विदेशी तकनीक पर राष्ट्रीय निर्भरता और संप्रभुता पर इसके निहितार्थ
punjabkesari.in Sunday, Nov 01, 2026 - 03:20 AM (IST)
यूक्रेन में स्टारशील्ड टर्मिनलों पर एलन मस्क की स्पेसएक्स द्वारा लगाई गई गति सीमा, प्रत्यक्ष रूप से देखने पर भले ही एक तकनीकी मापदंड लग सकती है लेकिन व्यवहार में यह एक निर्णायक परिणाम वाला कदम था। यूक्रेनी ड्रोन ऑप्रेटर, वे लोग जिन्होंने केवल अपनी चतुराई और स्टारलिंक टर्मिनलों के सहारे रूसी सेना को पीछे धकेलने में महीनों बिताए थे, ने अचानक पाया कि जैसे ही उनकी मशीनों की गति लगभग 160 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक होती, उनका संपर्क टूट जाता था।
एक वरिष्ठ यूक्रेनी कमांडर ने बताया कि इन प्रतिबंधों के कारण उनकी यूनिट को 10 लाख डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ और अभियानों में 3 दिनों की देरी हुई। ‘फ्लिंट’ कॉल साइन से जाने जाने वाले एक कमांडर ने बताया कि गति पकड़ते ही एक ड्रोन का संपर्क ‘पलक झपकते ही’ टूट गया, वह जमीन पर गिर गया और उसका मिशन रद्द हो गया, जिससे उसकी तकनीक दुश्मनों के हाथों में पडऩे का जोखिम पैदा हो गया। एक ही कंपनी, जो एक ही व्यक्ति द्वारा नियंत्रित थी और जिसके फैसले किसी महाशक्ति के रणनीतिक रुख से अभिन्न हो चुके थे, द्वारा समर्थन की इस प्रत्यक्ष वापसी पर फ्लिट ने कहा, ‘‘यह पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।’’ स्टारलिंक गति सीमा एक चेतावनी भरा संकेत थी। इसने दिखा दिया कि एक निजी कंपनी किसी सशस्त्र संघर्ष के बीच एक संप्रभु राज्य की सैन्य क्षमता को कमजोर कर सकती है और उस राज्य के पास सिर्फ याचना करने, तात्कालिक उपाय खोजने और मालिक के मिजाज बदलने का इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
रणनीतिक अभियानों में ऐसी भेद्यता विदेशी कॉरपोरेट घरानों पर राज्य की निर्भरता का परिणाम है। यही भेद्यता सूचना के क्षेत्र में भी मौजूद है, जहां राजनीतिक आंदोलनों को बढ़ाने या दबाने के लिए एल्गोरिदम को हथियार बनाया जा सकता है और आॢथक क्षेत्र में भी, जहां क्लाऊड कम्प्यूटिंग और ए.आई. पर नियंत्रण यह तय कर सकता है कि कौन से देश प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं और कौन से नहीं। विदेशी स्वामित्व वाले क्लाऊड इन्फ्रास्ट्रक्चर, विदेशी उपग्रह समूहों, विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों या विदेशी ए.आई. मॉडलों पर निर्भर रहने वाली सरकारें अपने स्वयं के निर्णय लेने में पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं। किसी ऐसे निजी पक्ष द्वारा, जिसके हित उनके हितों के अनुकूल हो भी सकते हैं और नहीं भी, उनकी गति को धीमा किया जा सकता है, उन्हें पूरी तरह बंद किया जा सकता है, या एल्गोरिदम के जरिए नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
दुनिया के 10 सबसे अमीर लोगों में से 7 अब तकनीकी ओलिगार्क (कुलीन) हैं और उनकी कुल संपत्ति अमरीकी जी.डी.पी. के लगभग 8 प्रतिशत के बराबर है। वे उस डिजिटल बुनियादी ढांचे को नियंत्रित करते हैं, जिस पर लोग, सरकारें और अर्थव्यवस्थाएं निर्भर हैं। किसी राज्य के पूरे तकनीकी नैटवर्क को किसी ऐसे अरबपति द्वारा बाधित किया जा सकता है, जिसकी कोई निजी शिकायत या राजनीतिक प्राथमिकता हो। टैक ओलिगार्क अपने स्वयं के निर्णय या अपनी गृह सरकार के निर्णय से ऊपर किसी भी सत्ता की वैधता को स्वीकार नहीं करता और उसके पास वैश्विक स्तर पर उस निर्णय के अनुसार कार्य करने के लिए बुनियादी ढांचा मौजूद है।
इस संलिप्तता का ऐतिहासिक रिकॉर्ड छिपा हुआ नहीं है। जून, 2009 में, जब विवादित चुनाव परिणामों के बाद तेहरान की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन फैल गए और नेदा आगा-सोल्तान की गोली लगने की घटना राज्य की हिंसा के प्रतीक के रूप में प्रसारित हुई, तब ट्विटर एक मेंटेनैंस की योजना बना रहा था, जिससे सेवा ईरानी दिन के समय बंद हो जाती। अमरीकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने कंपनी से संपर्क किया और इसे पुनॢनर्धारित करने का अनुरोध किया। ट्विटर ने रखरखाव को आधी रात तक के लिए टाल दिया और कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि यह देरी इसलिए की गई क्योंकि ‘ट्विटर वर्तमान में ईरान में एक महत्वपूर्ण संचार साधन के रूप में भूमिका निभा रहा है’।
यह सिलसिला अरब स्प्रिंग के दौरान और अधिक परिष्कार के साथ दोहराया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स को कार्यकत्र्ताओं को उनके उपयोग में प्रशिक्षित करने के लिए तैयार किए गए अमरीकी कार्यक्रमों द्वारा सक्रिय रूप से आकार दिया गया। 2010 में शुरू की गई विदेश विभाग की टैककैंप पहल यूक्रेन जैसे देशों में प्रौद्योगिकीविदों, नागरिक समाज संगठनों और पत्रकारों को एक साथ लाई, जिसने डिजिटल साक्षरता, फैक्ट-चैकिंग और राजनीतिक संगठन के लिए प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग में प्रशिक्षण प्रदान किया। बंगलादेश में, अमरीकी दूतावास ने ‘पत्रकारों को सशक्त बनाना, सत्य सुनिश्चित करना’ विषय पर आयोजित टैककैंप में प्रशिक्षित युवा पत्रकारों को अनुदान दिया, जिससे गलत सूचनाओं से निपटने और मीडिया साक्षरता को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को वित्तपोषित किया गया।
लोकतांत्रिक और सत्तावादी, दोनों प्रकार के संप्रभु शासनों के लिए इसके निहितार्थ गहरे और तात्कालिक हैं। लोकतांत्रिक देशों के लिए यह खतरा अधिक कपटपूर्ण है क्योंकि यह उन्हीं माध्यमों से काम करता है जिन पर लोकतंत्र निर्भर करता है। जब कोई अरबपति सी.ई.ओ. किसी राजनीतिक एजैंडे को पूरा करने के लिए किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का पुनर्गठन कर सकता है, या जब कोई अन्य प्लेटफॉर्म अपने संस्थापक की मनमर्जी पर फैक्ट-चैकिंग कार्यक्रमों को बंद करने और हेट स्पीच से जुड़ी नीतियों में ढील देने की घोषणा कर सकता है, तो नागरिकों द्वारा राजनीतिक निर्णय लेने के लिए जिस सूचना परिवेश पर भरोसा किया जाता है, उसे सार्वजनिक विचार-विमर्श की बजाय निजी प्राथमिकताओं द्वारा आकार दिया जा रहा होता है।
इसका समाधान केवल फ़ायरवॉल लगाने या विनियामक सुरक्षा उपायों तक सीमित नहीं हो सकता, हालांकि दोनों आवश्यक हैं। जो राष्ट्र उपग्रह संचार, क्लाऊड कम्प्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस मॉडल या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए किसी विदेशी निजी कंपनी पर निर्भर करता है, उसने प्रभावी रूप से अपनी संप्रभुता के एक पहलू को एक ऐसे पक्ष को सौंप दिया है, जो केवल अपने शेयरधारकों और अपने संस्थापक के प्रति जवाबदेह है। केवल उन ओलिगार्कों को विनियमित करना ही पर्याप्त नहीं है, जो पहले से ही बुनियादी ढांचे को नियंत्रित करते हैं, संप्रभु राज्यों को बुनियादी संचार नैटवर्क से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और उन आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस प्रणालियों तक, जो आने वाले दशकों में स्वास्थ्य सेवा से लेकर युद्ध तक सब कुछ संचालित करेंगी, स्वयं बुनियादी ढांचे का निर्माण और उसका स्वामित्व हासिल करना होगा। चौथी औद्योगिक क्रांति के उपकरण इतने महत्वपूर्ण हैं कि उन्हें अरबपतियों की मनमर्जी और सनक पर नहीं छोड़ा जा सकता।-मनीष तिवारी (वकील, सांसद एवं पूर्व मंत्री)
