गुड़गांव का स्वरूप इसकी ग्रामीण जड़ों से बना है
punjabkesari.in Wednesday, Aug 09, 2023 - 05:52 AM (IST)
जमीन से छह फुट ऊपर, जब फ्रेम में कोई भारतीय नहीं होता, तो गुडग़ांव के कुछ हिस्से पहली दुनिया के लगते हैं। ये कांच और स्टील से बनी आधुनिक इमारतें हैं। गुडग़ांव की प्रतिष्ठा संपन्न होने की है। इसके कुछ बेहतरीन होटलों को अस्पताल भी कहा जाता है। ऐसे अपार्टमैंट हैं, जिनकी कीमत 30 करोड़ रुपए है, उन इमारतों के अपने स्पा हैं। परिणामस्वरूप, जब गुडग़ांव में भीड़ ने एक मस्जिद और कई वाहनों को जला दिया, तो कई लोग आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने इसे एक विरोधाभास के रूप में देखा कि चमकदार अचल संपत्ति, वैश्विक कंपनियों के लिए और कुछ सबसे अधिक वेतन पाने वाले भारतीयों का घर भी धार्मिक दंगों की मेजबानी कर सकता है। किसी नए शहर का असली चरित्र कभी भी ‘नए’ हिस्से में नहीं होता, यह इसकी मूल जनसंख्या के स्वभाव में है। वे आधार हैं।
मैं गुडग़ांव में रहता हूं, जो नूंह से 50 कि.मी. से भी कम दूरी पर है, गुडग़ांव में हुई ङ्क्षहसा के मामले में यह ग्राऊंड जीरो है। स्कूल बंद हो गए और लोग बाहर नहीं निकले। जो घरेलू सहायिकाएं सिन्दूर नहीं लगातीं, वे भाग गई हैं और जो सिन्दूर लगाती हैं, वे मांग भर रही हैं। सहायता करने वालों, डिलीवरी ब्वॉय, एयर-कंडीशनर मैकेनिक और ड्राइवरों का एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम प्रवासी हैं। उनमें से कई लोग बिहार भाग गए हैं? वास्तविक गुडग़ांव, जिसे गलती से पुराने गुडग़ांव के नाम से जाना जाता है, एक देहाती जीवनशैली से उभरा है और आज भी देहाती है और जाति और धर्म के प्रति जागरूक है। इसका सांप्रदायिक तनाव का इतिहास है और यह महिलाओं के लिए भारत के सबसे खराब क्षेत्रों में से एक है। इसकी मातृशक्ति, हरियाणा में लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 879 महिलाओं का है। (राष्ट्रीय औसत 940 है और केरल का 1,084 है।)
पुराने समय का गुडग़ांव चारों ओर है, यहां तक कि अपने ‘नए शहर’ के केंद्र में भी, मनमोहक खंडहरों के रूप में नहीं बल्कि शगुन के रूप में। दर्जनों स्वतंत्र गाएं एक नए रहस्यमय विशेषाधिकार को महसूस करते हुए सड़क के बीच में खड़ी हैं। मेरे अनुभव में नगरपालिका सबसे खराब प्रबंधन वाली नगर पालिकाओं में से एक है। यह ऐसा है, मानो जिन लोगों को शहर को गांवों में लाने का काम सौंपा गया, वे मानते हैं कि उन्हें गांवों को शहर में लाना होगा। गोल्फ कोर्स रोड नामक एक हिस्से और एक राष्ट्रीय राजमार्ग को छोड़कर, हर दूसरी सड़क हास्यास्पद स्थिति में है। यह सब एक राजनीतिक आश्वासन की ओर इशारा करता है कि वोट नागरिक मानकों के अलावा अन्य कारणों से आते हैं और वे कारण आर्थिक और सांप्रदायिक हैं। गुडग़ांव और इसके आसपास के गांव उन लोगों के गढ़ हैं, जो गायों की पूजा करने का दावा करते हैं, जिनमें से कुछ उन बदकिस्मत मुसलमानों पर हमला करते हैं जो गायों के साथ पकड़े जाते हैं।
2007 में, जब गुडग़ांव में तेजी से बदलाव हो रहा था और बिल्डरों ने विकसित करने के लिए खेतों के विशाल टुकड़े खरीदे थे, मैं कई किसानों से मिला, जो जमीन बेचकर अचानक अमीर बन गए थे। वे बाजरा और सरसों उगाकर प्रति एकड़ 15,000 रुपए कमाते थे लेकिन उन्होंने एक दशक में जमीन की कीमतों में 500 गुना वृद्धि देखी। अचानक संपन्नता के भ्रम में किसान फुल डाऊन पेमैंट पर कारें खरीद रहे थे। उन्होंने शिकायत की कि जो महिलाएं सुबह 4 बजे उठकर घर का काम निपटाती थीं, वेे बैड-टी की अभ्यस्त हो गईं। अब जब दो पड़ोसी एक-दूसरे से टकराते थे, तो उनके बीच इस बात पर मूक द्वंद्व होता था कि पहले ‘राम राम’ कौन कहेगा। एक किसान ने नए शिष्टाचार के बारे में कहा, ‘‘जो आदमी अधिक गरीब है, उसे पहले नमस्कार करना चाहिए।’’ उन्होंने मधुमेह और हृदय रोग भी पा लिया।
लगभग उसी समय, एक संपन्न इलाके में रहने वाली एक महिला को याद आया कि एक सुबह एक आगंतुक उसके दरवाजे पर आई थी। ‘मैंने सोचा था कि वह एक नौकरानी के रूप में नौकरी चाहती थी, लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ कि वह खरीदने के लिए एक घर की तलाश में थी।’ अचानक आई संपत्ति ने कई ग्रामीणों को इसे प्रबंधित करने के उपायों के लिए बेचैन कर दिया। यह कहानी थी, जो मुझे आशा है कि अप्रासंगिक नहीं है क्योंकि यह बहुत दिलचस्प है। पांच आदमी एक स्कूल में गए और शिक्षकों से पूछा कि क्या उनके छात्रों में विवाह योग्य उम्र की कोई स्मार्ट लड़की है। उन लोगों ने कहा कि उनके परिवार ने जमीन बेचकर 3 करोड़ कमाए हैं लेकिन वे सभी अनपढ़ थे।
उन्होंने निर्णय लिया कि भाइयों में से एक को ऐसी शिक्षित लड़की से शादी करनी चाहिए, जो पैसे संभालना जानती हो। पुराने गुडग़ांव के जमींदार अमीर हो गए लेकिन वे कार्यकारी प्रवासियों के कारण एक सामाजिक निम्नवर्ग भी बन गए, जिन्होंने गुडग़ांव को ‘महानगरीयवाद’ के लिए प्रतिष्ठा दी, एक ऐसा शब्द जिसका कोई अर्थ नहीं है। लगभग एक दशक पहले, स्थानीय लोग सड़क पर झगड़े के बाद नियमित रूप से साहबों की पिटाई करके सामाजिक गड़बड़ी से निपटते थे। अब साहब समझदार हो गए हैं।गुडग़ांव में तेजी जारी है। पिछले दो साल में मेरे घर का किराया दोगुना हो गया है। लेकिन इस स्थान की मूल प्रकृति इसके मूल लोगों, ग्रामीण हरियाणा के लोगों की प्रकृति है। हमारे समय के महान गृहयुद्धों में से एक, गांव के विचार और शहर के विचार के बीच की लड़ाई है। जड़ और जड़हीनता के बीच की लड़ाई। यह एक ऐसी लड़ाई है, जिसे गांव हर जगह जीत रहा है।-मनु जोसेफ
