दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी में ‘सरदारी’ को लेकर ‘खेला’

2021-09-10T03:54:18.67

‘आस्था’ की पहरेदारी को लेकर हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के आम चुनाव के बाद सत्ता किसके पास रहेगी, इस बारे में जोड़-तोड़ शुरू हो गया है। शिरोमणि अकाली दल (बादल) के 27 सदस्य जीते हैं लेकिन इसके बावजूद विरोधी दल किसी भी तरीके से कमेटी पर काबिज होने के लिए सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं।

वीरवार को दो सीटों पर हुए को-आप्शन चुनाव के दौरान सत्ता की रस्साकशी साफ नजर आई। दो सीटों के लिए हुए चुनाव के लिए बादल दल ने दो उम्मीदवार उतारे थे लेकिन एक सीट ही जीतने पर कामयाब हुआ। संयुक्त विपक्ष की तरफ से खड़े शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना को सबसे ज्यादा 18 वोट मिले हैं, जबकि अकाली दल बादल के दोनों उम्मीदवारों को क्रमश: 15 और 12 वोट मिले हैं। 

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर बादल दल के सदस्य भूपिन्द्र सिंह भुल्लर का वोट अलग लिफाफे में सील हो गया है। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को फैसला करेगी। एक-एक सीट के लिए हो रहे शह और मात के खेल में विपक्ष बादल दल से एक सीट छीनने में कामयाब रहा है। दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष मनजिंद्र सिंह सिरसा और अकाली दल के प्रदेश अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने पूरी ताकत लगा रखी थी कि किसी तरीके से विपक्ष से 4-5 सदस्यों को तोड़कर दूसरी सीट (को-आप्शन) भी जीती जाए लेकिन विपक्ष अपने सदस्यों को एकजुट रखने में कामयाब रहा। 

पर्दे के पीछे इसमें सबसे बड़ी भूमिका सिरसा को हराने वाले हरविंद्र सिंह सरना और जागो पार्टी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जी.के. ने निभाई, जिस वजह से क्रास वोटिंग होने से बच गई। हालांकि अकाली दल बादल के सदस्यों ने क्रास वोटिंग की है। 16 सदस्यों को विक्रम सिंह को वोट डालने का आदेश दिया गया था लेकिन विक्रम को मात्र 15 वोट ही प्राप्त हुए। लिहाजा, विक्रम को पडऩे वाला एक वोट जसविंद्र सिंह जौली को पड़ गया। इस वजह से दावा किया जा रहा है कि लिफाफे में बंद भुल्लर का वोट भी जौली का है। अगर ऐसा हुआ तो जौली का आंकड़ा 13 हो जाएगा। इसका असर 25 सितम्बर  को प्रस्तावित होने वाले जनरल हाऊस के दौरान कार्यकारिणी चुनाव पर भी पड़ेगा। 

विपक्ष कोई मौका नहीं चूकना चाहता : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य बनने का मतलब गुुरु घर में सेवा करना माना जाता है, लेकिन जिस प्रकार छोटे-छोटे मसलों पर कानूनी वाद-विवाद पैदा किए जा रहे हैं, उससे लगता है सामान्य बहुमत पर खड़ी मौजूदा कमेटी को फिर से बनने से रोकने के लिए विपक्ष कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहता। गुरुद्वारा कमेटी चुनाव में पैदा हुए विवादों के कारण लगभग 30 याचिकाएं विभिन्न अदालतों में दाखिल हो गई हैं। अगर इन याचिकाओं में 5-7 सदस्यों की सदस्यता भी चली गई तो बहुमत का सारा गेम पलट जाएगा। इसलिए कानूनी मोर्चे पर हो रही इस लड़ाई को जो जीतेगा उसी का अगला अध्यक्ष बनने की संभावना है। 

वैसे भी मनजिंद्र सिंह सिरसा की सदस्यता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दल जागो पार्टी के सदस्य सतनाम सिंह खीवा ने शिरोमणि कमेटी के इस पत्र पर डायरैक्टर गुरुद्वारा चुनाव को ऐतराज जमा कराया है, साथ ही दावा किया है कि सिरसा को नामजद करने का पत्र गलत है और कार्यकारिणी की हुई मीटिंग में सिरसा को सदस्य बनाने का कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। यदि डायरैक्टर गुरुद्वारा सिरसा को सदस्य के रूप में प्रमाण पत्र दे देता है तो संभवत: जागो पार्टी उसे अदालत में चुनौती देगी। 

दोनों सरना भाई बने कमेटी के सदस्य, मिली ताकत : वर्ष 2013 में दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी की सत्ता से बाहर हुए शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना 8 सालों बाद को-आप्शन के जरिए कमेटी सदस्य बन गए हैं, जबकि उनके भाई एवं पार्टी के महासचिव हरविंद्र सिंह सरना ने 25 अगस्त को हुए आम चुनाव में पंजाबी बाग सीट से ऐतिहासिक विजय प्राप्त की थी। कई साल बाद दोनों भाई एक साथ सदस्य बने हैं। इस सियासी विजय से पार्टी को ताकत मिली है और आगे का रास्ता भी मजबूत होने की संभावना है। सरना पार्टी की अपनी कुल सीटें गठबंधन को मिलाकर अब 19 तक पहुंच गई हैं। 

4 तख्तों के जत्थेदार भी होते हैं नामित सदस्य : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में 4 तख्तों के जत्थेदार भी आधिकारिक तौर पर कमेटी सदस्य के रूप में नामित होते हैं। इसमें तख्त श्री अकाल तख्त साहिब अमृतसर, तख्त श्री हरमंदिर साहिब पटना साहिब, तख्त श्री हजूर साहिब, तख्त श्री केशगढ़ साहिब (आनंदपुर साहिब) दिल्ली कमेटी के पदेन सदस्य होते हैं लेकिन इन्हें वोटिंग का अधिकार नहीं होता। जबकि तख्त श्री दमदमा साहिब साबो की तलवंडी के जत्थेदार का नाम 5वें तख्त के रूप में अभी तक दिल्ली सरकार के कानूनी विभाग द्वारा नहीं जोड़ा गया है। हालांकि, दिल्ली विधानसभा एवं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने श्री दमदमा साहिब को 5वें तख्त के रूप में शामिल करने की मंजूरी दे दी है। 

और अंत में... दिल्ली के लाखों सिखों की नुमाइंदगी करने वाली सिख गुरुद्वारा कमेटी की कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसको लेकर ‘खेला’ शुरू हो गया है। पक्ष और विपक्ष के बीच तो सत्ता को कब्जाने के लिए शीत युद्ध चल ही रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्तमान अध्यक्ष मनजिंद्र सिंह सिरसा के आम चुनाव हारने के बाद उनकी पार्टी के अंदर भी विरोध के स्वर शुरू हो गए हंै। अकाली दल के भीतर भी सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। जीते हुए सदस्यों के बीच आपस में चर्चा छिड़ गई है कि जब वह चुनाव हार ही गए हैं तो जीते हुए सदस्यों को मौका मिलना चाहिए। हालांकि, इसके फैसले का 25 सितम्बर को प्रस्तावित जनरल हाऊस और कार्यकारिणी बैठक में पता चलेगा, जब पार्टी हाईकमान का गुप्त लिफाफा खुलेगा। तब तक खींचतान जारी रहने की संभावना पूरी है।-दिल्ली की सिख सियासत 
सुनील पांडेय
 


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Content Writer

Pardeep

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