‘भव्य राम मंदिर’ से प्रदर्शित हो भारतीय संस्कृति की झलक

2020-07-24T02:15:25.247

भारत में उच्चकोटि के आदर्शों के संस्थापक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र महाराज जी के अयोध्या में 500 वर्षों के इंतजार के बाद मंदिर के निर्माण का विधिपूर्ण भूमि पूजन करने के लिए 5 अगस्त को मंदिर ट्रस्ट कमेटी के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया है। 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के दौरान हजारों राम भक्तों और श्रद्धालुओं को शहादत का जाम पीना पड़ा।

आखिरकार भारत की सर्वोच्च न्यायपालिका ने मंदिर के निर्माण के लिए ऐतिहासिक फैसला दिया। सभी भारतीयों के लिए यह अति खुशी का मौका है। श्री राम का किसी विशेष धर्म समूह और सम्प्रदाय से संबंध नहीं रखता, बल्कि  सारे विश्व के लिए अति हितकारी, कल्याणकारी और लाभदायक है। भगवान वाल्मीकि ने श्रीमद् वाल्मीकीय रामायण में भगवान रामचंद्र के अनेक गुणों का वर्णन करते हुए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम से सुशोभित किया है क्योंकि वह सहनशीलता, धैर्य, सहयोग, प्यार, क्षमा, वीरता के गुणों से संपन्न थे। 

अब का बना हुआ मंदिर हजारों वर्ष तक लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेगा, इसलिए यह अति आवश्यक है कि पुराने बने हुए ढांचे पर मंदिर निर्माण से पहले देश में निर्मित भिन्न-भिन्न मंदिरों का गहराई से अध्ययन किया जाए। मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों को अमृतसर में पवित्र श्री हरिमंदिर साहिब की परिक्रमा, सरोवर,  दर्शनी ड्योढ़ी तथा भव्य दरवाजों और अन्य आवश्यक बिदुओं का अध्ययन करना चाहिए, ताकि मंदिर की विशालता, भव्यता, शानदार ढांचा आकर्षण का केंद्र बने और भारतीय संस्कृति की झलक को प्रदर्शित करता हो। 

मंदिर के निर्माण के लिए इस समय 60 एकड़ जमीन उपलब्ध है, जोकि विशाल और ऐतिहासिक मंदिर के निर्माण के लिए कम है। सरकार को कम से कम 100 एकड़ जमीन का प्रबंध करना चाहिए। जमीन का अधिग्रहण करने और मंदिर के निर्माण के लिए सरकार को धन खर्च करने की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि भारत के सभी लोग इसके लिए खुलकर दान देंगे और हर तरह की कमी को पूरा करने के लिए भारतीय वचनबद्ध हैं।

निर्माण में बेशक कुछ समय और लग जाए, परंतु पहले जमीन का अधिग्रहण करना अति आवश्यक है। मंदिर परिसर में सरोवर का होना अति आवश्यक है और यह हमारी प्राचीन मर्यादा के अनुकूल है। सरोवर के बिना सब काम अधूरा होता है, क्योंकि लाखों श्रद्धालु भिन्न-भिन्न स्थानों में जैसे हरिद्वार, इलाहाबाद, उज्जैैन, जगन्नाथ पुरी और अन्य स्थानों पर स्नान करते हैं, इसलिए अयोध्या में भी निर्मित सरोवर में वह अवश्य स्नान करने के लिए आएंगे। 

वर्तमान प्रावधान के अनुसार मंदिर परिक्रमा के लिए केवल 10 फुट चौड़ी पट्टी का प्रबंध किया गया है, जो अति छोटी है। लाखों श्रद्धालुओं के आने और आसानी से परिक्रमा करने के लिए कम से कम 40 से 50 फुट चौड़ी पट्टी होनी चाहिए, ताकि भीड़ के समय में भी श्रद्धालु सुगमता से परिक्रमा कर सकें। मंदिर परिसर में विश्व के सबसे बड़े म्यूजियम का निर्माण किया जाना चाहिए क्योंकि भारत की प्राचीन संस्कृति अति समृद्ध है और प्राचीनकाल से लेकर वर्तमान काल तक इतिहास का वर्णन करने के लिए बहुत बड़ी जगह चाहिए। 

सर्वप्रथम श्री राम चंद्र महाराज के सम्पूर्ण जीवन से संबंधित सभी घटनाओं को चित्रकारी या मूर्ति कला के द्वारा प्रदॢशत किया जाए। दूसरे, उस समय के प्रसिद्ध प्रतिष्ठित और विद्वान ऋषि-मुनियों, संत महात्माआें, गुरु साहिबों , प्राचीनकाल के राजा-महाराजाओं के साथ-साथ समूचे भारत में संस्कृति को समृद्ध बनाने वाले भक्तों तथा देश के समूचे इतिहास में हुई घटनाओं का भी जिक्र किया जाए, ताकि देश और विदेश से आने वाले धार्मिक पर्यटक और श्रद्धालु देश की संस्कृति को देखकर अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकें। इसके साथ ही श्री रामचंद्र जी की आयोध्या से लेकर श्रीलंका तक जिन-जिन महान लोगों से मुलाकात हुई उनको भी म्यूजियम में स्थान दिया जाए। म्यूजियम में भारत के प्राचीन ग्रंथ जिनमें वेद, पुराण, उपनिषद, श्री रामायण, महाभारत, श्रीमद्भागवत गीता, अष्टावक्र गीता और अन्य विद्वानों, दानिशमंदों द्वारा लिखित पांडुलिपियों को भी रखा जाए, ताकि भारत की विशाल संस्कृति के संबंध में लोगों को जानकारी मिल सके। 

मंदिर परिसर में कम से कम 5 विशाल भवनों का निर्माण किया जाए, जहां हजारों की तादाद में लोग बैठ कर संस्कृति के विद्वानों के संदेश सुन सकें, क्योंकि मंदिर केवल पूजा, आराधना, अर्चना और नतमस्तक होने के केवल पवित्र स्थान  नहीं होते, बल्कि परिवार, समाज, राष्ट्र और मानवता के संदेश के भी केंद्र होते हैं। विद्वान ऋषि-मुनियों के रहने का इंतजाम भी होना चाहिए, विशाल लंगर, सत्संग, मैडीटेशन, विश्राम घर और विश्व संस्कृति दर्शन हाल का भी निर्माण किया जाए।

मंदिर के निर्माण के बाद भारत से ही नहीं बल्कि विश्व के दूसरे देशों के नागरिक भी मंदिर के दर्शन हेतु अवश्य आएंगे, जिनके रहने के लिए खूबसूरत एवं हर तरह की सुविधा से सम्पन्न भवन एवंं कमरे बनाए जाएं ताकि इस मंदिर की शोभा एवं भारतीय सर्वधर्म समभाव की सुगंध दूर-दूर तक पहुंच सके। मंदिर के चारों तरफ दीवार के निर्माण के समय प्रत्येक 500 फुट की दूरी पर बड़े ही शानदार दरवाजों की तामीर की जाए और उनके अंदर दर्शनी ड्योढिय़ां बनाई जाएं, जो भारतीय चित्रकला से सुशोभित हों ताकि लाखों लोगों के मंदिर परिसर में प्रवेश करने और बाहर जाने में कोई मुश्किल न आ सके। चारदीवारी के बाहर चारों तरफ 100 फुट चौड़ी सड़क का निर्माण किया जाए। ताकि लोग आसानी से वहां आ-जा सकें। 

श्री राम चंद्र जी ने  अपने शासनकाल में लोगों को हर तरह की सुविधा मुहैया करने के लिए एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना की, जिसे सदियों से राम राज्य कहा गया है, जहां किसी भी तरह का भेदभाव और शोषण नहीं होता था। इसलिए समूचे भारतीय द्वीप समूह में सदियों से लोग राम लीलाएं बड़ी खुशी, श्रद्धा और अदबो-अदाब से करते आए हैं। जिसमें आज्ञाकारी औलाद, भाइयों का आपसी प्यार, पत्नी का पति के प्रति पूर्ण समर्पण तथा स्वस्थ एवं स्वच्छ समाज के निर्माण का संदेश वर्तमान युग के लिए बड़ा महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रसिद्ध शायर अल्लामा इकबाल ने श्री राम की प्रभावशाली प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा था। है राम के वजूद पे, हिंदुस्तान को नाज। अहल-ए-नजर समझते हैं उनको इमाम-ए-हिंद।-प्रो. दरबारी लाल पूर्व डिप्टी स्पीकर, पंजाब विधानसभा
 


Pardeep

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