अपना शहर स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी हमारी!

punjabkesari.in Monday, Aug 17, 2026 - 04:04 AM (IST)

बरसात शुरू होते ही शहरों की गलियों-मोहल्लों में पानी जमा होना शुरू हो जाता है। मौसम विभाग के मूसलाधार बारिश के सही अनुमान के बावजूद देश के हर शहर में बरसात के गंदे पानी के तालाबों के बीच नारकीय जिंदगी जीने को मजबूर क्यों हो जाते हैं? हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। लेकिन इसकी जिम्मेदारी क्या केवल सरकार की है, नागरिकों की नहीं? क्या कारण हैं कि हर साल मानसून में देश के कई शहर नदी नालों में तबदील हो जाते हैं? 

सरकार की बात करें तो इसके 3 बड़े कारण हैं। पहला, बिना योजना के बसी कॉलोनियां और प्रशासन द्वारा आंख मूंदकर दी गई अनुमति। सड़क, नाली, सीवर, कुछ भी सही न हो तो भी कॉलोनी पास। दूसरा, नालियों और सीवर में ठोस कचरा जमा होना, क्योंकि स्थानीय निकाय अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाते। तीसरा और सबसे खतरनाक, हर दो-तीन साल में सड़कों की ऊंचाई बढ़ा देना। जिससे आसपास के मकानों का तल हमेशा नीचे होता जाता है और पानी भराव की मुख्य वजह बन जाता है। पहले 2 कारणों पर तो हर साल मीडिया में शोर मचता रहता है लेकिन सड़क का बार-बार ऊंचा होना कोई नहीं पूछता। क्यों। क्योंकि जितनी मोटी सड़क बिछाई जाएगी, ठेकेदार और इंजीनियरों का मुनाफा उतना ही बढ़ेगा। पहली बार अच्छी गुणवत्ता की सड़क बना दी जाए तो बार-बार बनाने की जरूरत ही न पड़े। जहां थोड़े-बहुत पैचवर्क से काम चल सकता है, वहां भी पूरी नई सड़क डाल दी जाती है, बिना इस बात का लिहाज किए कि सड़क के दोनों तरफ रहने वाले आम लोगों की इतनी हैसियत नहीं होती कि वे हर 2 साल में अपने घर का फर्श ऊंचा करा लें।

हमारे इंजीनियरों की अक्ल पर क्या पत्थर पड़ गए हैं? या समझते तो हैं, लेकिन रिश्वत की हवस में करोड़ों लोगों की जिंदगी में हर 2-4 साल बाद मुसीबत खड़ी कर देते हैं।लेकिन सिर्फ सरकार को कोसना काफी नहीं। हमें खुद को भी आईना दिखाना होगा। अवैध निर्माण, मानकों से ज्यादा मंजिलें, नालियों में कचरा फैंकना, ये सब हम खुद करते हैं। ग्रामीण जीवन में जो सामूहिक जिम्मेदारी की भावना थी, शहर आकर हम भूल गए। कहने को शहरी हैं लेकिन व्यवहार जंगली जैसा। आजकल सोशल मीडिया पर कुछ रील्स वायरल हो रही हैं। उनमें आम नागरिक दिखते हैं जो हाथ में फावड़ा-झाड़ू लेकर सड़क पर खड़े हैं। ये लोग जल भराव वाली सड़कों पर नालियों से प्लास्टिक, पॉलीथीन, गंदगी निकालते हुए देखे जाते हैं। कोई सरकारी विभाग का इंतजार नहीं कर रहा। खुद अपना इलाका साफ कर रहे हैं, ताकि बारिश का पानी रुक न जाए। ये छोटी-छोटी कोशिशें ही असल बदलाव ला सकती हैं। जरूरत है तो संगठित होने की। हम संबंधित अधिकारियों से सवाल पूछें। उनसे पूछें कि सड़क का स्तर हर 2 साल में क्यों बढ़ाया जाता है। और अगर वे जवाब न दे पाएं तो दबाव बनाएं कि सड़क को उसके मूल स्तर पर लाया जाए।

सोचिए, अगर हर मोहल्ले में सिर्फ 10-12 लोग नियमित रूप से नालियों की सफाई करें या सरकारी विभाग पर साफ-सफाई का दबाव बनाएं तो क्या होगा? पानी का बहाव खुला रहेगा, मच्छर कम पैदा होंगे, बीमारियां घटेंगी और सबसे बड़ा फायदा, घरों  में पानी घुसने का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा। वायरल रील्स में जो लोग दिख रहे हैं, उन्होंने सिर्फ यह तय किया कि इंतजार करने से बेहतर है खुद काम करना। यही रवैया हमें अपनाना होगा। एक और महत्वपूर्ण बात, सड़क की ऊंचाई बढ़ाने की समस्या सिर्फ पानी भराव तक सीमित नहीं है। जब सड़क ऊंची हो जाती है तो घर के दरवाजे-खिड़कियां सड़क के स्तर से नीचे आ जाते हैं। इससे घर में नमी बढ़ती है, दीवारें गीली रहती हैं, बिजली के तार खतरे में पड़ जाते हैं और बच्चों-बुजुर्गों के लिए घर से निकलना भी मुश्किल हो जाता है। कई परिवारों को मजबूरन घर का फर्श ऊंचा करवाना पड़ता है, जिसमें लाखों रुपए खर्च हो जाते हैं। यह खर्च आम आदमी की जेब पर भारी पड़ता है, जबकि जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारी मजे से मुनाफा कमाते रहते हैं।

सोशल मीडिया आज सबसे ताकतवर हथियार है। अपने इलाके की सड़क की ऊंचाई का फोटो-वीडियो लें, पुराने और नए स्तर की तुलना दिखाएं और पोस्ट करें। स्थानीय विधायक, पार्षद और नगर निगम के अधिकारियों को टैग करें। जब सैंकड़ों लोग एक साथ आवाज उठाएंगे तो प्रशासन को जवाब देना ही पड़ेगा। साथ ही, मोहल्ला स्तर पर सफाई अभियान शुरू करें। रविवार की सुबह 2 घंटे निकाल कर नालियां साफ करना कोई बड़ी बात नहीं। यह छोटी सी मेहनत साल भर की परेशानी बचा सकती है। याद रखें, सरकार और प्रशासन तभी जागते हैं जब नागरिक जाग जाते हैं। अगर हम सिर्फ कोसते रहे और खुद कुछ न किया, तो अगले साल फिर वही पानी, वही गंदगी और वही शिकायतें होंगी। लेकिन अगर हमने उन वायरल रील्स वाले नागरिकों की तरह जिम्मेदारी संभाली, तो बदलाव जरूर आएगा। नाली साफ करना शर्म की बात नहीं, बल्कि गर्व की बात है। क्योंकि यही असली देशभक्ति है, अपने आसपास को साफ और सुरक्षित रखना। समय आ गया है कि हम सिर्फ शिकायत न करें, बल्कि समाधान का हिस्सा बनें।-विनीत नारायण 
 


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