चीन पर वित्तीय संकट की मार, बैंकों की रक्षा के लिए सड़कों पर टैंक उतारे

punjabkesari.in Friday, Aug 12, 2022 - 06:02 AM (IST)

दुनिया की दूसरी आर्थिक महाशक्ति चीन अब एक बहुत बड़ी आर्थिक तबाही की तरफ बढ़ रहा है। शायद इस बात पर कई लोगों को विश्वास न हो, लेकिन सच्चाई यह है कि चीन के बैंक अब दिवालिया होने जा रहे हैं, इनमें जिन लोगों ने अपने जीवन भर की कमाई जमा की थी वह अब उन्हें वापस नहीं मिल रही। इन लोगों की तरफ से किसी विद्रोह और ङ्क्षहसा की भनक लगते ही चीन ने आधी रात को अपने कुछ शहरों की आम सड़कों पर टैंक उतार दिए। ये टैंक उतारे गए हैं बैंकों की रक्षा के लिए, ताकि इन्हें लोगों के गुस्से का शिकार होने से बचाया जा सके। दुनिया को स्तब्ध कर देने वाली यह घटना चीन में 20 जुलाई को घटी। 

33 वर्ष पहले वर्ष 1989 में तिनानमिन चौराहे पर चीन में लोकतंत्र समर्थक विद्याॢथयों की मांगों को कुचलने के लिए चीन सरकार ने उन पर टैंक चलवा दिए थे। इस बार भी चीन की सरकार लोगों को 33 साल पुरानी बात याद दिलाना चाहती है कि अगर बैंकों को जनता ने नुक्सान पहुंचाया तो उनके विद्रोह को कुचलने के लिए सरकार फिर से तिनानमिन वाली घटना को दोहरा सकती है। 

पिछले कुछ दिनों में चीन में रियल एस्टेट के दामों में 50 फीसदी से भी ज्यादा की कमी आई है। जिन लोगों ने मकान और दूसरी अचल सम्पत्ति खरीदने के लिए बैंकों से उधार लिया था, अब वह बैंकों की किस्तें नहीं चुका रहे। प्रॉपर्टी के दामों में आधे से अधिक गिरावट के बाद लोगों ने यह कहते हुए किस्तें चुकाने से मना कर दिया कि जब प्रॉपर्टी के दाम आधे से ज्यादा गिर चुके हैं तो अब हम किस्तें क्यों चुकाएं। हमने तो जितनी किस्त बैंकों को दी हैं, वह संपत्ति की वर्तमान कीमतों के हिसाब से पूरी हो चुकी हैं। इससे चीन के बड़े बैंकों को अब पैसा नहीं मिल रहा और इसका असर चीन की अर्थव्यवस्था पर दिखने भी लगा है। 

दरअसल कुछ वर्ष पहले चीन के बैंकों में एक प्रतिस्पर्धा हो रही थी, जो लोगों को पैसे उधार देने के लिए थी। उस समय चीन के रियल एस्टेट में चढ़ाव का दौर था और मध्यम और निम्न वर्ग के चीनी लोग पैसे बचा कर प्रॉपर्टी में निवेश कर रहे थे। वे लोग मकान खरीद रहे थे, ताकि आने वाले समय में उन मकानों की कीमतों में उछाल आने पर वे उन्हें बेच कर लाभ कमा सकें। लेकिन जब लोग बैंकों में पैसा नहीं जमा करवा रहे हैं, तो बैंकों के पास पैसा कहां से आएगा? 

चीन सरकार को भनक लग चुकी थी कि लोग बैंकों से अपना जमा पैसा निकालना चाहते हैं, तो सरकार के इशारे पर बैंकों ने लोगों के खातों को फ्रीज कर दिया, यानी अब कोई भी जमाकत्र्ता अपना पैसा बैंकों से नहीं निकाल सकता। बैंकों ने कहा कि उनके पास नगद पैसा नहीं है, इसलिए बैंक लोगों का पैसा लौटाने में असमर्थ हैं। आर्थिक मामले के जानकारों के अनुसार चीन के बैंकों में वहां की आम जनता का करीब 1 खरब रुपया जमा है। पिछले सप्ताह जब हेनान प्रांत में लोगों के खाते बैंकों ने फ्रीज किए थे, उस समय सड़कों पर 5000 लोगों ने सड़कों पर 2 दिनों तक प्रदर्शन किया था और पुलिस से लोगों की हिंसक झड़प भी हुई थी। उस समय चीन सरकार की सारी तिकड़म नाकामयाब रही थी। तब चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने कहा था कि वह लोगों का पैसा जल्दी ही लौटा देगी। 

चीन सरकार ने लोगों को उनका पैसा लौटाने की जो समय-सीमा दी थी, वह पूरी होने पर सरकार लोगों का पैसा लौटाने से मुकर गई और उन्हें डराने के लिए सड़कों पर टैंकों की तैनाती कर दी। इसके साथ ही चीन सरकार ने यह घोषणा कर दी कि जिन लोगों का पैसा बैंकों में जमा है, वे उनका निवेश माना जाएगा। लेकिन इस निवेश की कोई समय-सीमा सरकार ने नहीं बताई। यानी सरकार ने लोगों का पैसा लौटाने से मना करने के लिए अनोखा बहाना ढूंढ निकाला। सीधे तौर पर इस खतरे की गंभीरता को समझा जा सकता है कि जिस तरीके से चीन सरकार ने लोगों के संभावित विद्रोह को दबाने के लिए टैंकों को सड़कों पर उतार दिया, उसका क्या अंजाम होगा। 

दुनिया भर के जानकारों का मानना है कि विद्रोह को रोकने के लिए चीन सरकार ने सड़कों पर जो टैंक उतारे हैं, उससे लोगों में गलत संदेश जाएगा और यह विद्रोह खत्म होने की जगह और तेजी से भड़केगा। आज छोटी से छोटी घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होती है। चीन की सरकार को समझना चाहिए कि यह वर्ष 1989 नहीं है, जब खबरों को दबा दिया जाता था। इंटरनैट को पूरी तरह अपने कब्जे में लेना चीन सरकार के बस के बाहर की बात है। पिछले सप्ताह हेनान में जो बड़ा प्रदर्शन हुआ, उसे भी चीन की सरकार रोकने में असफल रही थी।


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