फिलीपींस से 40 हजार चीनियों को निकालने की योजना

punjabkesari.in Sunday, Oct 02, 2022 - 04:52 AM (IST)

फिलीपींस के नए राष्ट्रपति फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर अपने देश की भू-राजनैतिक, आर्थिक और राजनीतिक नीति को बदलने जा रहे हैं जिसके दीर्घकालिक परिणाम निकल कर सामने आएंगे। पूर्व राष्ट्रपति रॉड्रिगो दुतेर्ते के शासनकाल में चीनी लोगों को फिलीपींस में जुआघर खोलने के बहुत आसान रास्ते दिए गए थे, जिसके चलते फिलीपींस में चीनियों द्वारा चलाई जा रही गैर-कानूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसे खत्म करने के लिए नए राष्ट्रपति फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर ने देश की नीतिगत परिवर्तन की घोषणा की है और उसपर काम शुरू कर दिया है।

इस सप्ताह फिलीपींस के न्याय विभाग ने घोषणा की है कि वह 175 जुआघरों पर ताले जड़ेंगे और 40 हजार से ज्यादा चीनियों को फिलीपींस से बाहर निकालेंगे। ये चीनी अपना वीजा खत्म होने के बाद भी फिलीपींस में रह रहे हैं और ढेर सारी गैर-कानूनी गतिविधियों में लिप्त हैं। फिलीपींस में चलने वाले इन जुआघरों को शॉर्ट फॉर्म में पोगो कहते हैं जिसका मतलब है फिलीपींस ऑफशोर फिलीपींस ऑपरेटर्स। जिन जुआघरों को बंद किया जाना है उनके लाइसैंस खत्म हो चुके हैं या टैक्स न चुका पाने के कारण फिलीपींस की सरकार ने रद्द कर दिए हैं। इनमें से अधिकतर जुआघर के लोग चीनी आपराधिक सिंडीकेट में जुड़े रहते हैं।

फिलीपींस के न्याय विभाग के प्रवक्ता डोमिनीक क्लावानो ने बताया कि इनमें से सबसे पहले उन चीनियों पर कार्रवाई की जाएगी जो हत्या, अपहरण जैसे बड़े अपराधों में लिप्त हैं। इस घटना के तुरंत बाद चीनी दूतावास से जवाब आया कि चीन फिलीपींस द्वारा ऐसी कार्रवाई का समर्थन करता है और जुआघरों को बंद करने के लिए सख्त कदम उठाने का स्वागत करता है। एक तरफ चीन ऐसी बातें करता है तो वहीं दूसरी तरफ चीन की सरकार अपने अधिकारियों को नकली दस्तावेजों के साथ फिलीपींस में जुआघर चलाने के लिए भेजती है और उनकी आर्थिक मदद करती है क्योंकि अंतत: ये पैसा मुनाफे के साथ वापस चीन जाता है।

इसके साथ ही चीन अपने जासूसों को भी यहां भेजता है जो फिलीपींस के अंदर चल रही हर एक गतिविधि की जानकारी दूतावास के द्वारा अपनी सरकार को भेजते हैं। इस बात को लेकर फिलीपींस की सरकार चिंतित है। एक रिपोर्ट के अनुसार नई नीति के अनुसार फिलीपींस में सिर्फ 30 लाइसैंसधारी जुआघरों को ही अनुमति मिलेगी। इस समय चीन के 2 लाख 10 हजार नागरिक इन जुआघरों में काम कर रहे हैं और चीनियों ने फिलीपींस के कई बड़े शहरों में बड़ी महत्वपूर्ण जगहों पर अपने जुआघर खोले हैं। जिनसे फिलीपींस को अच्छा खासा राजस्व मिलता है।

इन जुआघरों को बंद करने से फिलीपींस को आर्थिक झटका तो लगेगा, खासकर रीयल एस्टेट बाजार पर इसका बुरा असर होगा। इन जुआघरों के बंद होने से असंख्य सरकारी अधिकारियों जिनमें पुलिस प्रशासन और राजस्व अधिकारी शामिल हैं, को रिश्वत से होने वाली कमाई नहीं होगी। जुआघर उद्योग ने फिलीपींस को पहले के मुकाबले चार गुना मुनाफा देना शुरू किया जो 4.1 अरब अमरीकी डॉलर जितना बड़ा था, और यह मुनाफा फिलीपींस को दुतेर्ते शासन के मात्र 3 वर्षों में ही मिला था।

वहीं वर्ष 2018 में जुआघरों द्वारा ली जाने वाली लाइसैंस फीस से होने वाली कमाई भी 1 करोड़ 40 लाख डॉलर तक जा पहुंची। लाइसैंस फीस में 11 गुना की बढ़ौतरी के बाद यह मुनाफा फिलीपींस के राजस्व में जा रहा था। इसके साथ ही फिलीपींस अपने निकट और दूरवर्ती पड़ोसी सिंगापुर और मकाओ के साथ दुनिया के चंद जुए के अड्डे की राजधानी के रूप में कुख्यात हो गया था।

कोरोना महामारी के दौर में दुोतेर्ते ने फिलीपींस में सबसे लंबा लॉकडाऊन लगाया था बावजूद इसके चीनी जुआघरों ने अपना काम ऑनलाइन शुरू कर दिया जिससे वर्ष 2020 में सरकार ने 12  करोड़ 20 लाख डॉलर का राजस्व कमाया, इसके अगले वर्ष यानी 2021 में लाइसैंस फीस से होने वाली कमाई 8 करोड़ अमरीकी डॉलर तक जा पहुंची थी।

फिलीपींस को चीन से दोस्ती बढ़ाने से पहले फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ाना होगा क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में चीन फिलीपींस के द्वीपों को लेकर भी आक्रामक हुआ है जिसमें स्कारबोरो शॉल द्वीप प्रमुख है।अगर समय के साथ फिलीपींस ने सबक न लिया तो उसका हश्र भी पाकिस्तान, किर्गिजस्तान, श्रीलंका और जिबूती जैसा हो सकता है।


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