वोटों के लिए स्टालिन कर रहे हैं केंद्र की हर नीति का विरोध
punjabkesari.in Tuesday, Apr 01, 2025 - 05:18 AM (IST)

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डी.एम.के.) सरकार को लगता है कि तमिलनाडु भारत का हिस्सा नहीं है। तमिलनाडु के एम.के. मुख्यमंत्री स्टालिन ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ते जिसमें केंद्र सरकार के जरिए देश में कानून की समानता की नीति लागू की जा सके। देश के अन्य राज्यों को केंद्र की राष्ट्रीय नीतियां मानने में उतनी आपत्ति नहीं होती, किन्तु मुख्यमंत्री स्टालिन ने लगता है ठान लिया है कि चाहे कुछ भी हो जाए हर हाल में केंद्र की नीतियों का विरोध करना है। इससे बेशक देश में कानून का राज कमजोर पड़ता हो या फिर देश की एकता-अखंडता पर आंच आती हो।
मुस्लिम वोटों को रिझाने की खातिर स्टालिन सरकार ने तमिलनाडु विधानसभा में वक्फ बोर्ड संशोधन के केंद्र सरकार के प्रयासों के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया। जबकि अभी यह प्रस्ताव कानून के तौर पर देश में लागू ही नहीं हुआ है। प्रस्ताव में कहा गया कि स्टालिन सरकार किसी भी तरह का संशोधन स्वीकार नहीं करेगी। दरअसल इंडिया गठबंधन में उठे नेतृत्व के विवाद की पृष्ठभूमि में फिलहाल स्टालिन भी खुद को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी ए.आई.ए.डी.एम.के. ने मुख्यमंत्री स्टालिन पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है। ए.आई.ए.डी.एम.के. का कहना है कि ऐसा लगता है कि स्टालिन की पार्टी डी.एम.के. धर्म, भाषा के आधार पर एक नैरेटिव सैट करने की जल्दी में है। पार्टी ने कहा कि इस मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जे.पी.सी.) बनी थी और इसका नतीजा क्या रहा, जिन पार्टियों के सदस्य समिति में हैं, वे न्यायपालिका में वक्फ को चुनौती क्यों नहीं दे रहे हैं। विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की इतनी जल्दी क्यों है। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के लिए लोगों को भड़काने की कोशिश करना बेहद निंदनीय है।
लोकसभा सीटों के परिसीमन के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री स्टालिन सर्वाधिक मुखर रहे हैं। देश के अन्य राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारों को परिसीमन के मामले से ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा किन्तु स्टालिन इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाने का प्रयास कर विरोध करने पर आमादा हैं। स्टालिन ने चेन्नई में इस संबंध में एक बैठक बुलाई, जिसमें 7 राज्यों, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और ओडिशा के नेताओं ने भाग लिया। मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि यदि पुनर्गठन जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो इसका दक्षिणी राज्यों पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा।
इस बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि लोकसभा सीटों का परिसीमन अगले 25 साल के लिए स्थगित कर दिया जाना चाहिए जबकि इससे पहले 5 मार्च को तमिलनाडु में हुई सर्वदलीय बैठक में कहा गया था कि परिसीमन से तमिलनाडु में लोकसभा सीटों की संख्या 7.18 फीसदी से कम नहीं होनी चाहिए। इस मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि मोदी सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि परिसीमन के बाद प्रो-रेटा (आनुपातिक आधार) के हिसाब से दक्षिण के एक भी राज्य की एक भी सीट (लोकसभा) कम नहीं होगी। एन.ई.पी. नीति में तीन भाषा प्रणाली पर जोर दिया जाना तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डी.एम.के. को पसंद नहीं आया। डी.एम.के. किसी भी स्तर पर हिन्दी का प्रचार-प्रसार करने की कट्टर विरोधी रही है। डी.एम.के. बनाम केंद्र का टकराव पिछले महीने तब शुरू हुआ जब केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वाराणसी में कहा कि अगर राज्य तीन-भाषा फार्मूले के साथ एन.ई.पी. को पूरी तरह से लागू नहीं करता है तो वह तमिलनाडु के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत 2,400 करोड़ रुपए की धनराशि रोक देंगे।
एन.ई.पी. में 3 भाषाओं के फॉर्मूले के तहत हिंदी को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। मुख्यमंत्री स्टालिन समेत अन्य डी.एम.के. नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार पिछले दरवाजे से हिंदी थोपने की कोशिश में है। विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों में सत्तारूढ़ दलों की राज्यपालों से विभिन्न मुद्दों पर नोक-झोंक सर्वविदित है, किन्तु तमिलनाडु में तमाम मर्यादाओं को तार-तार करते हुए स्टालिन सरकार राज्यपाल आर.एन. रवि से विरोध को सड़कों पर ले आई। यहां तक कि राज्यपाल की गाड़ी पर डी.एम.के. कार्यकत्र्ताओं ने हमले का प्रयास तक किया। पूर्व में राज्यपाल रवि ने संविधान और राष्ट्रगान के प्रति अनादर के आरोप के बाद तमिलनाडु विधानसभा से वॉकआऊट कर दिया था।
इस पर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की पार्टी के नेताओं ने रवि को हटाने की मांग को लेकर राज्य भर में विरोध प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं स्टालिन सरकार और राज्यपाल रवि के बीच विवाद इस हद तक बढ़ गए कि सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। देश के संविधान में संघ राज्यों की व्यवस्था है ताकि राज्यों की स्वायत्ता बरकरार रहे, किन्तु तमिलनाडु की स्टालिन सरकार इस स्वायत्ता को केंद्र के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करके देश को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।-योगेन्द्र योगी