क्या सरकार एयरपोर्ट-एयरलाइन स्वामित्व के नियमों में ढील देगी?

punjabkesari.in Saturday, Aug 01, 2026 - 05:11 AM (IST)

अदाणी समूह के एक अनुरोध के बाद, नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस बात की जांच कर रहा है कि क्या एयरपोर्ट ऑप्रेटरों और एयरलाइंस के बीच क्रॉस-ओनरशिप (समान स्वामित्व) के प्रतिबंधों में ढील दी जाए। किसी भी प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल में ले जाने से पहले अधिकारी नीति आयोग और अन्य सरकारी मंत्रालयों के साथ परामर्श के लिए एक ‘कॉन्सैप्ट नोट’ तैयार कर रहे हैं।

सरकार क्या प्रस्ताव दे रही है? : जिन प्रतिबंधों की समीक्षा की जा रही है, वे कानून की बजाय एयरपोर्ट रियायत समझौतों में शामिल हैं। दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के लिए रियायत समझौते एयरपोर्ट ऑपरेटर में कुल एयरलाइन स्वामित्व की सीमा 10 प्रतिशत तय करते हैं, जबकि नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) और नवी मुंबई हवाई अड्डों के समझौते किसी एयरलाइन में 26 प्रतिशत तक स्वामित्व की अनुमति देते हैं। इन प्रावधानों को उल्टे क्रम में भी लागू किया जा सकता है, जो प्रभावी रूप से एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइंस में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल करने से रोकते हैं।

हालांकि अदाणी समूह ने मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया और कहा कि एयरलाइन व्यवसाय में प्रवेश करने में उसकी कोई रुचि नहीं है, लेकिन एक अलग रिपोर्ट में अदाणी एयरपोर्टम के सीईओ अरुण बंसल के एक पत्र का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि अदाणी डिफैंस एंड एयरोस्पेस टियर-2 और टियर-3 शहरों में कनैक्टिविटी बढ़ाने में सार्थक भूमिका निभाने के लिए एयरलाइन व्यवसाय में भाग लेने का मूल्यांकन कर रहा है। सरकारी अधिकारियों ने इस तर्क को पकड़ लिया है और कहा है कि क्रॉस-ओनरशिप नियमों में संशोधन से नई एयरलाइनों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त होगा और घरेलू बाजार में इंडिगो और एयर इंडिया समूह के वर्चस्व तोडऩे में मदद मिलेगी।

चिंताओं का समाधान कैसे किया जाएगा? : वर्तमान रियायत समझौते यह सुनिश्चित करके कि हवाई अड्डे तटस्थ बुनियादी ढांचा प्रदाता बने रहें और गेट आवंटन,  टर्मिनल एक्सैस,  हवाई अड्डे की सुविधाओं या अन्य परिचालन निर्णयों में संबद्ध एयरलाइनों का पक्ष न लें, संभावित हितों के टकराव को रोकने के लिए एयरपोर्ट ऑपरेटरों और एयरलाइंस के बीच अलगाव बनाए रखते हैं। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि नियमों में किसी भी तरह की ढील के साथ सुरक्षात्मक उपाय भी किए जाने की संभावना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एयरपोर्ट और एयरलाइन व्यवसायों के बीच एक उचित दूरी बनी रहे। जिन उपायों पर विचार किया जा रहा है उनमें स्लॉट आवंटन और एयरपोर्ट संचालन से संबंधित डेटा सहित व्यावसायिक रूप से संवेदनशील जानकारी के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सांझाकरण को रोकने के प्रावधान शामिल हैं।  अदाणी समूह पहले से ही 8 हवाई अड्डों के साथ देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट ऑपरेटर है। इसके पास रख-रखाव, मुरम्मत और ओवरहाल कंपनी एयरवक्र्स  में 99-98 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

एयरलाइंस ने इस पर कैसी प्रतिक्रिया दी है?: भारत के दो सबसे बड़े एयरलाइन समूहों इंडिगो और एयर इंडिया ने इस कदम का विरोध करते हुए तर्क दिया है कि एयरपोर्ट ऑपरेटरों को अपनी एयरलाइंस रखने की अनुमति देने से हितों का भारी टकराव पैदा होगा और प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी। इंडिगो के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने कहा कि इसकी कोई वैश्विक मिसाल नहीं है क्योंकि यह आमतौर पर हितों के एक बड़े टकराव को जन्म देगा, और समय के साथ यह उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ जाएगा। एयर इंडिया ने भी इसी तरह की आपत्ति जताई है।  भारत में भी एक प्रमुख राज्य समर्थित (सरकारी) एयरलाइन है जो मुख्य हवाई अड्डे को संचालित करती है, न कि निजी स्वामित्व वाले हवाई अड्डों पर प्रतिस्पर्धा करने वाली कई निजी स्वामित्व वाली घरेलू एयरलाइंस। इसके विपरीत, भारत का प्रस्ताव कई निजी स्वामित्व वाली एयरलाइनों वाले प्रतिस्पर्धी बाजार में समान स्वामित्व की अनुमति देगा, जिससे हितों के संभावित टकराव पर चिंताएं बढ़ेंगी कि क्या एयरपोर्ट ऑपरेटर अपनी संबद्ध एयरलाइनों को तरजीही व्यवहार दे सकते हैं।-जागृति चंद्रा          


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