नायब सिंह सैनी की पंजाब में बढ़ती स्वीकार्यता
punjabkesari.in Saturday, Mar 28, 2026 - 04:27 AM (IST)
नायब सिंह सैनी को दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री का पद संभाले लगभग 15 महीने हो गए हैं। वित्त विभाग उनके पास होने के कारण, उन्होंने अपना दूसरा बजट सिखी की पहचान ‘केसरी दस्तार’ (पगड़ी) सजाकर पेश किया।सैनी साहब को किसी भी पद पर सेवा मिली हो या जितने भी समय काम करने का अवसर मिला, उन्होंने अपने नर्म स्वभाव और धैर्य से बड़ी से बड़ी समस्या के समय भी कभी आपा नहीं खोया और उसका सर्वमान्य हल निकाला। शांत चित्त और चेहरे पर निखरती मुस्कुराहट भी उन्हें कुदरत द्वारा बख्शा गया एक आशीर्वाद रूपी गुण है, जिससे वे अपने घोर विरोधियों को भी कायल कर लेते हैं। पार्टी ने उन्हें पंजाब, राजस्थान, बिहार, दिल्ली और हिमाचल में जिम्मेदारियां सौंपीं। वे जहां भी गए, पार्टी को अपार सफलता मिली और जनता के बीच उनका कद और भी ऊंचा हो गया।
आज देश के प्रांतीय नेता अक्सर किसी खास समाज या क्षेत्र के होने के कारण ही जाने जाते हैं, जिससे उनकी स्वीकार्यता अपने क्षेत्र तक सीमित रहती है। उदाहरण के तौर पर, जिस तरह दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. साहिब सिंह वर्मा, पंजाब के मुख्यमंत्री स्व. प्रकाश सिंह बादल, हरियाणा के मुख्यमंत्री स्व. चौधरी देवीलाल आदि अपनी सादगी भरी जीवनशैली से लोगों में घुल-मिल जाते थे और रोजाना 3 से 4 सौ फरियादियों की मुश्किलें हल करते थे। यह आम कहा जाता था कि बतौर मुख्यमंत्री, इन नेताओं की सारी थकान लोगों से मिलने पर ही दूर हो जाती थी। इन नेताओं का एक सांझा गुण यह भी था कि सत्ता में होते तो सरकार के मुखिया के तौर पर लोगों से वास्ता रखते और यदि सत्ता में न होते तब भी उसी मिठास और अपनेपन से लोगों के दिलों पर राज करना उनके हिस्से आया।
अब वर्तमान समय में ऐसे ही एक कामयाब मुख्यमंत्री के रूप में नायब ङ्क्षेसह सर्व-समाज में और उत्तर भारत के लोगों के साथ अपनी सांझ बना रहे हैं। जिस दिन भी वह अपने निवास ‘कबीर कुटीर’ चंडीगढ़ में होते हैं, सुबह 8.30 से रात 2.00 बजे तक खिले हुए माथे लोगों से मिलते हैं। संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के समाधान के लिए दिशा-निर्देश देकर अपनी थकान दूर करते हैं और फिर अगले दिन की व्यस्तता के लिए तरोताजा होकर जुट जाते हैं। इस सब का असर यह है कि हरियाणा सहित पंजाब की जनता में उनकी लोकप्रियता का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। पंजाब के मझैल, मलवई, दोआबिए और पुआधी जितने अपनेपन के साथ उन्हें मिलने आते हैं, उतनी ही खुशी के साथ लौटते हैं और उनके चेहरे की प्रसन्नता भी देखने लायक होती है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर पंजाब विधानसभा के 2027 के चुनाव में देखने को मिलेगा क्योंकि पंजाबी इस समय ‘एक मौका दो’ और ‘बदलाव’ के नारों से तंग आ चुके हैं, अब वे फिर एक और बदलाव के मूड में हैं। पंजाबी जनता पारंपरिक राजनीतिक पाॢटयों के नेताओं के भाषणों से ऊब कर नायब सिंह के विकास संबंधी तर्कों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रही है। पंजाब के लोग अब सोच रहे हैं कि क्यों न नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के आधार पर पंजाब में भी प्रयोग कर लिया जाए। केंद्र और राज्य की सरकार मिलकर युवाओं की बेरोजगारी, नशे का छठा दरिया, किसानों का कर्ज, इंडस्ट्री का पलायन, जैसे लुधियाना का हौजरी और साइकिल उद्योग, जालंधर के स्पोर्ट्स सामान के कारखाने, बटाला की कच्चे लोहे की भट्टियां, अमृतसर का सूती व ऊनी कपड़ा उद्योग और सूखे मेवों के व्यापारिक संस्थान, जो पंजाब से बाहर दूसरे राज्यों में स्थापित हो रहे हैं, उन्हें पंजाब में वापस लाने के लिए उनका भरोसा बहाल करना बेहद जरूरी है।
नायब सिंह द्वारा पुआधी बोली में साधारण शब्दों और शुद्ध ग्रामीण भाषा में दिए गए भाषण, जिनमें महिलाओं और बुजुर्गों के लिए पैंशन, जरूरतमंदों को आॢथक सहायता, हर परिवार के लिए छत, खिलाडिय़ों को योग्यता अनुसार सरकारी नौकरियां और सभी फसलों पर एम.एस.पी. जैसी हरियाणा मॉडल के अनुसार मिलने वाली सुविधाओं को पंजाब में भाजपा सरकार आने पर लागू करने का भरोसा दिया गया है। ये घोषणाएं लोगों को तसल्ली दे रही हैं और उनके दिलों को छू रही हैं। उम्मीद की जाती है कि पंजाब अपना 50 साल पुराना ‘नंबर वन’ का रुतबा फिर से हासिल कर लेगा। पंजाब इस समय लाखों करोड़ के कर्ज और कानून-व्यवस्था की भयानक स्थिति से गुजर रहा है। जिस तरह नकली पुलिस मुठभेड़, गैंगस्टर कल्चर, विदेशों में गए युवाओं की वापसी और उनके पुनर्वास जैसी समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं, ये अति संवेदनशील मुद्दे हैं।
पंजाब सीमावर्ती राज्य होने के कारण सीमा पार से आए दिन नई घटनाएं होती रहती हैं और यहां उनके समर्थकों द्वारा भी गतिविधियां की जा रही हैं। उपरोक्त विषयों से परेशान सर्व-समाज के लोगों ने अपने दिलों में अमीरी-गरीबी, भाषा और क्षेत्रवाद की सोच से ऊपर उठकर नायब सिंह सैनी के प्रति प्यार दिखाते हुए, उन्हें इस क्षेत्र के जुझारू युवाओं और बुद्धिजीवी लोगों के सर्व-सांझा नेता के रूप में स्वीकार्यता की मुहर लगाने का काम शुरू कर दिया है।-हरपाल सिंह चीका
