छात्रों को वित्तीय प्रबंधन की शिक्षा देना जरूरी

punjabkesari.in Sunday, Sep 27, 2026 - 04:18 AM (IST)

भारतीय छात्रों को वित्तीय साक्षरता की शिक्षा देना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। जब छात्र कम उम्र में पैसों का प्रबंधन सीखते हैं, तो वे भविष्य में बेहतर वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम बनते हैं। वित्तीय साक्षरता और वित्तीय प्रबंधन सीखने से कॉलेज ही नहीं, बल्कि सीनियर स्कूल छात्र भी बजट बनाना, बचत करना और फिजूलखर्ची से बचना सीखते हैं। इससे भविष्य की सुरक्षा के लिए लोन (जैसे एजुकेशन लोन), क्रैडिट कार्ड और कर्ज के जाल से बचने की समझ विकसित होती है। इससे निवेश की समझ भी बदलती है। छात्रों को वित्त प्रबंधन सिखाना अब अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्हें बचत, बजट, निवेश और जिम्मेदार खर्च से अवगत कराकर, हम उन्हें महत्वपूर्ण जीवन कौशल प्रदान करते हैं।

पूरे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में वित्तीय साक्षरता की शिक्षा पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। कॉलेज से कॉर्पोरेट जीवन में कदम रखना या अपना स्टार्ट-अप शुरू करना एक युवा व्यक्ति के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक है। पहली कमाई करना या मिलना उत्साह, स्वतंत्रता और नई जिम्मेदारियां लेकर आता है। हालांकि, इसके साथ ही कुछ व्यावहारिक सवाल भी उठते हैं। कितना पैसा बचाना चाहिए? खर्चों की योजना कैसे बनानी चाहिए? क्या बीमा आवश्यक है? खर्च करना, बचत करना और निवेश करना, इन तीनों में क्या अंतर है? क्या हमारे विश्वविद्यालय इस शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयत्न कर रहे हैं?

वित्तीय साक्षरता कोई विशेष कौशल नहीं है, जो केवल वित्त पेशेवरों के लिए ही हो। यह सभी के लिए जरूरी है। यह एक व्यावहारिक जीवन कौशल है, जो व्यक्ति को कमाई, खर्च, बचत, उधार, सुरक्षा और निवेश के बारे में सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करता है। ये ऐसे जीवन कौशल हैं, जिनकी आवश्यकता प्रत्येक छात्र को होती है, चाहे उसका शैक्षणिक विषय या करियर पथ कुछ भी हो।

आधुनिक अर्थव्यवस्था तेजी से डिजिटल होती जा रही है। आज के छात्र यू.पी.आई., ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल वॉलेट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का सक्रिय रूप से उपयोग करते हैं। प्रौद्योगिकी ने वित्तीय लेन-देन को सुविधाजनक तो बना दिया लेकिन साथ ही साइबर धोखाधड़ी, अविवेकी खर्च और वित्तीय संबंधी गलत सूचनाओं के खतरे को भी बढ़ा दिया है। इसलिए, वित्तीय जागरूकता न केवल धन कमाने के लिए, बल्कि वित्तीय सुरक्षा के लिए भी आवश्यक हो गई है।

डिग्री से छात्र को रोजगार पाने में मदद मिल सकती है लेकिन वित्तीय साक्षरता उन्हें कार्यस्थल से परे जीवन में आगे बढऩे में सहायक होती है। जैसे-जैसे उच्च शिक्षा बदलती दुनिया की मांगों को पूरा करने के लिए विकसित हो रही है, वित्तीय साक्षरता को न केवल वित्तीय ज्ञान के रूप में, बल्कि प्रत्येक छात्र के लिए एक मूलभूत जीवन कौशल के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे सभी छात्रों को वित्तीय साक्षरता और वित्तीय प्रबंध का कौशल सिखाना उनके भविष्य की भलाई में एक निवेश होगा। पैसे, बचत, बजट और जिम्मेदार खर्च की समझ को पहले से ही सिखा कर, हम उन्हें आत्मविश्वास से वित्तीय दुनिया की जटिलताओं का सामना करने की क्षमता प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, भारतीय छात्रों को केवल ‘पैसे कमाना’ नहीं, बल्कि ‘पैसे का प्रबंधन करना’ सिखाना देश की आॢथक रीढ़ को मजबूत करने के लिए भी बेहद जरूरी है।-डा. वरिन्द्र भाटिया
 


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