ड्रिफ्ट से डिलीवरी तक : राजस्थान में भजन लाल शर्मा का 2 वर्षीय रिपोर्ट कार्ड
punjabkesari.in Monday, Mar 23, 2026 - 05:37 AM (IST)
राजस्थान सरकार के शासन की जितनी गहराई से जांच की जाए, कांग्रेस प्रशासन को सत्ता से हटाए जाने के 2 वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद, उतना ही स्पष्ट होता है कि अशोक गहलोत का 5 वर्षीय शासन (2018-2023) राज्य के लिए व्यर्थ का दौर साबित हुआ। पार्टी के अंदरूनी विवाद, खासकर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच, अक्सर गहलोत को अपनी कुर्सी बचाने में उलझाए रखते थे, न कि प्रभावी शासन में। अंतत: 2023 के चुनावों में मतदाताओं ने उनकी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। वर्तमान भाजपा सरकार ने गहलोत सरकार की इन गलतियों से सबक लिया प्रतीत होता है। पिछले 2 वर्षों में राजस्थान एक शांत, अधिक स्थिर और ठोस शासन का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें परियोजनाओं के क्रियान्वयन और डिलीवरी की तेज गति पर ध्यान दिया गया है।
पानी-सभ्यतागत प्राथमिकता का समाधान : एक ऐसे राज्य में, जहां पानी की कमी ने इतिहास और आदत दोनों को आकार दिया है, जल प्रबंधन सिर्फ नीति का विषय नहीं, बल्कि सभ्यतागत ङ्क्षचता है। राम जल सेतु ङ्क्षलक जैसी बड़ी परियोजनाओं की ओर कदम, जिसमें 26,000 करोड़ रुपए के कार्य आदेश जारी किए गए हैं, साथ ही यमुना जल के उपयोग के प्रयास (एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित और डी.पी.आर. कार्य प्रगति पर), पैचवर्क समाधान की बजाय दीर्घकालिक रणनीति का संकेत देते हैं। इसी बीच, जल जीवन मिशन के तहत नल से जल कनैक्शन का विस्तार 14 लाख से अधिक परिवारों तक पहुंच चुका है।
इंफ्रास्ट्रक्चर-आर्थिक धमनियों का निर्माण : 42,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का विस्तार और उन्नयन, जिसमें निर्माण और अपग्रेडेशन पर 29,333 करोड़ रुपए खर्च किए गए, सिर्फ अमूर्त कनैक्टिविटी के बारे में नहीं है। राजस्थान जैसे विशाल राज्य में सड़कें आॢथक धमनियां हैं। वे तय करती हैं कि माल कितनी तेजी से पहुंचता है, बच्चे स्कूल कितनी आसानी से जाते हैं और दूरदराज के समुदाय राज्य के अन्य हिस्सों से कितना जुड़ा महसूस करते हैं। यहां पुरानी दुनिया का एक तर्क है, सड़कें बनाओ, विकास अपने आप आएगा।
ऊर्जा क्रांति-खेतों और भविष्य को शक्ति : ऊर्जा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उत्पादन क्षमता में 8,261 मैगावाट की वृद्धि हुई। दिन में खेतों तक बिजली पहुंचाना किसानों की दिनचर्या बदलता है, अनिश्चितता कम करता है और उत्पादकता बढ़ाता है। पी.एम.-कुसुम योजना के तहत 2,884 मैगावाट क्षमता स्थापित की गई और 2.10 लाख कृषि कनैक्शन जारी किए गए, 22 जिलों में अब दिन में बिजली उपलब्ध है। सौर ऊर्जा पर समानांतर जोर 59,000 सोलर पंपों (921 करोड़ रुपए सबसिडी) और पी.एम. सूर्य घर योजना के तहत 1.31 लाख रूफटॉप सोलर प्लांटों से स्पष्ट है।
कृषि-किसानों के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा जाल : कृषि राजस्थान की अर्थव्यवस्था का केंद्र बनी हुई है। किसान सम्मान निधि के तहत 76 लाख से अधिक किसानों के खातों में 11,000 करोड़ रुपए से ज्यादा सीधे ट्रांसफर किए गए। 50,802 करोड़ रुपए के ब्याज-मुक्त फसल ऋण वितरित किए गए और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 6,473 करोड़ रुपए के क्लेम किसानों को दिए गए। इनके साथ 48,591 करोड़ रुपए की बिजली सबसिडी और 2 लाख से अधिक नए कृषि कनैक्शन एक सुरक्षा जाल बनाते हैं।
महिलाओं का सशक्तिकरण : लाडो (लाड़ली) प्रोत्साहन योजना के तहत बालिकाओं को दी जाने वाली राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपए कर दी गई। 20 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया और 16 लाख से अधिक ‘लाखपति दीदी’ बन चुकी हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में राशि 5,000 से बढ़ाकर 6,500 रुपए की गई। मां वाऊचर योजना गर्भवती महिलाओं को मुफ्त सोनोग्राफी प्रदान करती है, जिसका लाभ अब तक 2.26 लाख से अधिक महिलाओं को मिल चुका है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 10 प्रतिशत की कमी आई है। वृद्ध, विधवाओं, एकल महिलाओं, दिव्यांगों और छोटे/सीमांत किसानों की पैंशन बढ़ाकर 1,250 रुपए प्रति माह कर दी गई। मुख्यमंत्री मंगल शिशु बीमा योजना के तहत 14 लाख से अधिक बच्चों को मुफ्त बीमा पॉलिसी जारी की गई।
कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा : अपराधों में कुल 14 प्रतिशत औसत कमी (महिलाओं के खिलाफ अपराध सहित) कानून-व्यवस्था में सुधार का संकेत देती है, हालांकि ऐसे दावों की जांच और निरंतरता आवश्यक है। आवास, रोजगार और औद्योगिक प्रोत्साहन : प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2 लाख से अधिक घर पूरे कर जरूरतमंदों को सौंपे गए। लगभग 1.25 लाख नियुक्तियां की गईं, विभिन्न चरणों में 1.33 लाख पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। निजी क्षेत्र में अब तक लगभग 3 लाख रोजगार प्रदान किए गए। 2026 के लिए ‘सवा लाख नौकरी’ कैलेंडर जारी किया गया। उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पिछले 2 वर्षों में 34 से अधिक क्षेत्र-विशेष नीतियां जारी की गईं।
आर्थिक मील के पत्थर : प्रति व्यक्ति आय पहली बार 2 लाख रुपए के पार, अब 2,02,349 रुपए हो गई है। आर्थिक सुधारों और ईज ऑफ डूइंग बिजनैस प्रयासों से औसत जी.एस.डी.पी. वृद्धि दर 12.25 प्रतिशत तक बढ़ गई। राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वैस्टमैंट समिट 2024 में 35 लाख करोड़ रुपए के एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित हुए, जिनमें से 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं। केंद्रीय योजनाओं में राजस्थान 11 में प्रथम, 5 में द्वितीय और 7 में तृतीय स्थान पर है (कुछ रिपोर्टों में तृतीय 9 में)। सभी में जो सबसे अलग दिखता है वह है मंशा की एक निश्चित निरंतरता। यह शोबाजी का जोरदार मॉडल नहीं, बल्कि स्थिर शासन का है। इसमें भव्य इशारे या व्यापक घोषणाएं नहीं हैं, बल्कि यह संचय से काम करता है-योजना-दर-योजना, क्षेत्र-दर-क्षेत्र।
कई मायनों में यह पुरानी प्रशासनिक शैली की याद दिलाता है, जहां प्रगति अचानक छलांगों से कम और स्थिर, क्रमिक लाभों से अधिक मापी जाती थी। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा आज उस राह पर चलते दिखते हैं। पूर्णत: नहीं, चुनौतियों के बिना नहीं लेकिन एक जमीनी व्यावहारिकता के साथ।-शहजाद पूनावाला (राष्ट्रीय प्रवक्ता, भाजपा)
