सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की आशंका, 80,000 रुपए से नीचे गिरेगा भाव!
punjabkesari.in Tuesday, Feb 17, 2026 - 11:03 AM (IST)
बिजनेस डेस्कः वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। जहां पिछले कुछ महीनों में अनिश्चित वैश्विक हालात और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने सोने को रिकॉर्ड ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया, वहीं अब विशेषज्ञ संभावित बड़ी गिरावट की आशंका जता रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और कई देशों द्वारा सोने के भंडार बढ़ाने की रणनीति ने कीमतों को तेज़ी से ऊपर धकेला। इसी क्रम में 29 जनवरी को सोना ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, इसके अगले ही दिन तेज गिरावट देखी गई और तब से कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन कारणों से सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था, वही कारक अब कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय हालात में स्थिरता आती है और प्रमुख देशों की खरीदारी घटती है, तो सोने के दाम में तेज करेक्शन संभव है। ऐसे में कीमतें 80,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे भी फिसल सकती हैं, जिससे निवेशकों और खरीदारों दोनों की नजर बाजार पर टिकी हुई है।
गिरावट की आशंका क्यों?
रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने की कीमतों में संभावित गिरावट के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर रूस की रणनीति में बदलाव हो सकता है। माना जा रहा है कि Russia, जिसने डॉलर से दूरी बनाकर सोने की खरीद बढ़ाई थी, अब दोबारा अमेरिकी डॉलर के इस्तेमाल की ओर लौट सकता है। अगर ऐसा होता है तो रूस अपने सोने के भंडार का कुछ हिस्सा बेच सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बनेगा।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि United States और रूस के बीच व्यापारिक समझौता आगे बढ़ता है और Russia-Ukraine War में नरमी आती है, तो सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के तौर पर सोने की मांग घट सकती है।
ब्रिक्स देशों की भूमिका अहम
बीते छह महीनों में वैश्विक सोना खरीद में BRICS देशों China, India, Brazil और South Africa की हिस्सेदारी करीब 50% रही है। यदि ये देश डॉलर की ओर झुकाव बढ़ाते हैं और सोने की खरीद कम करते हैं, तो वैश्विक कीमतों में गिरावट तेज हो सकती है।
क्या कहती है रिसर्च रिपोर्ट?
आर्थिक शोध संस्था Bloomberg की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ने की स्थिति में भारत में सोने की कीमतें घटकर 70,000 से 80,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के दायरे में आ सकती हैं। हालांकि, यह गिरावट एक झटके में नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से आने की संभावना है और 2027 के अंत तक कीमतें स्थिर हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, सोने में हालिया तेजी के बाद अब बाजार की नजर रूस की रणनीति, अमेरिका-रूस संबंधों और ब्रिक्स देशों की खरीद नीति पर टिकी है। यदि इन मोर्चों पर बदलाव आता है तो सोने की चमक कुछ फीकी पड़ सकती है।
