‘लेटरल एंट्री’ पर ममता केंद्र के नक्शेकदम पर

10/13/2021 4:05:37 AM

भवानीपुर उप-चुनाव में अपनी शानदार विजय से उत्साहित पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार में ‘लेटरल एंट्री’ लागू करने की संभावनाएं तलाश रही हैं। सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार को आशा है कि उसे वरिष्ठ पदों पर डोमेन विशेषज्ञ मिल जाएंगे जैसे कि विशेष सचिव तथा संयुक्त सचिव। लेटरल एंट्री इन विशेषज्ञों को राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में सलाहकार के तौर पर नियुक्त करने के सक्षम बनाएगी। 

हमें पता चला है कि राज्य के गृह सचिव बी.पी. गोपालिका अंतिम निर्णय लेने के लिए ममता दीदी के पास भेजने के लिए प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रहे हैं। जानकारों का कहना है कि प्रस्तावित नियुक्तियां अनुबंध के आधार पर होंगी तथा लेटरल एंट्रैंस को कम से कम संबंधित विभाग में काम करने का 15 वर्षों का अनुभव होना चाहिए। उनके वेतन तथा भत्तों पर गृह विभाग तथा प्रशासनिक सुधार विभाग काम कर रहे हैं। प्रत्यक्ष रूप से सरकार ऐसे पर्यवेक्षकों की तलाश में है जिन्हें नागर विमानन, वाणिज्य तथा आॢथक मामलों में विशेषज्ञता प्राप्त हो और उनकी आयु 40 वर्ष से कम न हो। यद्यपि पर्यवेक्षकों का कहना है कि केंद्र की लेटरल एंट्री योजना, जिसकी पहले घोषणा 2018 में की गई थी, को उतनी सफलता नहीं मिली जैसी कि हर किसी को आशा थी। मगर केंद्र इस पर काम कर रहा है तथा इस वर्ष के शुरू में लेटरल रिक्रूटमैंट्स के लिए संयुक्त सचिवों तथा निदेशकों के स्तर पर 30 पदों के लिए विज्ञापन दिया था। 

ई.डी. में अजब घटनाक्रम जारी : एक दुविधापूर्ण घटनाक्रम में कथित तौर पर वित्त मंत्रालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें सत्यब्रत कुमार के कार्यकाल में विस्तार की मांग की गई थी, जो वर्तमान में ई.डी. में संयुक्त निदेशक के तौर पर कार्य कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय के राजस्व विभाग ने ई.डी. को सत्यब्रत कुमार को सेवा मुक्त करने के लिए तुरन्त कार्रवाई करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने निदेशालय के उस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है जिसमें उसने सत्यब्रत कुमार की अतिरिक्त निदेशक के रैंक पर पदोन्नति के लिए उनकी उम्मीदवारी को सी.वी.सी. के नेतृत्व वाली समिति के सामने रखने को कहा था। यह कहा गया है कि यदि जरूरत पड़ी तो इस मामले में ई.डी. संभवत: सुप्रीमकोर्ट का रुख कर सकता है। 

जानकारों का कहना है कि जहां ऐसे आदेश असामान्य हैं लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की स्वीकृति के एक विशेष उल्लेख ने इसे वास्तव में एक दुर्लभ मामला बना दिया है। इसमें गंभीर बात यह है कि कुमार, जो एक आई.आर.एस. अधिकारी हैं, को अपने ‘प्रत्यर्पण’ बारे कोई जानकारी ही नहीं है। मजे की बात यह है कि एक अन्य ई.डी. अधिकारी सुशील कुमार, जो विशेष निदेशक (मुम्बई) थे को इस वर्ष जुलाई में उनके मूल काडर में प्रत्यॢपत (वापस भेज) कर दिया गया। 

बाबू की असामान्य लम्बी पारी लम्बी हुई: ऐसे बाबू दुर्लभ हैं जो राजग सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी उसी पद पर अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं लेकिन इंडिया ट्रेड प्रमोशन आर्गेनाइजेशन (आई.टी.पी.ओ.) के सी.एम.डी. एल.सी. गोयल ने यह कर दिखाया है। गोयल को अप्रत्याशित तौर पर लगातार पांचवीं बार सेवा विस्तार दिया गया है जो उनके कार्यकाल को अगले वर्ष में ले जाएगा। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव तथा 1979 बैच के केरल काडर के सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी  को 2015 में आई.टी.पी.ओ. का प्रमुख नामित किया गया था। गोयल के कार्यकाल की लम्बाई आमतौर पर दिल्ली के बाबुओं में चर्चा का विषय बनी रहती है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पी.एम.ओ.) के अतिरिक्त गोयल संभवत: एकमात्र बाबू हैं जिन्हें उसी पद पर निरंतरता तथा स्थिरता का आनंद उठाने को मिला है। मगर साधारण उत्तर यह है कि गोयल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक पसंदीदा परियोजना की अध्यक्षता कर रहे हैं। आकांक्षावान कीमत के लिहाज से यह सैंट्रल विस्टा परियोजना के बराबर ही है। गोयल प्रगति मैदान में इंटरनैशनल एग्जीबिशन एंड कन्वैंशन सैंटर के पुनॢवकास के प्रभारी हैं जो प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी द्वारा की गई पहली घोषणाओं में से एक हैं। जिस चीज ने उनको मोदी की ओर आकॢषत किया, सूत्रों का कहना है कि गोयल बहुत बढ़-चढ़ कर आगे आने वालों में नहीं हैं तथा बाबुओं के क्षेत्र में वह एक बेहूदगी न करने वाले तथा निष्ठावान अधिकारी के तौर पर जाने जाते हैं। मोदी की इच्छा है कि कन्वैंशन सैंटर उनके नए भारत का एक विशिष्ट प्रतीक हो तथा गोयल ने सुनिश्चित किया है कि ऐसा ही होगा।-दिल्ली का बाबू दिलीप चेरियन 
 


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Content Writer

Pardeep

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