मेक इन इंडिया की बड़ी जीत, iPhone एक्सपोर्ट ₹2.03 लाख करोड़ पर

punjabkesari.in Monday, Jan 12, 2026 - 11:47 AM (IST)

बिजनेस डेस्कः साल 2021 में भारत में उत्पादन शुरू करने के बाद ऐपल के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। वर्ष 2025 में भारत से आईफोन का निर्यात पहली बार ₹2 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। ऐपल के लिए ठेके पर आईफोन बनाने वाली कंपनियों द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों को दिए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भारत से आईफोन का निर्यात 23 अरब डॉलर यानी करीब ₹2.03 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह निर्यात 2024 के मुकाबले लगभग 85 प्रतिशत अधिक है।

PLI योजना ने बदली तस्वीर

भारत में उत्पादन से जुड़ी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत 2024 तक ऐपल का मुख्य फोकस निर्यात बढ़ाने पर रहा, जिसका असर साफ तौर पर दिखा। कंपनी का आईफोन निर्यात हर साल तेज़ी से बढ़ता गया। 2021 में जहां निर्यात का आंकड़ा ₹8,800 करोड़ था, वहीं 2022 में यह बढ़कर ₹36,234 करोड़ हो गया। 2023 में यह दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर ₹74,000 करोड़ तक पहुंचा और 2024 में ₹1.1 लाख करोड़ के स्तर को पार कर गया।

PLI योजना लागू होने के बाद 2020 में ऐपल ने अपने दो प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स विस्ट्रॉन और फॉक्सकॉन के साथ भारत में प्रवेश किया था। हालांकि, कोरोना महामारी और चीन के साथ सीमा पर हुए तनाव के चलते भारत में उत्पादन शुरू होने में देरी हुई और अंततः 2021 में देश में आईफोन का निर्माण शुरू हो सका। यह उत्पादन मुख्य रूप से निर्यात बाजार को ध्यान में रखकर किया गया था।

चीन से भारत की ओर शिफ्ट होती सप्लाई चेन

इस दौरान ऐपल की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला धीरे-धीरे चीन से शिफ्ट हो रही थी और उम्मीद जताई जा रही थी कि कंपनी अपने कई आपूर्तिकर्ताओं को भारत लाएगी। सरकार ने भी प्रेस नोट-3 के तहत लगी पाबंदियों के बावजूद चीन की 14 कंपनियों को भारत में निवेश की मंजूरी दी। 2023 से ऐपल ने भारतीय कंपनियों को भी अपनी सप्लाई चेन में शामिल करना शुरू किया। सरकार के लिए यह फैसला चुनौतीपूर्ण था लेकिन इससे भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र को फायदा मिला, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों को तकनीकी हस्तांतरण और कौशल विकास के रूप में।

8 राज्यों में फैला ऐपल का नेटवर्क

ऐपल के इकोसिस्टम में शामिल होने वाला पहला बड़ा भारतीय समूह टाटा ग्रुप बना, जिसने 2023 में कर्नाटक स्थित विस्ट्रॉन की आईफोन फैक्टरी का अधिग्रहण किया। इसके बाद टाटा समूह ने तमिलनाडु में पेगाट्रॉन की आईफोन यूनिट में भी बहुलांश हिस्सेदारी खरीदी। वर्ष 2024 में कई भारतीय कंपनियां कलपुर्जा और सब-असेंबली सप्लायर के तौर पर ऐपल की आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनीं, जिनमें मदरसन, हिंडाल्को, विप्रो पारी, जैबिल, एक्वस, एसएफओ टेक्नोलॉजीज और भारत फोर्ज प्रमुख हैं। वर्तमान में ऐपल के आपूर्तिकर्ता भारत के आठ राज्यों में फैले हुए हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, बीते चार वर्षों में भारत में स्मार्टफोन निर्माण में मूल्यवर्धन तेजी से बढ़कर 2025 तक 19 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह उस 40–45 प्रतिशत मूल्यवर्धन का लगभग आधा है, जो चीन ने करीब 18 वर्षों में हासिल किया है। हाल ही में शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना को इस दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस योजना से अगले चार वर्षों में मूल्यवर्धन में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसमें ऐपल के कई आपूर्तिकर्ता भी हिस्सा ले रहे हैं, जिससे न केवल स्मार्टफोन बल्कि इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों के निर्यात को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की संभावना है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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