‘टेस्टिंग के लिए कोई मानक प्रक्रिया नहीं’

2020-11-23T02:10:36.753

अगस्त माह से लेकर 5वीं बार भारतीयों के कोविड के लिए पॉजिटिव आने के बाद हांगकांग ने इस सप्ताह एयर इंडिया की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यात्री तभी विमान में बैठ सकते हैं यदि उन्होंने टैस्ट करवाया हो तथा इसकी पुष्टि की गई हो कि उनकी रिपोर्ट नैगेटिव प्राप्त हुई है। जो यात्री विमान द्वारा हांगकांग पहुंचे हों उन्हें कोविड नैगेटिव होने का प्रमाण पत्र दिखाना पड़ता है मगर ऐसा असत्य लगता है। मुझे इससे जरा भी आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि टेस्टिंग तथा उड़ान के लिए भारत कोई मानक प्रक्रिया नहीं अपना रहा है। मैं इस बात को अपने निजी अनुभव के तौर पर कह रहा हूं। पिछले कुछ महीनों से मैं निरंतर ही सूरत की यात्रा कर चुका हूं। मैं वहां पर एक केस के सिलसिले में गया जो मेरे खिलाफ दर्ज किया गया था।

पहली बार मैं कोविड के बाद गया तथा मुझे इस दौरान खोजना था कि उड़ान के लिए क्या प्रक्रिया है। मुझे एयरलाइन द्वारा बताया गया कि सूरत म्युनिसिपल कार्पोरेशन से उपलब्ध एक ऐप को डाऊनलोड करना होगा। इसके अलावा एक स्वघोषित फार्म भी भरना होगा। जिसमें यह लिखना था कि कोविड संक्रमण के कोई भी लक्षण नहीं हैं। इस फार्म को हस्ताक्षर कर वहां जमा करवाना होता था। मैंने ऐप के डाऊनलोडिंग की कोशिश की मगर यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर था जिसे मेरे फोन ने डाऊनलोड करने से इंकार कर दिया। 

सूरत में लैंडिंग के बाद मुझे उस ऐप या फिर फार्म को दिखाने के लिए नहीं कहा गया। इसके विपरीत 50 वर्ष की आयु से ऊपर के सभी यात्रियों को एक रैपिड टैस्ट से गुजरने के लिए कहा गया। यात्रियों के फोन नंबर तथा उनके पते ले लिए गए। सूरत को छोडऩे के बाद मुझसे यह पूछा गया कि डाऊनलोड किया गया आरोग्य सेतु ऐप मैं उन्हें दिखाऊं जोकि मेरे पास था ही नहीं और उसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं थी। बेंगलूर में लैंडिंग की वापसी पर मुझे इस तरह का कोई सवाल नहीं किया गया। यह मेरी पहली यात्रा थी। एक माह बाद मुझे फिर से सूरत जाना पड़ा। वहां चैक करने के लिए कोई भी व्यक्ति नहीं था और मैं वहां पर बिना टैस्ट और फार्म के घूमता रहा। तीसरी बार मैंने अक्तूबर में यात्रा की। सूरत एयरपोर्ट पर कुछ लोग थे जो यात्रियों का तापमान ले रहे थे मगर न तो उनके कोई टैस्ट हुए और न ही उनके फोन नंबर या पते लिए गए। इस बार सूरत छोडऩे के दौरान किसी ने भी आरोग्य सेतु के बारे में पूछा ही नहीं। 

एक एयरलाइन ने फेस शील्ड उपलब्ध करवाई मगर सभी यात्रियों को उसके इस्तेमाल के लिए जोर नहीं दिया गया। एक अन्य एयरलाइन ने सभी यात्रियों को मास्क पहनने के लिए बाध्य किया। प्रत्येक बार वहां पर एक अलग ही प्रक्रिया थी और उस प्रक्रिया का अनुसरण नहीं किया गया। यह बेतरतीब  थी और उसमें कोई भी ऐसी गंभीरता वाली बात नहीं थी जिसे कि पूरा विश्व देख रहा है। यही एक कारण है कि क्यों भारत की तुलना में चीन के पास संक्रमण के 100 गुणा से कम मामले हैं। हांगकांग ने लगातार एयर इंडिया पर प्रतिबंध क्यों लगाया है?

टेस्टिंग की समस्या एयर लाइनों तक सीमित नहीं। ब्लूमबर्ग से इस सप्ताह आई एक रिपोर्ट ने कहा है कि टेस्टिंग के कारण ही भारत में कोविड की गिनती में कमी आई है। भारत में आधे से ज्यादा की टैसिं्टग रैपिड प्रतिजन टैस्टों के माध्यम से हुई है। यह टैस्ट तेजी वाले थे जिनमें आधी बार एक गलत नैगेटिव रिजल्ट आता है। इसका मतलब यह है कि 4 लोगों में से एक  का टैस्ट नैगेटिव आ सकता है यदि कोविड से संक्रमण हो तो। 

अगस्त के मध्य में केवल 25 प्रतिशत कुल टैस्ट इसी प्रकार किए गए। मगर अब यह 50 प्रतिशत की दर से हैं।  बिहार जैसे राज्यों में 90 प्रतिशत सभी टैस्ट रैपिड वैरायटी के हैं। यह इस बात की व्याख्या कर सकता है कि भारत में कोविड मामलों की संख्या तेजी से घटी है। अन्य देश जिनमें अमरीका तथा यू.के. शामिल हैं वहां पर पॉजिटिव मामलों की बड़ी संख्या आर.टी.-पी.सी.आर. टैस्टों का इस्तेमाल कर रही है। यह लम्बे तो हैं मगर इन पर आप भरोसा कर सकते हैं। 

देश में अनियमित टैस्ट देखे गए हैं और कोई भी विशेष मानक का इस्तेमाल नहीं हुआ जिस दिन ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी उस दिन बिहार जिसने एक चुनाव के लिए वोट दिया, में केवल 600 मामले ही कोविड के दर्ज हुए जबकि दिल्ली में यह मामले 7000 थे। इस रिपोर्ट ने अनेकों विशेषज्ञों का हवाला दिया है जो भारत में कोविड की गिनती के बारे में उलझन में हैं और इस बात ने मुझे एक बार फिर आश्चर्यचकित नहीं किया है। हमारे पास देश में कोई मानक प्रक्रिया नहीं है जो हमारे जीवन के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम के बारे में बताए। यह स्पष्ट तौर पर उनके लिए है जिन्होंने इस समय यात्रा की है।-आकार पटेल


Pardeep

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