ममता की नजर अब दिल्ली की गद्दी पर

punjabkesari.in Monday, Nov 29, 2021 - 04:01 AM (IST)

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में खेला कर दिया और अब उनकी तैयारी दिल्ली में खेला करने की है। शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले ममता बनर्जी अपने 4 दिन के दिल्ली दौरे पर आईं। पश्चिम बंगाल में उन्होंने जबरदस्त राजनीतिक लड़ाई लड़ी, अब वह ‘2024-मिशन दिल्ली’ में लगी हैं। विपक्ष को एकजुट करने के अलावा वह टी.एम.सी. त्रिपुरा के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेर रही हैं। सी.एम. बनने के बाद ममता बनर्जी का यह दूसरा दिल्ली दौरा था। 

वास्तव में ममता बनर्जी के खेला होबे पार्ट-2 में इस बार उनके निशाने पर भाजपा नहीं बल्कि कांग्रेस है। सिर्फ 100 घंटे के लिए ममता बनर्जी दिल्ली क्या आईं, उत्तर से लेकर पूर्वोत्तर तक कांग्रेस के किले हिल गए। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने हरियाणा और बिहार में कांग्रेस को जख्मी किया और जाते-जाते मेघालय में तो कांग्रेस का किला पूरी तरह ढहा दिया क्योंकि उसके 17 में से 12 विधायकों ने ममता का दामन थाम लिया। मेघालय कांग्रेस पर ममता की स्ट्राइक का नतीजा यह हुआ कि मेघालय में कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दल से तीसरे नंबर की पार्टी बन गई और तृणमूल कांग्रेस मुख्य विपक्ष बन गई है। 

ममता के इस ऑप्रेशन से कांग्रेस बौखलाई हुई है। कभी वह ममता पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगा रही है तो कभी भाजपा से सांठगांठ का। असल में ममता विपक्ष का चेहरा बनना चाहती हैं और कांग्रेस से ज्यादा मजबूत होने पर ही वह ऐसा कर सकती हैं। बड़े चेहरों को तोडऩे से ही उनकी देश भर में पहुंच बढ़ेगी और इसीलिए यह ममता का एक गेम प्लान है। तृणमूल में शामिल हो रहे कांग्रेस के नेता अब यह भी सलाह दे रहे हैं कि कांग्रेस को तृणमूल का नेतृत्व स्वीकार कर उसका साथ देना चाहिए। 

ममता के ऑप्रेशन से केवल कांग्रेस का घर ही नहीं टूट रहा, बल्कि विपक्ष की एकता भी बिखरती नजर आ रही है। ममता के सपने और उनकी चाल का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वह 4 दिन के दिल्ली दौरे पर आईं लेकिन सोनिया गांधी से नहीं मिलीं और जब इस बारे में उनसे सवाल पूछा गया तो उनका जवाब भी बहुत तल्ख अंदाज में था। 

ममता ने जिन दिग्गज विपक्षी नेताओं को टी.एम.सी. का सिपाही बनाया, उनमें पहला नाम है कांग्रेस नेता कीॢत आजाद का। कांग्रेस के ही अशोक तंवर भी अब ममता के खेमे में पहुंच गए हैं। इसके अलावा ज.द. (यू) के सीनियर नेता पवन वर्मा ने भी तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया है। ममता ने जावेद अख्तर और पूर्व भाजपा नेता सुधींद्र कुलकर्णी से भी मुलाकात की। 

ममता अच्छी तरह से जानती हैं कि यदि पार्टी का विस्तार करना है तो इसके लिए उनको नए और अनुभवी चेहरों की जरूरत होगी। ममता अपना कद बढ़ाने के लिए जिस तरह कदम बढ़ा रही हैं, उससे साफ है कि वह 4-5 राज्यों में अपनी जमीन तैयार करने में जुट गई हैं। ममता ने असम की रहने वाली सुष्मिता देव को टी.एम.सी. में शामिल कर पूर्वोत्तर राज्यों में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश की। 

इसी तरह गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री फ्लेरियो से गठबंधन करके, उनके जरिए निशाने पर गोवा और केरल को लिया। ललितेश त्रिपाठी के जरिए वह उत्तर प्रदेश में जगह बनाना चाहती हैं। कीर्ति आजाद के जरिए ममता ने बिहार में पैर फैलाने का दावा किया है और पवन वर्मा के जरिए ममता के निशाने पर बिहार है। अशोक तंवर के साथ ममता हरियाणा में जमीन तलाश रही हैं। बहरहाल ममता के इस प्लान से कांग्रेस को जबरदस्त नुक्सान हो रहा है और कांग्रेस इससे बेहद खफा है। 

ममता बनर्जी मिशन 2024 को कई क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं से मिलकर अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। इसी कड़ी में एन.सी.पी. प्रमुख शरद पवार के घर पर पिछले कुछ महीनों में कई बैठकें भी हो चुकी हैं, जिनमें शरद पवार, यशवंत सिन्हा समेत देश की तमाम पाॢटयों के छोटे-बड़े नेता शामिल हो चुके हैं। दरअसल विपक्षी नेता कांग्रेस के मुकाबले ममता के साथ खड़े होने को ज्यादा फायदेमंद मान रहे हैं। 

देश में राजनीति इस वक्त चरम पर है। कुछ ही महीनों बाद 5 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, जिनमें से उत्तर प्रदेश और पंजाब पर पूरे देश की नजर है। इन चुनावों से ठीक पहले अब बड़ी हलचल शुरू हो गई है। जहां एक तरफ कांग्रेस भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही तो वहीं कांग्रेस का पत्ता साफ करने के लिए अब ममता बनर्जी मैदान में कूद गई हैं। राजनीति में रुचि रखने वाले लोग हैरान हैं कि आखिर कांग्रेस से करीबी के बावजूद ममता बनर्जी क्यों कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में अब भाजपा से भी आगे निकल गई हैं? 

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ममता बनर्जी कांग्रेस के लिए भाजपा से ज्यादा बड़ा खतरा बनती जा रही हैं? प्रशांत किशोर कई बार राहुल गांधी और कांग्रेस की आलोचना भी कर चुके हैं और कह चुके हैं कि इस स्थिति में पार्टी नरेंद्र मोदी से टक्कर नहीं ले सकती। हाल ही में ममता और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात भी हुई। कांग्रेस का आरोप है कि ममता भाजपा की मदद कर रही हैं। 

हाल ही में कांग्रेस नेता और सांसद अधीर रंजन चौधरी ने ममता को मोदी का मिडल मैन तक बता दिया था। इसके बाद से ही अटकलें लगनी शुरू हो गई थीं कि कांग्रेस और टी.एम.सी. के रिश्तों में खटास आ गई है। हालांकि ममता भाजपा सरकार के खिलाफ एक मजबूत और एकजुट विपक्ष बनाने की तैयारी कर रही हैं। बंगाल में चुनाव जीतने के बाद ममता बनर्जी ने विपक्ष के नेताओं की एक बैठक भी बुलाई थी।-रंजना मिश्रा


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