छात्रों द्वारा स्मार्टफोन का बेतहाशा इस्तेमाल चिंताजनक
punjabkesari.in Wednesday, Feb 26, 2025 - 05:59 AM (IST)
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इस समय पूरे देश में स्कूली छात्रों द्वारा मोबाइल का गैर-जरूरी इस्तेमाल सामाजिक चिंताओं को जन्म दे रहा है। देश में 21 राज्यों के ग्रामीण समुदायों में 6-16 वर्ष की आयु के स्कूली बच्चों के 6,229 अभिभावकों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि अधिकतर बच्चे पढ़ाई की बजाय मनोरंजन एवं अश्लील सामग्री के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। शोध एवं अध्ययनों में पाया गया है कि जो छात्र अपने फोन के करीब रहकर पढ़ाई करते हैं, उन्हें ध्यान केंद्रित करने में बहुत मुश्किल होती है, भले ही वे उसका इस्तेमाल न कर रहे हों। स्मार्टफोन के इस्तेमाल से नींद की गुणवत्ता कम होने, तनाव बढऩे, एकाग्रता बाधित होने, स्मृति लोप होने, अवांछित सामग्री का अधिक इस्तेमाल करने, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पडऩे जैसे खतरे उभरे हैं।
इन बढ़ते खतरों को देखते हुए दुनियाभर में अनेक शिक्षा प्रणालियों ने स्कूलों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगा दिया है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन, यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी (जी.ई.एम.) टीम के अनुसार, 60 शिक्षा प्रणालियों या वैश्विक स्तर पर पंजीकृत कुल शिक्षा प्रणालियों में से 30 प्रतिशत ने विशेष कानूनों या नीतियों के माध्यम से 2023 के अंत तक स्कूलों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगा दिया था। डिजिटल शिक्षा और स्मार्टफोन के इस्तेमाल में बच्चों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। यह कोई बुरी बात नहीं है। यह बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रहा है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी हैं, जिनमें डिजिटल शिक्षा को संतुलित और सुरक्षित बनाना आने वाले समय में एक प्रमुख चुनौती है। डिजिटल शिक्षा के बढ़ते प्रभाव के साथ आवश्यक हो गया है कि स्मार्टफोन और इंटरनैट का सही, संयमपूर्ण और सुरक्षित इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए।
सर्वविदित है कि विभिन्न ऑनलाइन शैक्षिक कार्यक्रमों के चलते छात्र-छात्राओं में मोबाइल फोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। तमाम पब्लिक स्कूलों ने ऑनलाइन शिक्षा के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल अनिवार्य तक बना दिया है। कमोबेश सरकारी स्कूलों में ऐसी बाध्यता नहीं है। लेकिन वैश्विक स्तर पर किए गए सर्वेक्षण से यह तथ्य सामने आया है कि स्मार्टफोन एक हद तक तो सीखने की प्रक्रिया में मददगार साबित हुआ है, लेकिन इसके नकारात्मक प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।आज 60 प्रतिशत माता-पिता अपने बच्चों द्वारा टैक्नोलॉजी के इस्तेमाल की निगरानी नहीं करते और 75 प्रतिशत बच्चों को उनके बैडरूम में टैक्नोलॉजी इस्तेमाल करने की खुली छूट मिली है।आज लाखों की संख्या में 9-10 साल की उम्र के इन बच्चों की नींद और स्टडीज टैक्नोलॉजी के दखल के कारण प्रभावित हो रही हैं।
स्मार्टफोन के अनियंत्रित इस्तेमाल से बच्चों में डिप्रैशन, एंग्जाइटी, अटैचमैंट डिस्ऑर्डर, ध्यान नहीं लगना, बाइपोलर डिस्ऑर्डर, उन्माद और प्रॉब्लमैटिक चाइल्ड बिहेवियर जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इससे पैदा होने वाली सभी प्रकार की समस्याओं पर स्कूल शिक्षा से जुड़े सभी लोगों का संजीदा होना आवश्यक लग रहा है और इसके लिए, सभी निहित कदम उठाना सामयिक जरूरत है।-डा. वरिन्द्र भाटिया