सेना के इच्छुक युवाओं को प्रेरित करने की जरूरत

2021-06-25T06:19:35.567

इंडियन मिलिटरी अकादमी (आई.एम.ए.) देहरादून में 12 जून को 341 जैंटलमैन कैडेट (जी.सीज) पास आऊट परेड उपरांत कमीशंड आफिसर के तौर पर भारतीय सेना में शामिल हो गए। 148 रैगुलर कोर्स तथा 131 टैक्नीकल ग्रैजुएट कोर्स के कुल 425 जी.सीज में से 84 नौ मित्र देशों के थे। भारत के जो 341 नौजवान अफसर बने उनमें से सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के 66, हरियाणा के 38, उत्तराखंड के 37, पंजाब के 32, बिहार के 29, दिल्ली व जम्मू कश्मीर के 18-18 तथा हिमाचल प्रदेश व महाराष्ट्र के 16-16 तथा अन्य बाकी राज्यों के थे जिनमें चंडीगढ़ का भी इकलौता शामिल था। 

जानकारी के अनुसार पंजाब के जो 32 कैडेट्स पासआऊट हुए उनमें से 12 तो महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज इंस्टीच्यूट (ए.एफ.पी.आई.) के थे जोकि एक स मान की बात है। प्रश्न उठता है कि अगर पंजाब के 32 युवाओं में से इसी इंस्टीच्यूट के 12 कैडेट्स ने कमीशंड प्राप्त किया तो बाकी सारे पंजाब से केवल 20 ही आए। सोचने की बात तो यह भी है कि अविभाजित पंजाब से निकले छोटे आकार तथा कम आबादी वाले सूबे हरियाणा का तुलनात्मक विश्लेषण पंजाब से किया जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि कुल हिन्द कमीशन प्राप्त करने वालों की संख्या में से हरियाणा के नौजवानों का अफसरी सिलैक्शन रेट गत एक दशक से 10 फीसदी तक पहुंच गया मगर पंजाब का ग्राफ 3.50 फीसदी पर ही सीमित क्यों? 

जहां चाह वहां राह : सिख नैशनल कालेज कादियां में पढ़ते समय सेना में कमीशन हासिल करने के उद्देश्य से एन.सी.सी. का ‘सी’ सर्टीफिकेट पास करके 20 वर्ष की उम्र में मैं आई.एम.ए. से पासआऊट हुआ। फिर मैंने अपना मन बना लिया कि युवाओं को सेना में भर्ती के योग्य बनाने की खातिर प्रोत्साहित करते हुए हर तरह की सहायता प्रदान करनी है। मेरे बचपन के साथी भी साथ जुड़ते गए। बस फिर यूनिट तथा दो ब्रिगेडों की कमान करते समय उद्देश्य की प्राप्ति होती गई। 

मेरी आखिरी पोस्टिंग बतौर डिप्टी डायरैक्टर जनरल एन.सी.सी. उत्तर प्रदेश लखनऊ में हुई जहां मुझे 1995-97 के बीच लगभग 1,33,000 कैडेटों को एक अच्छा नागरिक बनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। तात्पर्य यह कि मेरे करियर की शुरूआत ही एन.सी.सी. से हुई। शायद इसलिए मुझे जिस पोस्ट के लिए चुना गया उस समय अधिकतर समय उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू रहा। मुझे याद है जब मैंने उस समय के मुख्य सचिव माता प्रसाद आई.ए.एस. तथा अन्य अधिकारियों को प्रैजैंटेशन दौरान इस बात पर जोर दिया कि कैसे एक युवा मानवीय शक्ति को लामबंद तथा सिखलाई देकर सेना के लिए तैयार किया जा सकता है। उन्होंने खुश होकर स्कीम स्वीकार कर ली तथा एन.सी.सी. का बजट भी दोगुणा कर दिया जबकि डायरैक्टोरेट के लिए ल बे समय तक खर्च करना मुश्किल हो गया। 

कैडेटों के चयन तथा कमीशन की प्राप्ति की खातिर एन.सी.सी. के बंद पड़े प्रशिक्षण केन्द्र जिन्दा हो गए तथा नए भी खुल गए, युवाओं में अनथक जज्बा पैदा होने लगा तथा एन.डी.ए., आई.एम.ए. की तैयारियां शुरू हो गईं और आज यू.पी. के परिणाम सामने हैं। जब गणतंत्र दिवस के अवसर पर मेरठ एन.सी.सी. कैडेट वर्षा ठाकुर ने समस्त एन.सी.सी. परेड का नेतृत्व किया तो रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने बच्चों को और भी प्रोत्साहित किया और मुझे कहने लगे मैं आपको जनरल बनाकर अपने पास ही रखना चाहता हूं। चाहे वोट बैंक भी इसके पीछे छिपा हो मगर उनकी नीयत साफ थी। 

जब मैं 1997 से 2003 दौरान डायरैक्टर सैनिक भलाई पंजाब के तौर पर सेवा निभा रहा था तो एक दिन मानसा जिला के विधायक अजीतइंद्र सिंह मोफर एक होनहार विद्यार्थी को मेरे कार्यालय में लेकर आए और कहने लगे इस बच्चे ने कमीशन की इंटरव्यू हेतु जाना है, इसकी मदद करो। कहते हैं ‘जहां चाह वहां राह’ यदि नीयत साफ हो तो परमात्मा भी सभी दरवाजे खोल देता है। 

मैंने उसी समय सिलैक्शन सैंटर इलाहाबाद के कमांडैंट रह चुके मेजर जनरल गुरदयाल सिंह हुंदल से बात करके उसे उनके हवाले कर दिया। उन्होंने कैंडीडेट से खूब मेहनत करवाई। कुछ समय बाद मोफर साहिब, होनहार नौजवान तथा उसका पिता लड्डुओं का डिब्बा लेकर मेरे पास आए और बताया कि लड़का आई.एम.ए. में प्रशिक्षण के लिए जा रहा है। यदि नेता परिवारवाद, दौलतवाद, पाखंडवाद तथा राजनीति से ऊपर उठकर नशाखोरी जैसी बुराइयों को दूर करेंगे तो सेना के इच्छुक प्रेरित युवाओं की कोई कमी नहीं।-ब्रि.कुलदीप सिंह काहलों
 


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Content Writer

Pardeep

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