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ब्रिटेन पर घिरते ‘बेकारी’ के घने बादल

2020-09-16T04:55:34.043

आजकल शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता है जब प्रात: समाचारपत्र या टैलीविजन खोलने पर यह समाचार पढऩे-सुनने को न मिले कि फलां कम्पनी ने अपना कारोबार बंद कर देने का फैसला किया है, फलां कम्पनी इतने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही है। कारण? कोरोना वायरस। और ये ब्रिटिश कम्पनियां कोई छोटी-मोटी नहीं, एक से बढ़कर एक ऐसी कि जिनके बारे में कल्पना ही नहीं की जा सकती थी कि वे कभी आर्थिक संकट में जा सकती हैं -विश्व-विख्यात, कई के नाम का सिक्का तो शताब्दियों से मार्कीट में चल रहा है। परन्तु अब एक के बाद एक लुढ़कती जा रही हैं। इनमें शामिल हैं ब्रिटिश एयरवेज, माक्र्स एंड स्पैंसर, रॉल्स रायस, बूट्स, जॉन लुईस, डेबन्ह्मस इत्यादि। सूची बहुत लम्बी है, मैंने तो कुछ एक ही का उल्लेख किया है। 

माक्र्स एंड स्पैंसर जो अपने परिधानों, वस्त्रों की बेहतरीन क्वालिटी और डिजाइनों के लिए संसार भर में लगभग 250 वर्षों से लोकप्रिय है अब आर्थिक संकट में है। उसके वस्त्रों की बिक्री 84' कम हो चुकी है। देश भर में उसके 950 शोरूम हैं। बदले हुए हालात में उन्हें चलाए रखना मुश्किल हो रहा है। माक्र्स एंड स्पैंसर के 7000 कर्मचारियों की, ब्रिटिश एयरवेज के 12000 कर्मचारियों की छुट्टी हो चुकी है। 

लंदन के दो हवाई अड्डों ‘हीथ्रो’ और ‘गेटविक्क’ पर कोरोना वायरस से पहले  ब्रिटिश एयरवेज के 45000 कर्मचारी काम करते थे। वायरस प्रकोप से हवाई यात्रा कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो जाने पर ब्रिटिश एयरवेज को भारी नुक्सान उठाना पड़ रहा था। पहले तो इसने अपने 30000 कर्मचारियों को सस्पैंड कर दिया, फिर ‘‘गेटविक्क’ हवाई अड्डा से अपना पूरा कारोबार ही बंद कर दिया है और बाद में सस्पैंड किए गए लोगों में से 12000 को नौकरी से निकाल दिया। उसने अपने के तमाम 747 बोइंग जहाजों की उड़ान हमेशा ही के लिए खत्म कर दी है। ‘वर्जिन एयरलाइंस’ ने 1700, हवाई जहाज बनाने वाली कम्पनी ‘एयरबस’ ने भी 1700 और ‘ईदीजैट’ ने 2000 कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर दी है। 

सुनसान एयरपोर्ट 
‘गेटविक्क’ हवाई अड्डा के इर्द-गिर्द शहरों, नगरों, विशेषकर ‘करऔली’ के लोगों की रोजी-रोटी का सहारा हवाई अड्डा था। नौकरियों के अतिरिक्त शहर का सारा कारोबार ही हवाई अड्डा की गतिविधियों पर निर्भर करता था। अब चूंकि हवाई अड्डा का अपना ही कारोबार न के बराबर रह गया है इसके आसपास के नगरों पर वीरानी छा गई है। दुकानें, स्टोर बंद, बाजार, मार्कीटें सुनसान। 

दफ्तरों में काम करने वालों के लिए विभिन्न स्थानों और मुख्यत: रेलवे स्टेशन, प्लेटफार्मों तथा हवाई अड्डों पर अपने 600 स्टालों द्वारा सैंडविच, कॉफी और स्नैक्स बेचने वाली कम्पनी ‘अपर क्रस्ट’ 5000 कर्मचारियों को निकाल रही है क्योंकि उसकी सामग्री की बिक्री 95' कम हो गई है। सैंडविच इत्यादि खरीदने वाले दफ्तरी बाबू हैं नहीं,घर ही से काम कर रहे हैं, ट्यूब और अंडरग्राऊंड गाडिय़ों की आवाजाही कम है, रेलवे स्टेशन सुनसान हैं। अब उसके सिर्फ 10 स्टाल चल रहे हैं। इसी उद्योग से जुड़ी दो अन्य कम्पनियों ‘कैफे रूज’ ने 2000 तथा ‘प्रेट-ए-मेंगर’ ने 1000 कर्मचारियों को विदाई दे दी है। ‘पिज्जा एक्सप्रैस’ ‘बर्गर किंग’ तथा इस क्षेत्र से मिलते-जुलते उद्योग 12000 कर्मचारियों को निकाल रहे हैं। 

प्रसिद्ध समाचारपत्र ‘डेली मिरर’ ने 550 कर्मियों को काम से निकाल दिया है। ब्रिटेन में बेरोजगारी के बादल दिन-ब-दिन घने और गहरे होते जा रहे हैं। निराशा और उदासी का वातावरण है। स्थिति संभलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे। रोजगार की स्थिति चूूंकि दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है, कई कम्पनियां कर्मचारियों से ऐसे काम ले रही हैं जिनका उनके पेशे से कोई संबंध नहीं और जो उनके सम्मान को आघात पहुंचाता है अर्थात ‘टेस्को’ जैसे प्रख्यात स्टोर ने शैल्फों पर बिक्री सामग्री टिकाने-सजाने वाले स्टाफ को ग्राहकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ‘टॉयलेट’, फर्श पर पोचा लगाने, स्टोर में साफ-सफाई करने का आदेश दिया है। 

ब्रिटेन में बढ़ती बेरोजगारी, उदासी और निराशा
ब्रिटेन की राष्ट्रीय आय का बहुत बड़ा भाग पर्यटन उद्योग से आता है। हर वर्ष दुनिया के कोने-कोने से करोड़ों पर्यटक यहां आते हैं। लेकिन कोरोना ने यह आवागमन भी बंद कर दिया है। होटल खाली पड़े हैं। स्टाफ कम किए जा रहे हैं। बेकारी की यह हालत है कि मैनचेस्टर के एक होटल ने रिसैप्शनिस्ट की एक जगह के लिए इश्तिहार दिया तो मालिक यह देख कर दंग रह गया कि 1000 लोगों ने दरखास्तें दी हैं। बेरोजगार लोगों को सरकार द्वारा आर्थिक सहायता (बैनीफिट)देने की व्यवस्था है। जब मार्च मास से कोरोना प्रकोप शुरू हुआ है तबसे बैनीफिट लेने हेतु आवेदकों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है, सामान्य संख्या से 20000 प्रतिदिन ज्यादा। 

यह सब इस बात के बावजूद कि नौकरी या व्यवसाय से बेकार होने वाले प्राय: हर वर्ग के लोगों को सरकार ने उदारतापूर्ण आॢथक सहायता दी है। 50 लाख से ज्यादा लोग इस वक्त यह बैनीफिट ले रहे हैं जिनमें से अधिकांश 18 से 24 वर्ष के नौजवान हैं। वायरस के बाद यह बैनीफिट लेने वाले नौजवानों की संख्या दोगुनी हो गई है। इस वक्त 25 लाख से भी ज्यादा नौजवान बेकारी अलाऊंस ले रहे हैं। 

ब्रिटेन में इतनी बेरोजगारी 40 वर्ष बाद देखने को मिल रही है। इंकम टैक्स देने वालों की संख्या में मार्च से लेकर अब तक 650000 की कमी हो गई है और अभी अगले मास अक्तूबर के बाद बेकारों की इस संख्या में और भी भयानक वृद्धि होने वाली है क्योंकि सरकार ने कोरोना प्रकोप शुरू होने पर कर्मचारियों तथा उनके इम्प्लायर्स (मालिकों) दोनों ही की आॢथक सहायता के लिए एक अत्यंत प्रशंसनीय योजना शुरू की थी ताकि कर्मचारियों की नौकरियां भी बची रहें और मालिकों को भी सारे का सारा नुक्सान न उठाना पड़े। इस समय ब्रिटेन के वित्त मंत्री हैं भारतीय मूल के एक युवा अर्थ विशेषज्ञ ऋषि सूनक। प्रधानमंत्री पद के बाद वित्त मंत्री का पद सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। कई ऐसे उदाहरण हैं कि अवसर आने पर वित्त मंत्री ही बाद में प्रधानमंत्री बनते रहे हैं। ऋषि सूनक इस उच्च पदवी तक पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं। 

भावी प्रधानमंत्री के तौर पर उनके नाम के चर्चे अभी से शुरू हो गए हैं। उन्होंने वित्त मंत्री पद का कार्यभार संभाला ही था कि कोरोना वायरस की व्याधि शुरू हो गई। देश को अचानक अप्रत्याशित संकटमय परिस्थितियों का सामना करना पड़ गया। आॢथक अवस्था डगमगाने की शंकाएं उत्पन्न होने लगीं। ऐसी स्थिति ऋषि सूनक के लिए एक बड़ी भारी चुनौती थी। एक ओर तो आर्थिक स्थिरता बिगड़ने से बचाना और दूसरी तरफ जनता का यह विश्वास बनाए रखना कि सरकार हालात को संभाल सकने में सक्षम है। यह कड़ी परीक्षाएं ऋषि के सामने थीं। इन दोनों में वह पूरी तरह सफल रहे हैं। इस संकट में उन्होंने प्राय: हर उद्योग, हर व्यवसाय के लोगों की सरकारी खजाने से दिल खोल कर 30 बिलियन पौंड की सहायता की है।-लंदन से कृष्ण भाटिया


Pardeep

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