कांग्रेस के लिए सिद्धारमैया को नजरअंदाज करना मुश्किल
punjabkesari.in Saturday, May 30, 2026 - 04:09 AM (IST)
सिद्धारमैया, जो कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं, ने इस्तीफा दे दिया और अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी डी.के. शिवकुमार के लिए रास्ता साफ कर दिया है। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान को पार्टी के भीतर सिद्धारमैया के वफादारों को विश्वास में लेना होगा। इसमें उन्हें कैबिनेट में जगह देना और राज्य कांग्रेस इकाई में नेतृत्व के पद प्रदान करना शामिल हो सकता है। सिद्धारमैया एक जमीनी स्तर के नेता हैं, जिन्हें महत्वपूर्ण स्थानीय समर्थन प्राप्त है। ओ.बी.सी. के बीच उनके समर्थन आधार को नजरअंदाज करना मुश्किल है। पिछले 2 दशकों में कांग्रेस में आने के बाद से, सिद्धारमैया कांग्रेस के ‘अहिंदा’ सामाजिक गठबंधन के वास्तुकारों में से एक रहे हैं, जो अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों को एक साथ लाए और कर्नाटक में कांग्रेस के चुनावी गणित को आकार देने में सहायक रहे हैं।
कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें राज्यसभा सीट की पेशकश की और उन्हें एक राष्ट्रीय भूमिका दी थी। यह कदम एक तीर से दो निशाने साधने जैसा था। पहला, राहुल गांधी के सामाजिक न्याय अभियान को बढ़ावा देने के लिए सिद्धारमैया जैसे ओ.बी.सी. नेता को राष्ट्रीय स्तर पर लाना। दूसरा, सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच टकराव को चतुराई से टालना। लेकिन सिद्धारमैया ने इस प्रस्ताव को लेने से इंकार कर दिया और घोषणा की कि वह राज्य में सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे और अपनी अंतिम सांस तक सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लडऩे की कसम खाई। निकट भविष्य में चाहे कुछ भी हो, सिद्धारमैया 2028 में कांग्रेस की फिर से चुनाव जीतने की कोशिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।
राहुल-धर्मेंद्र प्रधान के बीच जुबानी जंग : सी.बी.एस.ई. ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद को लेकर राहुल गांधी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच जुबानी जंग जारी रही और इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सी.बी.एस.ई. परीक्षा और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओ.एस.एम.) मुद्दे पर अपनी टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कड़ा जवाब दिया है। मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार चुनावी हार के कारण निराश दिख रहे हैं और भारत की वैज्ञानिक प्रगति के साथ नहीं खड़े हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि विवाद के कारण छात्र अतिरिक्त तनाव का सामना न करें। इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को सी.बी.एस.ई. परिणाम को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परवाह होती, तो उन्होंने लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद करने के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त कर दिया होता। सी.बी.एस.ई. ओ.एस.एम. मुद्दे पर अपने सवालों को दोहराते हुए, गांधी ने पूछा कि सी.ओ.ई.एम.पी.टी. को अनुबंध क्यों दिया गया, जबकि कंपनी पहले भी किसी अन्य नाम से विवादों में रही थी।
भाजपा के नए राज्य पार्टी प्रमुख : भाजपा ने तीन राज्यों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के लिए नए राज्य इकाई अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की, जिनमें त्रिपुरा, हरियाणा और पंजाब शामिल हैं। ये नियुक्तियां ऐसे समय में हुई हैं, जब भाजपा विभिन्न राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी समीकरणों वाले राज्यों में पार्टी के राज्य नेतृत्व ढांचे को मजबूत करने और अपनी संगठनात्मक मशीनरी को तेज करने के अपने प्रयासों को जारी रखे हुए है। हर्ष मल्होत्रा को भाजपा की दिल्ली इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि केवल सिंह ढिल्लों पंजाब में पार्टी का नेतृत्व करेंगे। हरियाणा में पार्टी ने डा. अर्चना गुप्ता को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। अभिषेक देबरॉय को भाजपा की त्रिपुरा राज्य इकाई का अध्यक्ष नामित किया गया है। इस बीच, दिल्ली भाजपा के लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र बनी हुई है, क्योंकि हाल के चुनावी मुकाबलों ने केसरिया पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को तेज कर दिया है, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने यह प्रमुख निर्णय पंजाब में एक सिख चेहरा पेश करने की रणनीतिक चाल के हिस्से के रूप में लिया है, जिसमें 2027 के विधानसभा चुनावों पर जोर दिया गया है।
तृणमूल कांग्रेस नेताओं के इस्तीफे : पश्चिम बंगाल विधानसभा में हालिया चुनावी हार ने तृणमूल कांग्रेस (टी.एम.सी.) में एक डोमिनो प्रभाव पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप नए इस्तीफे हुए हैं। हालिया हाई-प्रोफाइल इस्तीफा पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन का है, जिन्होंने टी.एम.सी. के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है, जबकि टी.एम.सी. पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने पार्टी प्रवक्ता पद छोड़ दिया और कोलकाता नगर निगम की लोक लेखा समिति में अपने पद से इस्तीफा दे दिया।-राहिल नोरा चोपड़ा
