‘ट्रम्प ने दुनिया भर में अमरीकी लोकतंत्र’ ‘की छवि बिगाड़ने की कोशिश की’

2021-01-08T05:48:47.54

अमरीका के पद मुक्त होने जा रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने बयानों को लेकर सदा विवादों में रहे तथा 20 जनवरी, 2017 को शपथ ग्रहण के बाद से ही उन पर गलत व भ्रामक बयानबाजी के आरोप लगते रहे। अमरीका की सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे डोनाल्ड ट्रम्प 1991 और 2009 के बीच अपने ‘होटल तथा कैसिनो व्यवसाय’ को 6 बार दीवालिया घोषित करने के बावजूद इन पर अपना कब्जा कायम रखने में सफल हो चुके हैं। ट्रम्प का कहना था कि ‘‘मैं चुनावों में भी इसी तरह टोटल विक्ट्री प्राप्त करूंगा।’’ 

ट्रम्प की सत्तालिप्सा इसी से स्पष्ट है कि वह 3 नवम्बर, 2020 को घोषित परिणामों के बाद से ही अपनी हार स्वीकार करने से लगातार इंकार करते रहे। इनके विरुद्ध उन्होंने कई मुकद्दमे भी दायर किए और इनमेें हारने के बावजूद दावा करते रहे कि चुनावों में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की गई है। यही नहीं, गत 4 जनवरी को उनका एक ऑडियो भी वायरल हुआ जिसमें उन्होंने जार्जिया के शीर्ष चुनाव अधिकारी को फोन करके परिणाम बदलने के लिए दबाव डालते हुए कहा कि ‘‘मेरी हार को जीत में बदलने के लिए पर्याप्त वोटों की तलाश करो।’’ 

ट्रम्प के उकसावे पर 6 जनवरी को चुनावों में कथित धांधली के विरुद्ध हजारों ट्रम्प समर्थकों ने वाशिंगटन डी.सी. में ‘सेव अमरीका’ रैली निकाली जिसमें ट्रम्प ने कहा,‘‘डैमोक्रेट्स हमसे व्हाइट हाऊस को नहीं छीन सकते।’’ 6 जनवरी को ही जब कांग्रेस के सदस्य ‘इलैक्टोरल कॉलेज’ वोटों की गिनती कर रहे थे, अपने समर्थकों की रैली में ट्रम्प ने कहा,‘‘बुधवार का दिन अफरा-तफरी फैलाने वाला होगा।’’ (ट्रम्प के भड़काऊ बयान के कारण ही ट्वीटर, फेसबुक तथा इंस्टाग्राम ने ‘नागरिक अखंडता’ का हवाला देते हुए उनके अकाऊंट ब्लाक कर दिए।) 

एक ओर ट्रम्प भाषण दे रहे थे और दूसरी ओर बड़ी संख्या में ‘ट्रम्प-ट्रम्प’  के नारे लगाती हुई उनके समर्थकों की भीड़ ने सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त करते हुए अमरीका की संसद ‘कैपिटल हिल’ की इमारत में घुस कर संसद परिसर को युद्ध के मैदान में बदल दिया। उपद्रवियों ने उप-राष्ट्रपति के अलावा ‘हाऊस स्पीकर’ की कुर्सी पर भी कब्जा कर लिया। वे संसद भवन के गुम्बद पर भी चढ़ गए और संसद के शीशे और दरवाजे तोड़ डाले। बेकाबू भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का प्रयोग करने के अलावा गोली भी चलानी पड़ी जिसमें एक महिला सहित 4 लोगों की मौत हो गई जबकि 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अनेक उपद्रवियों से हथियार भी बरामद किए गए। इस दौरान सांसदों को आंसू गैस से बचाने के लिए गैस मास्क पहनाए गए और उप-राष्ट्रपति ‘माइक पैन्स’ तथा सांसदों को वहां से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। 

ट्रम्प समर्थकों से हथियार मिलने के बाद वाशिंगटन में कफ्र्यू लगा दिया गया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ट्रम्प समर्थक कफ्र्यू तोड़ कर सड़कों पर निकल आए जिसके चलते वाशिंगटन में 15 दिनों के लिए आपातकाल लगा दिया गया है।नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ‘जो बाइडेन’ को चुनाव में 306 सीटें मिली हैं जो बहुमत के लिए जरूरी 270 सीटों से 36 सीटें अधिक हैं तथा वह 20 जनवरी को अमरीका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। 

कार्यकाल के अंतिम दिनों में ट्रम्प द्वारा की गई लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या को देखकर उसकी अपनी कैबिनेट के सदस्य भी स्तब्ध हैं। ये सदस्य अब ट्रम्प को संविधान के 25वें संशोधन के तहत अयोग्य ठहरा कर उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही ‘ट्रम्प’ को पद से हटाने की चर्चा कर रहे हैं। इस संशोधन के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति पद के कत्र्तव्यों को निभाने में असमर्थ पाए जाने पर कैबिनेट को उप-राष्ट्रपति व राष्ट्रपति को हटाने का अधिकार दिया गया है। दुनिया भर के नेताओं ने ट्रम्प के इस आचरण को शर्मनाक और निराशाजनक करार दिया है और डोनाल्ड ट्रम्प अपने पीछे राजनीतिक गुंडागर्दी की एक खतरनाक विरासत छोड़ कर जा रहे हैं। 

जहां तक भारत का संबंध है तो ट्रम्प की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर रहा है। हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति बनते समय भारतीय पेशेवरों के अमरीका आने पर कोई प्रतिबंध न लगाने की बात कही थी परन्तु बाद में अपने चुनावी फायदे के लिए स्थानीय वोटरों को लुभाने की खातिर ट्रम्प ने एच-1 बी वीजा के तहत भारतीय प्रोफैशनल्स के अमरीका आने पर रोक लगा दी जो अभी तक जारी है। राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार 6 जनवरी का दिन अमरीका के इतिहास में एक ‘काले दिन’ के रूप में लिखा जाएगा तथा डोनाल्ड ट्रम्प के इस आचरण को ‘लोकतंत्र की हत्या’ के अनुरूप बताया जाएगा।—विजय कुमार 


Chief Editor

vijay kumar

सबसे ज्यादा पढ़े गए

Recommended News