‘कैंसर के लगातार बढ़ रहे मामले’ रासायनिक खादों आदि का प्रयोग घटाने की आवश्यकता!

punjabkesari.in Saturday, Aug 29, 2026 - 02:22 AM (IST)

नई दिल्ली स्थित ‘भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद’ और ‘नैशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम’ के अध्ययन के अनुसार भारत में कैंसर अब सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है जिसके मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।
2022 में देश में अनुमानित 14.6 लाख नए कैंसर के मामले सामने आए तथा लगभग 8.10 लाख मरीजों की मौतें हुईं। इस अध्ययन के अनुसार उत्तरी भारत में कैंसर का देरी से पता चल पाने के कारण मरीजों की जान को खतरा भी अन्य राज्यों की तुलना में कई गुणा अधिक पाया गया है। भारतीय पुरुषों में फेफड़े, मुख और पेट का कैंसर सबसे आम है। इनमें तंबाकू के अधिक इस्तेमाल से होने वाला कैंसर (मुख, गला, फेफड़े) 50 प्रतिशत से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार है। 

महिलाओं में सर्वाधिक स्तन कैंसर के मामले पाए जा रहे हैं जबकि इनके बाद गर्भाशय, ग्रीवा (बच्चेदानी का मुंह) और डिंबग्रंथि (अंडाशय) के कैंसर का स्थान है। महिलाओं में स्तन कैंसर के सर्वाधिक मामले उत्तर प्रदेश में पाए गए हैं। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और तमिलनाडु में भी कैंसर के मामलों की संख्या बहुत अधिक है। खराब जीवनशैली और प्रोसैस्ड फूड के बढ़ते सेवन को भी कैंसर के बढ़ते मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तरी भारत में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में कैंसर के नए मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2025 में देश में प्रतिदिन 2380 लोगों की कैंसर से मौत हुई जबकि उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन 343 लोगों ने जान गंवाई जो पूरे देश में सबसे अधिक है। उत्तर प्रदेश में 2021 के मुकाबले 2025 में कैंसर से होने वाली मौतों में 11,000 की वृद्धि हुई है।

वर्ष 2021 में पंजाब में कैंसर के 39,521; 2022 में 40,435; 2023 में 41,337; 2024 में 42,288 तथा वर्ष 2025 में 43,196 मामले सामने आए और इस प्रकार पंजाब में पिछले मात्र 5 वर्षों में कैंसर से मौतों में 9.22 प्रतिशत वृद्धि हुई है। राज्य का मालवा क्षेत्र कैंसर से सर्वाधिक प्रभावित है।  2025 में पंजाब में प्रतिदिन 68 लोगों, हरियाणा में 50 लोगों और हिमाचल प्रदेश में प्रतिदिन 15 लोगों की मौतें हुई हैं। जहां तक हरियाणा का सम्बन्ध है, वहां वर्ष 2021 के दौरान कैंसर के 30,015 मामले सामने आए जो वर्ष 2025 में बढ़ कर 33,395 तक पहुंच गए। इसी प्रकार कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी 2025 में बढ़ कर 18,387 तक पहुंच गया जो वर्ष 2021 में 16,543 था। इस तरह की पृष्ठïभूमि में केंद्र सरकार ने कुछ समय पहले राज्यसभा में बताया था कि वर्ष 2026 तक देश में कैंसर के नए रोगियों की अनुमानित संख्या बढ़कर 15.77 लाख के निकट पहुंच जाएगी। 

इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को कैंसर को अधिसूचित (नोटीफाइड) रोग घोषित करने का आदेश दिया है। अधिसूचित रोगों में वे रोग शामिल होते हैं जिनके हर केस और उससे होने वाली मौतों की सूचना सभी सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों के लिए स्वास्थ्य विभाग को देनी कानूनी तौर पर अनिवार्य होती है ताकि ऐसे रोगियों की शीघ्र पहचान करके समय रहते उनका उचित इलाज किया जा सके। भारत में कैंसर के बढ़ते मामले और बड़ी संख्या में हजारों मौतें गहरी चिंता का विषय हैं। केवल इलाज नहीं बल्कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल पर रोक और प्रदूषण नियंत्रण से ही इस बीमारी को किसी सीमा तक हराया जा सकता है। 

सिर्फ अस्पताल खोल देने से यह समस्या दूर नहीं होगी। मरीजों को समय रहते सस्ता और आसानी से इलाज उपलब्ध करवाने, कैंसर की रोकथाम पर काम करने के साथ ही लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और पहले चरण में ही रोग की पहचान करके कैंसर बढऩे के कारणों को जड़ से समाप्त करने की भी जरूरत है। सभी राज्यों में औद्योगिक कचरे के सख्ती से निपटान के साथ वायु और भू-जल प्रदूषण पर भी अंकुश लगाना होगा। इससे पहले कि अधिक देर हो जाए लोगों को अपनी जीवनशैली में सुधार करने, कीटनाशकों और रासायनिक खादों का इस्तेमाल सीमित करने की जरूरत है। इसके साथ ही सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कैंसर के  इलाज के लिए जरूरी उपकरणों की व्यवस्था करने की भी तुरंत जरूरत है क्योंकि ब्लड कैंसर जैसी कैंसर की अनेक किस्मों की जांच के लिए उपकरण देश के बहुत ही कम अस्पतालों में उपलब्ध हैं। —विजय कुमार 


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