यू.जी.सी. नियमों को लेकर हंगामे के पीछे क्या कोई गहरी साजिश है?

punjabkesari.in Sunday, Feb 01, 2026 - 05:23 AM (IST)

मुझे तो यू.जी.सी. के नए नियमों के पीछे गहरी देशी-विदेशी साजिश की बू आ रही है और एक भूल या जानबूझ कर की गई गलती का राजनीतिक फायदे के लिए शोषण किया जा रहा है। सबसे पहले तो सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार संसद द्वारा कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी ही इस हंगामे के लिए मूलत: जिम्मेदार है, जिसने शायद धतूरा खाकर वकील इंदिरा जयसिंह द्वारा तैयार रिपोर्ट को बिना किसी गंभीर विचार किए दस्तखत करके शिक्षा मंत्रालय को भेज दिया। ज्ञातव्य हो कि इस कमेटी में हर पार्टी के सांसद थे और आज राजनीतिक फायदे के लिए इस कमेटी के एक भी सदस्य ने सुझाए गए नियमों पर अपनी आपत्ति दर्ज नहीं कराई और अब इनकी पाॢटयां यू.जी.सी. नियमों के खिलाफ आंदोलन को हवा दे रही हैं।  कमेटी की रिपोर्ट से भी ज्यादा मैं मानता हूं कि ज्यादा बड़ी गलती यू.जी.सी. चेयरमैन विनीत जोशी की है और उससे भी बड़ी गलती मानव संसाधन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है, जिन्होंने अपने मंत्रालय के मातहत काम करने वाले यू.जी.सी. को देश में चल रहे यू.जी.सी. नियमों के विरुद्ध आंदोलन का मौका दिया।

कमेटी, यू.जी.सी. और मानव संसाधन मंत्रालय ने अक्षम्य अपराध किया है जिससे देश भर में जातियों के बीच टकराव पैदा हो गया है। हड़तालें हो रही हैं, बंद हो रहे हैं, छात्र सड़कों पर हैं, विभिन्न जातिवादी संगठन सड़कों पर हैं और राजनीतिक पाॢटयां तो रोटियां सेंक ही रही हैं। सरकार की गलती तो है ही लेकिन निष्क्रियता और स्तब्धता इस आंदोलन को और उग्र बना रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने वीरवार को बहुत अच्छा निर्णय देते हुए यू.जी.सी. के नए नियमों पर स्थगनादेश देकर कहा कि पुराने नियम ही लागू रहेंगे और यू.जी.सी. एवं सरकार से इन नियमों के संदर्भ में सफाई मांगी है। इस विषय पर अगली सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में 19 मार्च तय कर दी गई है। इस निर्णय का शुरुआत में दोनों पक्षों ने हृदय से स्वागत किया, मिठाई भी बांटी गई लेकिन मुझे लगता है कि तुरंत ही राजनीतिक पाॢटयों ने सोचा कि मोदी सरकार को घेरने का बहुत बड़ा मौका हाथ से निकल रहा है और सर्वोच्च न्यायालय के संतुलित निर्णय के बावजूद विभिन्न कारणों से इस आंदोलन को जारी रखने का फैसला कर लिया।

मुझे तो लग रहा है कि इस आंदोलन में अब विदेशी टूल किट की एंट्री हो गई है, भारतीय राजनीतिक पाॢटयां कितनी बार कह चुकी हैं कि भारत में भी सरकार बदलने के लिए बंगलादेश, नेपाल, श्रीलंका जैसा जेन-जी आंदोलन होगा और यू.जी.सी. के अनर्गल नियमों ने विपक्षियों को एक देश व्यापी आंदोलन का मौका दे दिया। जब विश्व भर में अस्थिरता चल रही है, भारत का दबदबा बढ़ रहा है, ऐसा कोई भी आंदोलन हमारी प्रगति और विकास को अवरुद्ध कर सकता है। सरकार को चाहिए कि तुरंत हस्तक्षेप कर इस आंदोलन को समाप्त करवाए, वरना आग लगवाने वाले इसे शांत नहीं होने देंगे और सरकार को अस्थिर करने के लिए अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते रहेंगे और आंदोलन जारी रखवाने में ही अपना हित समझेंगे। देश से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें तो येन-केन-प्रकारेण सत्ता चाहिए।

सरकार को अपनी गंभीरता दिखाते हुए और इस आंदोलन को शांत करने के लिए विश्वास दिलाना चाहिए कि किसी भी जाति का कोई भी निर्दोष फंसाया नहीं जा सकता और दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सर्वप्रथम नरेंद्र मोदी को  यू.जी.सी. चेयरमैन विनीत जोशी और मानव संसाधन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर देना चाहिए, जिनकी लापरवाही ने सरकार को अनचाही समस्या में डाल दिया है। इसके बाद सभी जातियों के प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनाई जानी चाहिए, जो सुझाए कि कैसे किसी भी जाति का कोई निर्दोष फंसे नहीं, दोषी बचे नहीं। कमेटी के सुझाव निष्पक्ष और नि:स्वार्थ दिखने ही नहीं, होने भी चाहिएं।  आंदोलनकारियों को भी सोचना चाहिए कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने यू.जी.सी. के विवादास्पद नियम पर स्थगनादेश दे दिया है तब इस विषय का निस्तारण होने तक कोई भी आंदोलन राजनीति से ही प्रेरित है, जिसमें देशी-विदेशी ताकतों की साजिश दिखाई दे रही है। देश का हित सर्वोच्च होना चाहिए।-राकेश शर्मा
 


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