टम को डिजिटल और ज्यादा पारदर्शी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के तहत ‘भू-आधार’ यानी यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

इस व्यवस्था के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में जमीन और प्लॉट की पहचान के लिए 14 अंकों का यूनिक नंबर दिया जाएगा यानी यह जमीन का एक डिजिटल कार्ड होगा। इसे जमीन की डिजिटल पहचान के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें जमीन की भौगोलिक स्थिति और उससे जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

क्या है भू-आधार?

भू-आधार या ULPIN जमीन के एक भूखंड को दी जाने वाली विशिष्ट डिजिटल पहचान है। जैसे आधार नंबर किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़ा होता है, उसी तरह ULPIN का इस्तेमाल किसी जमीन के पार्सल की पहचान के लिए किया जाएगा।

इसका मकसद जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को एक-दूसरे से जोड़ना और जमीन की पहचान को ज्यादा सटीक बनाना है। इससे जमीन के रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

जमीन के रिकॉर्ड में क्या बदलेगा?

भू-आधार व्यवस्था के तहत जमीन के नक्शे, मालिकाना रिकॉर्ड और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक साथ जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। पुराने रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों को भी स्कैन कर डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही GIS आधारित डिजिटल लैंड रिकॉर्ड सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिससे किसी जमीन की लोकेशन और उससे जुड़े रिकॉर्ड को ज्यादा आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

फर्जीवाड़े पर लग सकती है लगाम

जमीन की पहचान को एक यूनिक नंबर से जोड़ने का सबसे बड़ा फायदा रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाना हो सकता है। इससे एक ही जमीन से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड को आपस में मिलान करना आसान होगा।

इससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री, एक ही जमीन को कई बार बेचने और रिकॉर्ड में हेरफेर जैसी समस्याओं को रोकने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका असर जमीन के स्थानीय रिकॉर्ड और राज्यों में लागू व्यवस्था के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

कोर्ट और जमीन के रिकॉर्ड भी होंगे लिंक

सरकार की योजना में रेवेन्यू कोर्ट के रिकॉर्ड को भी भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने की दिशा में काम शामिल है। इससे जमीन से जुड़े विवादों में संबंधित रिकॉर्ड तक पहुंच आसान हो सकती है और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिल सकती है।

चरणबद्ध तरीके से होगा लागू

भू-आधार को देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। DILRMP के अगले चरण में जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड, नक्शों और रजिस्ट्रेशन सिस्टम को ज्यादा व्यापक स्तर पर एकीकृत करने पर जोर दिया जा रहा है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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