कमजोर मानसून के बीच अब तक 11,000 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई, रबी फसलों का रकबा घटा

punjabkesari.in Tuesday, Oct 27, 2026 - 11:34 AM (IST)

नई दिल्लीः दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी के बीच कुछ राज्यों में गेहूं की बुवाई अभी शुरू ही हुई है। अब तक 11,000 हेक्टेयर में गेहूं बोया गया है, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह रकबा 27,000 हेक्टेयर था। कृषि मंत्रालय ने 23 अक्टूबर तक के बुवाई संबंधी आंकड़े जारी करते हुए कहा, ''कुछ राज्यों में गेहूं की बुवाई अभी शुरू ही हुई है।'' गेहूं प्रमुख रबी फसल है। इसकी बुवाई आम तौर पर अक्टूबर-नवंबर में होती है और कटाई मार्च-अप्रैल में की जाती है। 2025-26 के फसल वर्ष (जुलाई-जून) में 336 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था। 

मंत्रालय ने पिछले वर्ष 12.07 करोड़ टन के रिकॉर्ड उत्पादन के बाद फसल वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 12.1 करोड़ टन तय किया है। मौसम विभाग के अनुसार, जून-सितंबर के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून में 13 प्रतिशत की कमी रही। कमजोर मानसून के कारण रबी मौसम की शुरुआत में मिट्टी में बची नमी कम रहती है और जलाशयों एवं नहरों में पानी का स्तर भी नीचे रहता है। गेहूं की बुवाई के बाद कई बार सिंचाई की जरूरत होती है। इसलिए कम बारिश से बुवाई में देरी हो सकती है, रकबा घट सकता है और पैदावार पर असर पड़ सकता है। पंजाब और राजस्थान पर विशेष रूप से इसका असर पड़ने की आशंका है। 

इन राज्यों में बारिश क्रमशः 38 प्रतिशत और 22 प्रतिशत कम रही तथा सितंबर के अंत में जलाशयों में पानी का भंडार सामान्य से कम था। दोनों राज्यों में मिलाकर भारत के कुल गेहूं रकबे का करीब 31 प्रतिशत हिस्सा है। ऐसे में इन क्षेत्रों में सिंचाई की कमी का राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की बुवाई पर खासा असर पड़ सकता है। 

विशेषज्ञों ने बताया कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, बुंदेलखंड और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में वर्षा आधारित तथा कम सिंचाई वाले क्षेत्र भी जोखिम में हैं। इन क्षेत्रों में मानसून से मिट्टी को मिलने वाली नमी की कमी की भरपाई नहरों या भूजल से सिंचाई के जरिए आसानी से नहीं की जा सकती। अन्य फसलों में 23 अक्टूबर तक धान का रकबा घटकर 1.02 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 2.13 लाख हेक्टेयर था। 

दलहन का रकबा 4.39 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.27 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि तिलहन की बुवाई एक साल पहले के 21.34 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 13.38 लाख हेक्टेयर में हुई। मोटे अनाज का रकबा हालांकि बढ़कर 23,000 हेक्टेयर हो गया, जो एक साल पहले 13,000 हेक्टेयर था। आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्टूबर तक कुल 18.02 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई हुई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह रकबा 28.26 लाख हेक्टेयर था। 
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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