बम विस्फोटों में साइकिलों का इस्तेमाल : एक संक्षिप्त इतिहास

punjabkesari.in Friday, Feb 25, 2022 - 06:26 AM (IST)

रविवार को उत्तर प्रदेश में एक चुनावी भाषण के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2008 के अहमदाबाद विस्फोटों और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच एक संबंध बनाते हुए दिखाई दिए, यह सोच कर कि आतंकवादियों ने साइकिल पर बम लगाने का विकल्प क्यों चुना, जो कि सपा का चुनाव चिन्ह है। अक्तूबर 1992 में मुलायम सिंह यादव के जनता दल से अलग होने के बाद भारतीय चुनाव आयोग (ई.सी.) ने सपा को साइकिल का चुनाव चिन्ह आबंटित किया था। चुनाव चिह्न (आरक्षण और आबंटन) आदेश, 1968 के तहत चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों को मान्यता देने और उन्हें चुनाव चिन्ह आबंटित करने का अधिकार है। 

2006 से 2013 तक : 2006 के मालेगांव विस्फोटों में पहली बार साइकिल का इस्तेमाल बमों के वाहक के रूप में किया गया था, जिसमें आर.एस.एस. के पूर्व प्रचारक सुनील जोशी के नेतृत्व में एक हिंदुत्व समूह पर महाराष्ट्र में मुस्लिम बहुल शहर को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया था। राष्ट्रीय जांच एजैंसी (एन.आई.ए.) की चार्जशीट के अनुसार, अपराधियों ने अलग-अलग साइकिलों पर 2 बम बांधे और उन्हें 8 सितंबर, 2006 को शहर में रख दिया। 

23 नवंबर,  2007 को वाराणसी, लखनऊ और फैजाबाद में अदालतों के पास दोपहर 1 से 1:30 बजे के बीच सिलसिलेवार विस्फोट हुए। जिन 5 बमों से हुए इन धमाकों में 15 लोगों की मौत हुई थी, वे साइकिल से बंधे थे। जांचकत्र्ताओं ने बाद में दावा किया कि हमलों के पीछे इंडियन मुजाहिदीन (आई.एम.) का हाथ था। पहले उसी साल 22 मई, 2007 को गोरखपुर में साइकिलों पर रखे 3 बम फट गए, जिसमें 3 लोग घायल हुए थे। दिसंबर 2020 में, एक स्थानीय अदालत ने कथित हूजी कार्यकत्र्ता मोहम्मद तारिक कासमी को दोषी ठहराया और हमलों के लिए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। 13 मई, 2008 को जयपुर में 8 स्थानों पर साइकिलों से बंधे 9 बम विस्फोट हुए, जिनमें 71 लोग मारे गए थे। ये पहले ऐसे धमाके थे, जिनकी आई.एम. ने विभिन्न मीडिया घरानों को ई-मेल भेजकर जिम्मेदारी ली थी। 

26 जुलाई, 2008 को अहमदाबाद में हुए 22 बम धमाकों में 56 लोग मारे गए थे। इनमें से कई बम साइकिलों पर बंधे पाए गए थे। आई.एम. ने जिम्मेदारी का दावा किया और इसके कथित सदस्यों को गत शुक्रवार, 18 फरवरी, 2022 को एक निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई। 1 अगस्त, 2012 को पुणे में साइकिल का इस्तेमाल बम वाहक के रूप में किया गया था। चार कम तीव्रता वाले विस्फोटों में एक व्यक्ति घायल हो गया और आई.एम. के संदिग्ध गुर्गों को गिरफ्तार कर लिया गया था। एक साल से भी कम समय के बाद, आई.एम. ने 21 फरवरी, 2013 को हैदराबाद के दिलसुखनगर बाजार में बम लगाने के लिए 2 साइकिलों का इस्तेमाल किया। इन विस्फोटों में 18 लोग मारे गए थे। 

बाकी दुनिया में : आतंकवादी समूह बम लगाने के लिए लंबे समय से साइकिल का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। इन्हें दुनिया में कहीं भी खरीदना आसान और सस्ता है और छर्रों के साथ धातु के दांतेदार टुकड़े जोड़ कर विस्फोट के प्रभाव को बढ़ाया जाता है। साइकिल बम का पहला दर्ज मामला 1939 का है, जब आयरिश रिपब्लिकन आर्मी ने एक साइकिल की टोकरी में एक बम रखा था, जिसमें विस्फोट होने से ब्रिटेन के कोवैंट्री में 5 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद, 1970, 1980 और 1990 के दशक में ब्रिटेन और जर्मनी में और पूरी 21वीं सदी में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, इराक, रूस और स्पेन सहित अन्य देशों में साइकिल बमों का इस्तेमाल किया गया। -दीप्तिमान तिवारी


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