मैन्युफैक्चरिंग हब के लिए लाभप्रद हैं ‘नए श्रम कानून’

2020-10-17T02:26:30.18

यकीनन एक लंबे समय से भारत के लिए वैश्विक उद्योग-कारोबार के बढ़ते मौकों को मुठ्ठियों में करने के मद्देनजर श्रम सुधारों की जरूरत अनुभव की जाती रही थी। ऐसे में अब नए श्रम कानूनों से देश मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की डगर पर आगे बढ़ पाएगा। वस्तुत: कोविड-19 की आपदा भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर को आगे बढ़ाने का अवसर लेकर आई है।

ख्यात वैश्विक कम्पनी ब्लूमबर्ग और अमरीका के विख्यात संगठन एडवोकेसी ग्रुप सहित कई वैश्विक संगठनों द्वारा हाल ही में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के कारण चीन के प्रति नाराजगी से चीन में कार्यरत कई वैश्विक कम्पनियां अपने मैन्युफैक्चरिंग का काम पूरी तरह या आंशिक रूप से चीन से बाहर स्थानांतरित करने की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में खासतौर से जापान, अमरीका, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन की कई कम्पनियां भारत को प्राथमिकता देते हुए दिखाई दे रही हैं। भारत चीन से बाहर निकलती कम्पनियों को आकर्षित करने के लिए इन्हें बिना किसी परेशानी के जमीन मुहैया कराने पर काम कर रहा है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने निवेशकों को आकॢषत करने के लिए ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल को साकार करने के मद्देनजर मोडिफाइड इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन स्कीम (एम.आई.आई.यू.एस.) में बदलाव करने तथा औद्योगिक उत्पादन के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में गैर-उपयोगी खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल करने के संकेत दिए हैं। नि:संदेह चीन से बाहर निकलते निवेश और निर्यात के मौके  भारत की ओर आने की संभावना के कई बुनियादी कारण भी चमकते हुए दिखाई दे रहे हैं। कई आॢथक मापदंडों पर भारत अभी भी चीन से आगे है। भारत दवा निर्माण, रसायन निर्माण और बायोटैक्नोलॉजी के क्षेत्रों में सबसे तेजी से उभरता हुआ देश भी है। भारत की श्रम शक्ति का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि भारत में श्रम लागत चीन की तुलना में सस्ती है। 

यह भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाया है। वाणिज्य-व्यापार की सरलता, कार्पोरेट टैक्स, आयकर, जी.एस.टी. तथा कृषि के क्षेत्र में असाधारण सुधार किए हैं, निर्यात बढ़ाने तथा ब्याज दरों में बदलाव जैसे अनेक क्षेत्रों में रणनीतिक कदम उठाए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित करने का जोरदार काम भी किया है। निवेश और विनिवेश के नियमों में परिवर्तन भी किए गए हैं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार 29 श्रम कानूनों को 4 श्रम संहिताओं में तबदील करने की महत्वाकांक्षी योजना को आकार देने में सफल रही है। 

सरकार ने इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, आक्यूपेशनल सेफ्टी, हैल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020, कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 और वेतन संहिता कोड 2019 के तहत जहां एक ओर मजदूरी सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराने का दायरा काफी बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर श्रम कानूनों की सख्ती कम करने और अनुपालन की जरूरतों को कम करने जैसी व्यवस्थाओं से उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेंगे। इससे रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी। जहां नए श्रम कानूनों के तहत श्रमिक वर्ग के लिए कई लाभ दिखाई दे रहे हैं, वहीं उद्यमियों के कारोबार को आसान बनाने के लिए कई प्रावधान भी लाए गए हैं। इंडस्ट्रियल रिलेशन कानून के तहत सरकार भर्ती और छंटनी को लेकर कम्पनियों को ज्यादा अधिकार देगी। 

अभी 100 से कम कर्मचारियों वाली कम्पनियों को छंटनी या यूनिट बंद करने से पहले सरकार की मंजूरी नहीं लेनी पड़ती थी। अब यह सीमा बढ़ाकर 300 कर्मचारी कर दी गई है। इससे औद्योगिक मुश्किलों के दौर में बड़ी कम्पनियों के लिए कर्मचारियों की छंटनी और प्रतिष्ठान बंद करना आसान होगा। 

नि:संदेह नए श्रम कानूनों से भारत की श्रम संबंधी विभिन्न वैश्विक रैंकिंग में सुधार होगा और भारत को इसकी बहुआयामी उपयोगिता मिलेगी। लेकिन भारत की ओर वैश्विक उद्योग-कारोबार आकर्षित करने के लिए नए श्रम कानूनों के साथ अन्य ऐसे सुधारों की भी जरूरत है, जिससे कारखाने की जमीन, परिवहन और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली की लागत आदि को कम किया जा सके। हम आशा करें कि देश तेजी से आॢथक व औद्योगिक विकास के लिए नए श्रम कानूनों के तहत चार चमकीली श्रम संहिताओं से उत्पादन वृद्धि, निर्यात वृद्धि, रोजगार वृद्धि और विकास दर के ऊंचे लक्ष्यों को प्राप्त करने की डगर पर आगे बढ़ेगा।-डा. जयंतीलाल भंडारी 
 


Pardeep

Related News