ई-कॉमर्स शुल्क पर लंबी मोहलत के पक्ष में भारत, कारोबारियों को राहत की उम्मीद
punjabkesari.in Friday, Apr 03, 2026 - 02:29 PM (IST)
नई दिल्लीः विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के बाद भारत के रुख में हल्की नरमी के संकेत दिए। ई-कॉमर्स पर सीमा शुल्क (ड्यूटी) को लेकर जारी बहस के बीच भारत अब इस पर मोहलत (moratorium) की अवधि को कुछ अधिक समय के लिए बढ़ाने पर विचार करने को तैयार दिख रहा है, ताकि कारोबारियों को लंबी अवधि की योजना बनाने में सहूलियत मिल सके।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का रुख स्पष्ट है—व्यापार में स्थिरता और पूर्वानुमान सुनिश्चित करने के लिए इस बार लंबी अवधि की मोहलत पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, इस मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच अभी भी सहमति नहीं बन पाई है और अगले एक-दो महीनों में इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
कैमरून के याउंडे में 26 से 30 मार्च तक आयोजित इस सम्मेलन में ई-कॉमर्स शुल्क पर रोक जैसे अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके चलते कोई संयुक्त घोषणा जारी नहीं हो पाई। अब इस पर आगे की बातचीत जिनेवा स्थित WTO मुख्यालय में जारी रहेगी।
मौजूदा नियमों के तहत WTO सदस्य देश सीमा पार इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगाते हैं। पिछले लगभग 30 वर्षों से इस व्यवस्था को हर दो साल में बढ़ाया जाता रहा है लेकिन अब इस पर मतभेद गहराते जा रहे हैं। भारत जहां राजस्व नुकसान की चिंता जताते हुए स्थायी मोहलत का विरोध करता रहा है, वहीं अमेरिका समेत विकसित देश इसे स्थायी रूप देने के पक्ष में हैं।
अमेरिका के व्यापार मंत्री Jamieson Greer ने साफ कहा कि उनका देश अब इस व्यवस्था को बार-बार अस्थायी रूप से बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। उनका मानना है कि इससे कारोबारियों को जरूरी स्थिरता नहीं मिलती और WTO की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
इस बीच, विकसित देशों द्वारा WTO के बाहर बहुपक्षीय समझौते की दिशा में बढ़ते कदमों पर भारत ने सतर्क रुख अपनाया है। मंत्री गोयल ने कहा कि ऐसे किसी भी समझौते में विकासशील देशों के हितों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय (safeguards) शामिल होने चाहिए।
