इंकार से मान्यता तक : कनाडा और खालिस्तानी खतरा

punjabkesari.in Sunday, May 17, 2026 - 04:18 AM (IST)

कनाडाई  सुरक्षा खुफिया सेवा (सी.एस.आई.एस.) की सार्वजनिक रिपोर्ट 2025, जो 1 मई, 2026 को जारी की गई, ओटावा की खतरा मूल्यांकन पद्धति में एक उन्नत विकास को दर्शाती है, विशेष रूप से खालिस्तानी उग्रवाद के मामले में। इस रिपोर्ट में इस गतिविधि को राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक उग्रवाद (PMVE) की श्रेणी में रखा गया है और स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ‘कनाडा में स्थित खालिस्तानी उग्रवादियों (CBKEs)) द्वारा हिंसक उग्रवादी गतिविधियों में निरंतर संलिप्तता कनाडा और कनाडाई हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु खतरा बनी हुई है’।   
रिपोर्ट में 1985 की एयर इंडिया फ्लाइट 182 में बम धमाके की 40वीं बरसी का सीधा संदर्भ भी दिया गया है, जिसका ष्टस्ढ्ढस् न केवल यादगारी मकसद के लिए, बल्कि एक चेतावनी के रूप में उपयोग करती है कि ष्टक्च्यश्व से जुड़ी हिंसा पहले भी कनाडा पर ही प्रहार कर चुकी है, जिससे यह बात उजागर होती है कि इस खतरे को पूरी तरह से बाहरी नहीं माना जा सकता। लेकिन रिपोर्ट खालिस्तान के लिए शांतिपूर्ण वकालत (जो कनाडाई कानून के तहत सुरक्षित है) और हिंसक उग्रवाद के बीच स्पष्ट अंतर करती है। केवल उन्हीं व्यक्तियों को खालिस्तानी उग्रवादियों के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो कनाडा को आधार बनाकर ‘हिंसा को बढ़ावा देते हैं, धन इकट्ठा करते हैं या योजना बनाते हैं, मुख्य रूप से भारत में’।

भले ही यह कानूनी ढांचा नैतिक रूप से महत्वपूर्ण है, यह एक ढांचागत कमजोरी को भी उजागर करता है-सुरक्षित भाषण और परिचालन योजना के बीच का स्थान वही है, जहां उग्रवादी नैटवक’ ऐतिहासिक रूप से सक्रिय और अनुकूलनशील रहे हैं। रिपोर्ट में विशिष्ट संगठनों या व्यक्तियों की पहचान नहीं की गई, इसकी बजाय अपने निष्कर्षों को राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक उग्रवाद के व्यापक ढांचे में रखा गया है। ऐसा करके, कनाडाई अधिकारियों ने मुद्दे को अधिक पारदर्शी और सीधे तौर पर स्वीकार करने की ओर इशारा किया है, साथ ही उन सामान्य बयानबाजियों से बचने की कोशिश की है, जो पूरे समुदायों को अनुचित रूप से लपेट सकती हैं। 

जून 2025 में जारी अपनी 2024 की वार्षिक रिपोर्ट में CSIS  ने पहली बार स्पष्ट रूप से पुष्टि की थी कि खालिस्तानी उग्रवादी कनाडा की धरती को अपना आधार बनाकर ङ्क्षहसक गतिविधियों को बढ़ावा देने, धन एकत्र करने और योजना बनाने के लिए उपयोग कर रहे हैं, जिनका मुख्य निशाना भारत है। यह परिवर्तन विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली कनाडाई सरकार ने दिसम्बर 2018 में जारी ‘कनाडा के लिए आतंकवादी खतरे पर सार्वजनिक रिपोर्ट’ से ‘सिख (खालिस्तानी) उग्रवाद’ का संदर्भ हटा दिया था, जो देश में मौजूद खालिस्तान समर्थक तत्वों के दबाव के बाद हुआ था।  

भारत लंबे समय से कनाडा पर खालिस्तानी और पंजाबी मूल के अपराधी नैटवर्क के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनने का आरोप लगाता आ रहा है। बार-बार शिकायतों और औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोधों के बावजूद, ओटावा द्वारा बहुत कम कार्रवाई की गई है। राष्ट्रीय जांच एजैंसी के अनुसार, 2023 में चिन्हित किए गए 28 सबसे वांछित गैंगस्टर-आतंकवादी भगौड़ों में से 9 कनाडा से संचालित हो रहे थे। इनमें लखबीर सिंह उर्फ लंडा, अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला (दोनों 2023 में भारत द्वारा व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित) के अलावा सुखदूल सिंह उर्फ सुखा दुनेके (सितम्बर 2023 में मारा गया), गुरपिंदर सिंह उर्फ बाबा डल्ला, सतवीर सिंह वङ्क्षडग़ उर्फ सैम, स्नोवर ढिल्लों, चरणजीत सिंह उर्फ रिंकू बेहला, रामनीत सिंह उर्फ रमन जज और गगनदीप सिंह उर्फ गगना हथूर शामिल हैं।  

इस बीच, CSIS रिपोर्ट भारत पर कड़ा रुख अपनाती है और इसे चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय दमन और विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों में शामिल करती है। भारत के प्रति रवैया 2024 की तुलना में कुछ हद तक नरम पड़ा है, जब निज्जर की हत्या का मामला छाया हुआ था, फिर भी 2025 की रिपोर्ट कनाडा की धरती पर सिख एक्टिविस्टों को निशाना बनाने वाली कथित भारतीय खुफिया गतिविधियों के बारे में चिंताओं को उजागर करती है। यह दोहरी फ्रेमिंग-खालिस्तानी उग्रवाद और भारतीय हस्तक्षेप दोनों को स्वीकार करना-कनाडा द्वारा घरेलू प्राथमिकताओं और भू-राजनीतिक संवेदनशीलता के बीच तालमेल बिठाने का प्रयास है।  

ताजा रिपोर्ट में हरदीप सिंह निज्जर मामले का कोई उल्लेख न होना विशेष रूप से ध्यान खींचने वाला है। ष्टस्ढ्ढस् सार्वजनिक रिपोर्ट 2025 कनाडा में खालिस्तानी मुद्दे को लेकर एक प्रगतिशील और अधिक संतुलित जांच की ओर एक क्रमिक बदलाव को दर्शाती है। रिपोर्ट का वास्तविक महत्व इस तथ्य में है कि कई वर्षों तक खालिस्तान के खतरे को मुख्य रूप से भारत-कनाडा संबंधों के तनावपूर्ण नजरिए से देखे जाने के बाद, अब कनाडाई खुफिया समुदाय इसे घरेलू राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के भीतर रखकर देख रहा है।-निजीश एन   


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