‘मोदी के कोविड-19 के फैसले ने उन्हें सबसे लोकप्रिय नेता बनाया’

2021-01-06T04:48:17.72

अमरीका स्थित राजनीतिक रेटिंग फर्म ‘मार्निंग कंसल्टिंग’ ने पिछले हफ्ते कोविड-19 महामारी के दौरान कुशल संचालन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता माना। हालांकि यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण होना चाहिए। मोदी ने जो दुनिया भर में इस तरह की ऊर्जाओं को आकर्षित करने के लिए किया हमें उसके बारे में अपनी स्मृति को ताजा करने की आवश्यकता है। 

एक ऐसे परिवार की कल्पना करें जो जीवनशैली की वस्तुओं को खरीदने के लिए दिन-प्रतिदिन आधार पर पैसे की बचत कर रहा है मगर अचानक ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है जहां परिवार का एक सदस्य गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है। परिवार का मुखिया अपने बीमार सदस्य को फिर से स्वस्थ पाने के लिए सभी प्रमुख आॢथक निर्णयों को स्थगित करते हुए पूरे पैसे खर्च करने का फैसला करता है। परिवार में ऐसा कोई भी नहीं होता  जो अपने सपनों का निर्माण करने के लिए तैयार नहीं होता। 

कुछ ऐसा ही पिछली फरवरी में भारत में कोविड-19 के फूटने के दौरान घटा। उस समय देश विश्व भर में आॢथक मंदी के बावजूद एक बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए उचित प्रदर्शन कर रहा था। देश को लॉकडाऊन के तहत रखने  के फैसले का मतलब था कि आर्थिक गतिविधियां आभासी तौर पर लगभग बंद हो जाएंगी। मगर निर्णय लेना पड़ा और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे नेता जोकि एक परिवार के मुखिया के तौर पर नजर आए, ने सबसे पहले जीवन बचाने का निर्णय लिया।

किसी को भी नहीं पता था कि हालात से कैसे निपटा जाएगा। न ही कोई जानता था कि कैसे यह नया वायरस अपने पैर पसारेगा और कैसे इसे नियंत्रण में लाया जा सकेगा। वैश्विक स्वास्थ्य इकाईयों तथा विशेषज्ञों का इस हालात से निपटने के लिए अलग-अलग विचार था।

एकमात्र उचित तरीका संक्रमित व्यक्ति को ट्रैक करना और उसे तब तक अलग करना था जब तक वह पूरा स्वस्थ नहीं हो जाता। लेकिन यह जनसंख्या के घनत्व और चीन सहित विभिन्न प्रभावित देशों से भारत में आने वाले लोगों की संख्या के कारण एक असंभव कार्य था। सौभाग्यवश भारत में हमारे पास नरेन्द्र मोदी थे जो आपदा प्रबंधन में एक विशेषज्ञ थे। उन्होंने भूकंप के बाद गुजरात में भुज का दोबारा निर्माण करने की कोशिश में सबसे बड़ा राहत कार्य किया। भाजपा के संगठनात्मक व्यक्ति के रूप में पहला कार्य उन्होंने 2001 में किया। फिर मुख्यमंत्री के तौर पर 2002 में जब तक कि वह 2014 में प्रधानमंत्री नहीं बने। 

विशेषज्ञों के फीडबैक के अलावा उनके अनुभव तथा वृत्ति ने संकेत दिया कि मानवीय अस्तित्व के लिए कुछ गंभीर खतरा है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोविड-19 को बाद में एक महामारी घोषित किया गया। क्या कोई कल्पना कर सकता है कि सभ्यताएं कैसे ढह गई होंगी और अतीत में विलुप्त हो गई होंगी। निश्चित तौर पर भारत इसके लिए तैयार नहीं था। देश में पी.पी.ई. किटों, मास्क, सैनिटाइजर, दवाइयों तथा उन सब चीजों की किल्लत थी जो इस हालात से निपटने के लिए अनिवार्य थी। इन सबसे ऊपर देश में डाक्टरों तथा पैरामैडीकल स्टाफ की भी बहुत ज्यादा कमी थी। 

इस संदर्भ में 24 मार्च 2020 को  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय टैलीविजन पर आए और 21 दिनों के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाऊन की घोषणा की। लॉकडाऊन से पहले अमरीकी स्वास्थ्य विशेषज्ञ डाक्टर रामानंद लक्ष्मीनारायण ने चेतावनी दी थी कि सबसे खराब स्थिति में भारत की लगभग 60 प्रतिशत आबादी या 80 करोड़ लोग कोविड-19 से संक्रमित होंगे मगर लॉकडाऊन को देखते हुए डाक्टर रामानंद ने इस आंकड़े को लगभग 20 प्रतिशत (लगभग 30 करोड़) तक कम कर दिया। देश में यह एक इतिहास है कि आखिर लॉकडाऊन को कैसे बढ़ाया गया और इसका कैसे उल्लंघन हुआ। घटनाओं से विवाद भी जुड़े हैं। मगर ले-देकर देश ने बहुत समझदारी से व्यवहार किया। अर्थव्यवस्था सिकुड़ गई, लोगों ने नौकरियां खो दीं और जीवन पूरी तरह से बिगड़ गया लेकिन जीवन बच गया। 

तुलना एक स्पष्ट चित्र पेश करेगा। जैसा कि विश्व भर में कोविड से 2 जनवरी 2021 को 8.2 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके थे। इनमें से 18 लाख लोग इस बीमारी के चलते मृत्यु को प्राप्त हुए। इस बीच दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश जिसमें एक सबसे अच्छी स्वास्थ्य प्रणाली है ने देखा कि 32 करोड़ की आबादी में से 2 करोड़ कोविड से संक्रमित हो जाते हैं और करीब 3.5 लाख लोग मर जाते हैं। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इसका श्रेय देना चाहिए कि एक परिवार में एक वरिष्ठ व्यक्ति की तरह, उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को बचाने का निर्णय लिया। हम इस आशा के साथ 2021 में प्रवेश कर चुके हैं कि वैक्सीन जल्द ही जनसंख्या के महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाले दर्जों की देखभाल के लिए उपलब्ध होगी,जब तक कि कोई हादसा न हो जाए। हम बीमारी को रोकने में सफल रहे हैं। पूरा देश इसके लिए प्रशंसा का पात्र है। राष्ट्र को एकजुट होकर ईश्वर का शुक्रिया अदा करना चाहिए ताकि हमें पता चले कि क्या करना है।(लेखक भाजपा के मीडिया रिलेशन विभाग के संयोजक हैं)-सुदेश वर्मा 


Content Writer

Pardeep

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