ईरान संकट का असर भारतीय बासमती निर्यात पर, घरेलू कीमतों में तेज गिरावट
punjabkesari.in Tuesday, Jan 13, 2026 - 01:15 PM (IST)
नई दिल्लीः ईरान में जारी नागरिक अशांति का सीधा असर भारत के बासमती चावल निर्यात पर दिखने लगा है। भुगतान में देरी, ऑर्डर में अनिश्चितता और व्यापारिक जोखिम बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में बासमती चावल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। उद्योग संगठन इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने यह जानकारी दी है।
आईआरईएफ के अनुसार, ईरान लंबे समय से भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा आयातक रहा है लेकिन मौजूदा आंतरिक अस्थिरता के चलते वहां से आने वाले ऑर्डर, भुगतान चक्र और निर्यात प्रवाह पर दबाव बढ़ गया है। इसका असर अब भारतीय मंडियों में साफ तौर पर दिख रहा है। बीते एक सप्ताह में ही बासमती की प्रमुख किस्मों की कीमतों में 5 रुपए प्रति किलोग्राम तक की गिरावट आई है।
बासमती चावल की लोकप्रिय किस्म 1121 की कीमत पिछले सप्ताह 85 रुपए प्रति किलो से घटकर 80 रुपए प्रति किलो रह गई है। वहीं 1509 और 1718 किस्मों के भाव 70 रुपए से गिरकर 65 रुपए प्रति किलो पर आ गए हैं। निर्यातकों का कहना है कि खरीदारों की झिझक और अनुबंधों में देरी के कारण बाजार दबाव में है।
आईआरईएफ ने निर्यातकों को ईरान से जुड़े अनुबंधों में जोखिम का पुनर्मूल्यांकन करने, सुरक्षित भुगतान विकल्प अपनाने और जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने से बचने की सलाह दी है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने कहा कि ईरान में अशांति के कारण व्यापार माध्यम बाधित हुए हैं और भुगतान में देरी से निर्यातकों का जोखिम बढ़ा है।
व्यापारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर के बीच ईरान को 5.99 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कीमत 468.10 मिलियन अमेरिकी डॉलर रही। हालांकि मौजूदा हालात में आयातकों ने भुगतान और प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में असमर्थता जताई है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है।
आईआरईएफ ने निर्यातकों से पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप जैसे वैकल्पिक बाजारों पर ध्यान देने की अपील की है। साथ ही संगठन ने अमेरिकी शुल्क को लेकर भी चिंता जताई है, हालांकि उसका कहना है कि वैश्विक बाजार में भारतीय बासमती की मजबूत मांग के चलते निर्यात पर बड़ा असर पड़ने की आशंका फिलहाल कम है।
