भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाजार अगले 2 साल रहेगा मजबूत, H1 में रियल एस्टेट का दबदबा

punjabkesari.in Friday, Aug 21, 2026 - 12:20 PM (IST)

नई दिल्लीः भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाजार अगले एक से दो वर्षों में मजबूत बना रह सकता है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद बाजार में तेजी की उम्मीद है। EY की एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही (H1 2026) में प्राइवेट क्रेडिट डील्स में रियल एस्टेट सबसे आगे रहा, जबकि हेल्थकेयर दूसरे स्थान पर रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं के बावजूद H1 2026 में भारत के प्राइवेट क्रेडिट बाजार का उल्लेखनीय विस्तार हुआ। मजबूत घरेलू आर्थिक आधार, बैंकिंग सेक्टर की बेहतर स्थिति, एसेट क्वालिटी में सुधार और व्यापक क्रेडिट ग्रोथ ने इस वृद्धि को समर्थन दिया।

H1 2026 में 3.5 अरब डॉलर का निवेश

भारत में H1 2026 के दौरान प्राइवेट क्रेडिट निवेश करीब 3.5 अरब डॉलर रहा। कुल डील की संख्या में घरेलू फंड्स की हिस्सेदारी काफी अधिक रही। बाजार में स्ट्रक्चर्ड कैपिटल और फ्लेक्सिबल कैपिटल सॉल्यूशंस की मांग भी बनी रही।

EY के मुताबिक, घरेलू प्राइवेट क्रेडिट प्लेयर्स ने ग्लोबल फंड्स को पीछे छोड़ते हुए कुल डील वैल्यू में 74 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की। वहीं, कुल डील की संख्या में घरेलू खिलाड़ियों की हिस्सेदारी करीब 79 फीसदी रही।

रियल एस्टेट सबसे आगे, F&B सेक्टर में तेज उछाल

H1 2026 में रियल एस्टेट सेक्टर कुल प्राइवेट क्रेडिट डील वैल्यू के 35 फीसदी हिस्से के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद हेल्थकेयर सेक्टर की हिस्सेदारी 13 फीसदी रही।

खास बात यह रही कि फूड एंड बेवरेज (F&B) सेक्टर में प्राइवेट क्रेडिट गतिविधियों में तेज बढ़ोतरी हुई। यह सेक्टर H1 2026 में कुल डील वैल्यू के 12 फीसदी हिस्से के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जबकि H2 2025 में इसकी हिस्सेदारी करीब 1 फीसदी थी।

मजबूत बैंकिंग सेक्टर से मिला सपोर्ट

प्राइवेट क्रेडिट बाजार में यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब भारतीय बैंकिंग सेक्टर की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है। FY27 की शुरुआत में शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों की बैलेंस शीट बेहतर रही और एसेट क्वालिटी में सुधार के साथ बैंकों के पास मजबूत कैपिटल बफर मौजूद रहा।

मार्च 2026 तक बैंकों का Capital to Risk-weighted Assets Ratio (CRAR) 17.7 फीसदी रहा, जो एक साल पहले 17.4 फीसदी था। इसी अवधि में CET1 अनुपात 14.8 फीसदी से बढ़कर 15.3 फीसदी हो गया।

बैंकों की लाभप्रदता भी मजबूत बनी रही। Return on Assets (RoA) 1.3 फीसदी और Return on Equity (RoE) 12.6 फीसदी रहा। वहीं, FY26 में ग्रॉस NPA अनुपात घटकर 1.8 फीसदी और नेट NPA अनुपात 0.4 फीसदी रह गया।

अगले दो साल को लेकर निवेशक आशावादी

EY के सर्वे में 60 फीसदी प्रतिभागियों ने अगले एक से दो वर्षों में भारत के प्राइवेट क्रेडिट बाजार को लेकर सकारात्मक रुख जताया। हालांकि, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रभाव को लेकर सर्वे में मिश्रित राय सामने आई। ज्यादातर प्रतिभागियों ने कहा कि इन घटनाक्रमों का प्राइवेट क्रेडिट डिप्लॉयमेंट पर सीमित असर पड़ा है।

रियल एस्टेट जहां प्राइवेट क्रेडिट डील्स के लिए सबसे सक्रिय सेक्टर बना हुआ है, वहीं इसे डिफॉल्ट के लिहाज से सबसे ज्यादा जोखिम वाला सेक्टर भी माना गया। रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेस से जुड़ी परिस्थितियां, कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) की जरूरत और M&A फाइनेंसिंग प्राइवेट क्रेडिट की मांग के प्रमुख कारण बने हुए हैं।
 


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Content Writer

jyoti choudhary