2035 तक 235 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है भारत का इलेक्ट्रिकल एक्सपोर्ट
punjabkesari.in Friday, May 22, 2026 - 01:49 PM (IST)
नई दिल्लीः भारत का इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट (विद्युत उपकरण) उद्योग आने वाले दशक में तेज और परिवर्तनकारी वृद्धि की ओर बढ़ सकता है। मैकिन्से एंड कंपनी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत घरेलू उत्पादन क्षमता, तेजी से बढ़ती खपत और निर्यात अवसरों के चलते यह क्षेत्र वर्ष 2035 तक 195 से 235 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि 2025 में इसका आकार लगभग 50 अरब डॉलर था।
‘Wired for Growth: India’s Electrical Equipment Opportunity’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में बिजली उपकरणों की घरेलू खपत भी तेजी से बढ़ेगी और 2035 तक यह 170 से 205 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। साथ ही, निर्यात 60 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है, जिससे भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह उद्योग 11 से 13 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ सकता है। इसका प्रमुख कारण बढ़ती इलेक्ट्रिफिकेशन, नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) का विस्तार, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग और वैश्विक बाजार में भारत के लिए बढ़ते अवसर हैं।
हालांकि रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि भारत की इस क्षेत्र में आयात निर्भरता तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2020 में यह 22 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 33 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यदि मौजूदा रुझान जारी रहा, तो 2035 तक यह निर्भरता 70 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जिससे लगभग 130 अरब डॉलर तक की उत्पादन कमी का जोखिम पैदा हो सकता है।
इस स्थिति से बचने के लिए रिपोर्ट में घरेलू विनिर्माण क्षमता को लगभग पांच गुना बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। खासकर पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, एयर कंडीशनर कंपोनेंट्स, सोलर फोटोवोल्टिक सेल और मॉड्यूल, ट्रांसफॉर्मर तथा केबल-एंड-वायर जैसे क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
मैकिन्से के अनुसार, यदि भारत आक्रामक लोकलाइजेशन नीति अपनाता है तो आयात निर्भरता को वर्तमान 33 प्रतिशत से घटाकर 2035 तक 14 प्रतिशत से भी नीचे लाया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण, हाई-स्पीड रेल केबल, ग्रिड स्थिरीकरण तकनीक और पावर सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्र भविष्य में सबसे बड़े विकास इंजन बन सकते हैं। वैश्विक स्तर पर केवल रिन्यूएबल उपकरण और हाई-एंड केबल बाजार ही 350 से 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए नीति, निवेश और तकनीक के बीच बेहतर समन्वय बनाना होगा, ताकि देश बिजली उपकरण निर्माण में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सके।
