‘विश्व में चारों ओर अशांति’ धरने, प्रदर्शन, लोग महंगाई से त्रस्त!

punjabkesari.in Tuesday, Nov 03, 2026 - 02:33 AM (IST)

इन दिनों विश्व के अधिकांश भागों में किसी न किसी मुद्दे को लेकर घोर अशांति का वातावरण बना हुआ है। कहीं लोगों में महंगाई, आवास समस्या, शिक्षा के बजट और अन्य सुविधाओं में कटौती को लेकर बवाल मचा हुआ है तो कहीं विभिन्न देश आपस में उलझे हुए हैं जो निम्न घटनाओं से स्पष्ट है :

* 21 सितम्बर से फ्रांस में बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की उच्च लागत, शिक्षकों की कमी और बदहाल स्कूलों के विरुद्ध शुरू आंदोलन के दौरान हुई झड़पों में अभी तक 215 किशोर और 715 पुलिसकर्मी घायल हो चुके हैं। इस दौरान बड़े पैमाने पर आगजनी तथा हिंसा में संलिप्त 500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
* 30 सितम्बर को इटली में बढ़ती महंगाई और लोगों की गिरती खरीद शक्ति के विरोध में विभिन्न श्रमिक संघों ने देश भर में हड़ताल के दौरान ‘रोम’, ‘मिलान’ तथा ‘बोलोन्या’ आदि शहरों में छात्रों तथा किसानों ने मिल कर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए। 

* 7-8 अक्तूबर को ‘द. अफ्रीका’ के ‘डर्बन’ और ‘सोवेटो’ में प्रवासी-विरोधी ङ्क्षहसक प्रदर्शनों के दौरान आगजनी व दुकानों  को लूट लिया गया। 
* 7 से 15 अक्तूबर तक अर्जेंन्टीना में विश्वविद्यालयों को आॢथक मदद कानून लागू करने, वेतन सुधारने और शिक्षा बजट बढ़ाने की मांग पर ‘ब्यूनस आयर्स’ सहित कई शहरों में प्रदर्शनों के दौरान अनेक प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी घायल हो गए।
* 7 से 21 अक्तूबर के बीच ‘ग्रीस’ में ‘एथेंस’ समेत कई शहरों में शिक्षा बजट, सुरक्षित स्कूली इमारतों, शिक्षकों की भर्ती, बेहतर वेतन और छात्रावास की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में अनेक लोग घायल हो गए।
* 30 अक्तूबर को ‘अल्बानिया’ में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा की बदहाली के विरुद्ध छात्र आंदोलन में प्रधानमंत्री ‘एदी रामा’ के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन में अब तक 347 लोग घायल हुए हैं। 
* 31 अक्तूबर को स्विट्जरलैंड के ‘ज्यूरिख’ तथा ‘बेसल’ शहरों में ङ्क्षहसा भड़क गई तथा ‘अब बहुत हो गया’ के नारे के साथ लाखों की संख्या में युवाओं ने सरकार की सामाजिक व आॢथक नीतियों के विरुद्ध प्रदर्शन किए।

* 31 अक्तूबर को ही ‘बैल्जियम’ की राजधानी ‘ब्रसेल्स’ तथा देश के अन्य भागों में बढ़ती महंगाई, बजट में कटौती तथा सरकार की आर्थिक नीतियों के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों की शृंखला  में वहां विभिन्न यूनियनों द्वारा आयोजित प्रदर्शनों में 6,00,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया तथा पुलिस पर पथराव और कांच की बोतलों व जलते पटाखों से हमला किया।
* 31 अक्तूबर को ‘पुर्तगाल’ की राजधानी ‘लिस्बन’ में हजारों लोगों ने कम वेतन तथा मकानों के बढ़ते किरायों के विरुद्ध जुलूस निकाल कर सरकार से इस संकट को दूर करने की मांग की। विशेष पुलिस इकाइयों ने कुत्तों और लाठियों के साथ धरनास्थल खाली कराए। 

* 31 अक्तूबर को ही ‘जर्मनी’ में महंगाई और शिक्षा सेवाओं में कटौती तथा सेना में अनिवार्य सेवा के विरोध में हजारों प्रदर्शनकारियों ने ‘फ्रैंकफर्ट’ सहित विभिन्न शहरों में देर रात तक रैलियां निकालीं और आगजनी, ङ्क्षहसा व लूटपाट की। दुकानों के शीशे तोड़ दिए और पुलिस तथा अन्य आपातकालीन सेवाओं के कर्मचारियों पर बोतलों, जलते पटाखों व पत्थरों से हमले किए।
* 31 अक्तूबर से ही बंगलादेश में महंगाई पर काबू पाने में सरकार की विफलता तथा ढाका व आसपास के इलाकों में स्थित गार्मैंट फैक्टरियों में काम करने वाले कपड़ा मिल मजदूरों द्वारा भारी प्रदर्शन जारी हैं। 
बंगलादेश की सरकार द्वारा 1 नवम्बर को इनके लिए नया वेतन बोर्ड गठित करने की घोषणा के बावजूद 2 नवम्बर को भी आंदोलनकारी कपड़ा मिल मजदूरों की पुलिस से झड़पें और आगजनी जारी रही और इस दौरान सैंकड़ों फैक्टरियों पर ताले लटक गए हैं।

* स्पेन में लोगों को दरपेश रहने के लिए मकानों की समस्या तथा मकानों के बढ़ते किरायों को लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन जारी है। हाल ही में स्पेन की राजधानी ‘मैड्रिड’ में एक बुजुर्ग महिला को उसके घर से बेदखल किए जाने के बाद यह समस्या देशव्यापी मुद्दा बन गई है और वहां इसी वर्ष 9 नवम्बर को होने वाले आम चुनावों से पहले विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
* रूस व यूक्रेन में फरवरी, 2022 में शुरू हुआ युद्ध अभी भी जारी है। इसराईल-हमास, ईरान-अमरीका तथा चीन व ताईवान के बीच संघर्ष भी जारी हैंं। ईरान संकट के चलते तेल महंगा होने से यूरोप सहित विश्व के उद्योगों का भट्ठा बैठ गया है और केवल चीन के उद्योग ही तरक्की पर हैं।इनके अलावा भी विश्व के कई देश सूडान, म्यांमार, माली, नाईजर, बुर्कीना फासो, कांगो, तुर्की, चिली, हंगरी व यमन आदि आपस में ही उलझे हुए हैं। इस तरह के घटनाक्रम के बीच जो संकेत मिल रहे हैं उनसे तो ऐसा ही लगता है कि इस भयंकर अशांति की शिकार दुनिया में शांति और सद्भाव की निकट भविष्य में आशा करना फिजूल ही है।—विजय कुमार 


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