आपको कौन चाहिएं देशभक्त या देशद्रोही
punjabkesari.in Saturday, Oct 10, 2026 - 04:23 AM (IST)
भगवान से बड़ा समूचे ब्रह्मांड में और कुछ भी नहीं है। लेकिन आज का समाज/संसार अपने को ही बड़ा सिद्ध करने में जुटा है, किस आधार पर-विज्ञान के आधार पर। परन्तु वह यह भूल जाता है कि तेरी जिसने यह खोपड़ी बनाई, वह भगवान ही तो है यानी अपने निर्माता-परमपिता को ही तुच्छ बना दिया। ठीक वही नमूना हमारे समाज, परिवारों में हम देख रहे हैं। कोई किसी को बड़ा मानने के लिए तैयार ही नहीं। सब अपनी मनमर्जी की अर्जी लगा रहे हैं। यानी न कोई बड़ा न छोटा, न धर्म न कर्म, न देशभक्ति न समाज का डर। कब तक चलेगा यह ड्रामा। जिसको देखो देश-विरोध में उतर गया है, राजनीति के नाम पर आखिर यह कब तक स्वीकार्य होगा? नहीं होगा...।
फिर समाधान क्या है? एकमात्र समाधान है कि आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था में जो परिवारवादी, भ्रष्टाचारी, देशद्रोही शक्तियां सक्रिय हैं, उनके फन को निर्ममता से कुचल दिया जाए, तभी देश बचेगा, तभी सनातन बचेगा। जो संविधान को हाथ में लेकर चलते हैं, उन्होंने ही इसको कुचला है। ऐसे देशद्रोहियों को यह समाज व देशवासी क्यों जवाब नहीं दे रहे, समझ में नहीं आता। लोगों ने देश में उनका लम्बा शासन-प्रशासन देखा है, फिर भी उनकी बातों में क्यों फंस रहे हैं? जवाब एक ही है-सब अपने निजी स्वार्थों में फंसे हैं। देश की ङ्क्षचता उनको लेशमात्र भी नहीं है। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, कमीशन तथा हकदारों का हक खा जाना यही उनकी फितरत रही है।
उपाय क्या है इसका? है, बिल्कुल स्पष्ट है। लोकतंत्र में सबसे बड़ा हथियार वोट का अधिकार जनता के पास है। परन्तु कुछ वर्ग-जाति, संकीर्ण मनोवृत्ति के कारण ऐन वक्त पर गलत प्रचार के कारण लक्ष्य से भटक जाते हैं। इसी का फायदा ये देश विरोधी भ्रष्टतंत्र के लोग उठाते हैं। इसका स्पष्ट उदाहरण 2024 का लोकसभा चुनाव परिणाम है। देश का सौभाग्य है कि परमात्मा की कृपा से इस देश को नि:स्वार्थ, निर्भय, निडर, मेहनती, निष्ठावान, ग्लोबल नेता एवं देश के प्रति पूर्ण समॢपत प्रधानमंत्री के रूप में मिला है, यह हमारे लिए गौरव की बात है। भूतो न भविष्यति॥ यानी ऐसा सौभाग्य परमात्मा कभी-कभी प्रदान करते हैं। न किसी की सुनें न मानें।
पिछले 12 वर्षों में भारत के विकास मॉडल का विश्लेषण करें तथा साथ में पिछले 60-70 वर्षों के विकास, भ्रष्टाचार, कमीशनखोर सरकारों का काम देखें, उनके किस्से सुनें-पढ़ें, आपकी आंखें एवं दिमाग आपको स्पष्ट गवाही दे देगा। जितने भी देखे-परखे तिलचट्टे शोर मचा रहे हैं, उनको यह देश देख-परख चुका है। आज की पीढ़ी के कुछ गुमराह तत्व इसके झांसे में आ रहे हैं, उनको भी भारत का देशभक्त समाज जवाब दे देगा, ङ्क्षचता मत करें। संक्षेप में ऐसा भारत न कभी था (इस लोकतंत्र में), न कभी वर्तमान नेतृत्व के बिना हो सकता है। विश्लेषण के बाद फैसला आपने करना है कि आपको देशभक्त चाहिएं या देशद्रोही।-एस.पी. मलिक
