नंदन नीलेकणी से ‘लीक-प्रूफ’ परीक्षा सुधार की उम्मीद!
punjabkesari.in Monday, Aug 03, 2026 - 03:13 AM (IST)
प्रधानमंत्री मोदी की इस बात के लिए तारीफ की जा सकती है कि जब भी देश हित को लेकर किसी समस्या को हल करना होता है, तो पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर उठकर उनके द्वारा काबिल और विद्वान लोगों को जिम्मेदारी दी जाती है। उदाहरण के लिए, पाक के साथ युद्ध के बीच देश का पक्ष विदेशों मे रखने के लिए भेजे गए शशि थरूर, मनीष तिवारी, असदुद्दीन ओवैसी इत्यादि कई नाम लिए जा सकते हैं। यह ठीक उसी तरह है, जैसे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अमृतसर से कई बार सांसद पूर्व विदेश राज्य मंत्री, बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल दिवंगत रघुनंदन लाल भाटिया को चीन से जुड़े मामलों को लेकर जिम्मेदारी दी थी।
और अब प्रधानमंत्री मोदी ने देश में परीक्षा सुधारों को लेकर ‘आधार’ के जनक नंदन नीलेकणी को परीक्षा सुधार दल समिति का जिम्मा सौंपा है। एक बात तो विश्वसनीय लगती है कि नैशनल टैसिं्टग एजैंसी (एन.टी.ए.) के तहत होने वाले बड़े-बड़े एग्जाम्स जैसे नीट और सी.यू.ई.टी. के तगड़े कलह-क्लेश के बाद उच्चस्तरीय पैनल/समिति में नीलेकणी जैसे धुरंधरों को जोडऩे से लीक-प्रूफ टैक-सिस्टम की उम्मीद की जा सकती है।
नंदन नीलेकणी वही विद्वान हैं, जिन्होंने ‘आधार’ का पूरा ढांचा बनाकर 1.4 अरब से अधिक लोगों का बायोमैट्रिक डाटा एक जगह सैट कर दिया और यू.पी.आई. की नींव रखकर गली-नुक्कड़ पर चाय बेचने वाले से लेकर बड़े शोरूम तक का कैशलैस सीन ऑन कर दिया। अब जब यह विद्वान एग्जाम रिफॉम्र्स के मैदान में उतारा गया है, तो पहला बड़ा बदलाव हो सकता है ‘एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन’ और ‘ऑटोमेटेड क्वेश्चन पेपर जनरेशन’ का। मतलब, अब वे दिन गए जब पर्चा छपने प्रैस में जाता था और रास्ते में ही कोई शातिर एजैंट लीक करवा कर छा जाता था। अब पेपर सीधे आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस और क्रिप्टोग्राफी से एग्जाम टाइम से कुछ मिनट पहले ही सैंटर पर डिजिटल अनलॉक होगा, जिससे किसी के भी पर्चा चुराने के सारे प्लान धरे के धरे रह जाएंगे।
दूसरा बड़ा रिफॉर्म है ‘बायोमैट्रिक ऑथैंटिकेशन’ और ‘सैंट्रलाइज्ड सर्वर सिक्योरिटी’। नीलेकणी का ट्रैक रिकॉर्ड गवाही देता है कि वह डुप्लीकेसी और ‘मुन्नाभाई’ टाइप के फर्जीवाड़े का खेल एक झटके में खत्म कर देते हैं। पहले क्या होता था कि सोना की जगह मोना जाकर पेपर में बैठ जाती थी, फोटो मैच नहीं होती थी और सैटिंग से बायोमैट्रिक बाइपास हो जाता था। लेकिन नीलेकणी स्टाइल में अब आधार आधारित 2-फैक्टर बायोमैट्रिक (आइरिस और फिंगरप्रिंट) और ए.आई.-संचालित फेस-रिकग्निशन तकनीक सीधे एग्जाम हॉल के गेट पर लग सकती है।
जैसे ही कोई फर्जी बंदा हॉल में घुसेगा, सिस्टम तुरंत लाल बत्ती जला देगा और पुलिस की गाड़ी बाहर ही खड़ी मिलेगी। एग्जाम सैंटरों में जो सी.सी.टी.वी. फुटेज और ओ.एम.आर. सीट की चैकिंग का ढीला-ढाला काम महीनों तक लटकता था, उसे नीलेकणी का ‘ओपन डाटा डिजिटल आॢकटैक्चर’ (जैसे यू.पी.आई. और एकाऊंट एग्रीगेटर सिस्टम) कुछ ही दिनों में पूरा कर देगा। यानी सारा काम 100 प्रतिशत ट्रांसपेरैंट होगा, जिसमें किसी दलाल या बाबू को हाथ मारने की रत्ती भर भी जगह नहीं मिलेगी।
‘एडैप्टिव टैसिं्टग’ और ‘लो-बैंडविड्थ क्लाऊड इंफ्रास्ट्रक्चर’ दूर-दराज के गांवों और छोटे शहरों के छात्रों की मुश्किलों को आसान कर देगा। अक्सर क्या होता है कि कम्प्यूटर बेस्ड टैस्ट (सी.बी.टी.) में गांव-देहात के सैंटरों पर सर्वर डाऊन हो जाता है या स्क्रीन हैंग हो जाती है और गरीब बच्चे का पूरा साल बर्बाद हो जाता है।
नीलेकणी की पूर्व कार्य शैली को देखें तो उनका पूरा फोकस हमेशा ‘स्केलेबिलिटी’ पर रहता है, यानी ऐसा सिस्टम बनाओ, जो करोड़ों यूजर्स का लोड एक साथ बिना क्रैश हुए झेल सके। यह बिल्कुल डिजिटल इंडिया और यू.पी.आई. की तरह है, जो हर सैकेंड लाखों ट्रांजैक्शन बिना अटके निपटाता है। तो उम्मीद यह है कि वह एक ऐसा ‘डिस्ट्रिब्यूटेड टैसिं्टग नैटवर्क’ खड़ा करेंगे, जहां इंटरनैट चले न चले, लोकल सर्वर पर छात्र बिना किसी रुकावट के टैस्ट दे सकेगा और और डाटा अपने आप सिंक हो जाएगा।
साथ ही, बार-बार पेपर लीक की वजह से लाखों छात्रों का जो भरोसा हिला है, उसे वापस लाने के लिए वह एक ‘डिजिटल ट्रिगर एंड ऑडिट ट्रेल’ लागू करेंगे, जिससे पेपर का एक-एक क्लिक और एक्सैस लॉग ट्रैक होगा, कि किस टाइम पर किस बंदे ने डाटा को छुआ। कुल मिलाकर नीलेकणी के आने से एग्जाम सिस्टम का काफी ‘कचरा’ साफ होने की उम्मीदें हैं ताकि हमारे छात्रों को उनका हक मिलता रहे।-डा. वरिंदर भाटिया
